रायगढ़ पर मंगल बाजे बजने लगे। पहला संस्कार होना था। पहले महाराज का जनेऊ संस्कार हुआ ही नहीं था। अब तक के 350 साल के…
View More शिवाजी ‘महाराज’ : पहले की शादियाँ जनेऊ संस्कार से पहले की थीं, अतः वे नामंजूर हो गईंCategory: चहेते पन्ने
विश्व स्वास्थ्य दिवस : दो-तीन पैग सेहत के लिए फायदेमन्द हैं….. ये ग़लत है!
आज विश्व स्वास्थ्य दिवस है। दुनियाभर में सेहत सम्बन्धी बातें हो रही हैं। सो, ख्याल आया कि डायरी पर भी इस मसले पर बात कर…
View More विश्व स्वास्थ्य दिवस : दो-तीन पैग सेहत के लिए फायदेमन्द हैं….. ये ग़लत है!भक्तों की भक्ति-कीर्तन परम्परा : हनुमान की जय, हो जय जय, हनुमान की जय
भक्त हनुमान की जयन्ती पर भक्ति भाव के साथ आस्थावान भक्तों का नृत्य। इस वीडियो को देखने के बाद शायद किसी को इससे मतलब हो…
View More भक्तों की भक्ति-कीर्तन परम्परा : हनुमान की जय, हो जय जय, हनुमान की जयशिवाजी ‘महाराज’ : दुःख से अकुलाकर महाराज बोले, ‘गढ़ आया, सिंह चला गया’
सिंहगढ़ तो हाथ आया लेकिन महाराज को अपने जानी दोस्त, सूबेदार तान्हाजीराव मालुसरे से हाथ धोना पड़ा। सूर्याजी के दुःख का पार नहीं था। उन्होंने…
View More शिवाजी ‘महाराज’ : दुःख से अकुलाकर महाराज बोले, ‘गढ़ आया, सिंह चला गया’दुखी इंसान की उम्र 10 साल कम हो जाती है, सो सुखी कैसे रहें फिनलैंड से सीखिए!
दुखी होना और रहना किसी बीमारी से ज्यादा खतरनाक होता है। ऐसा हाल ही सामने आए शोध अध्ययनों से साबित हुआ है। अमेरिका में ‘एजिंग…
View More दुखी इंसान की उम्र 10 साल कम हो जाती है, सो सुखी कैसे रहें फिनलैंड से सीखिए!‘राजमा-चावल’ भारी तो होता है, लेकिन हम उसके आभारी भी हो सकते हैं!
एक बड़ी ‘रोचक-सोचक’ सी जानकारी आज सामने आई। जो जानकार हैं, वे तो इस बारे में जानते ही होंगे लेकिन शायद बहुत से और लोग…
View More ‘राजमा-चावल’ भारी तो होता है, लेकिन हम उसके आभारी भी हो सकते हैं!कुछ पल फुर्सत के निकालकर देखिए, सामने नई सृष्टि खुलने लगेगी
फुर्सत के पलों को फालतू की वक्त-बर्बादी समझने की गलती मत कीजिएगा। अलबत्ता कई बार कुछ लोग ऐसा करते भी होंगे। लेकिन हमेशा ऐसा नहीं…
View More कुछ पल फुर्सत के निकालकर देखिए, सामने नई सृष्टि खुलने लगेगीसंस्कार हमारे जीवन में कैसे अच्छी या बुरी भूमिका निभाते हैं?
संस्कार एक ऐसा शब्द है, जो हम अपने बचपन से ही और अभी भी रोज कहीं न कहीं सुनते ही रहते हैं। संस्कार का हमारे…
View More संस्कार हमारे जीवन में कैसे अच्छी या बुरी भूमिका निभाते हैं?शिवाजी ‘महाराज’ : कड़े पहरों को लाँघकर महाराज बाहर निकले, शेर मुक्त हो गया
महाराज औरंगजेब के जाल में फँस गए थे। महाराज के शिविर तथा उनके निजी खेमे में कड़ा पहरा था। खुद फौलाद खान ही दिन-रात वहाँ…
View More शिवाजी ‘महाराज’ : कड़े पहरों को लाँघकर महाराज बाहर निकले, शेर मुक्त हो गयाशिवाजी ‘महाराज’ : शिवाजी की दहाड़ से जब औरंगजेब का दरबार दहल गया!
मुगल छावनी अब आराम फरमा सकती थी। खुद मिर्जा राजा भी रात को घड़ी दो घड़ी गंजिफा खेलने में मशगूल हो सकते थे। क्योंकि सन्धि…
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