सम्यक आजीविका : ऐसा कार्य, आय का ऐसा स्रोत जो ‘सद्’ हो, अच्छा हो

कोरोना काल में न जाने कितने लोगों को अपनी आजीविका से विरत होना पड़ा। बहुतों ने इसे नई आजीविका के अवसर के रूप में देखा और नए…

View More सम्यक आजीविका : ऐसा कार्य, आय का ऐसा स्रोत जो ‘सद्’ हो, अच्छा हो

कोई हम पर मिट्टी, कीचड़ फेंके तो हम क्या करें?

किसी ने व्हाट्स एप पर यह कहानी मुझे भेजी। आज के दौर में जब हर कोई एक-दूसरे को गिराने की कोशिश करता है। कीचड़ उछालता…

View More कोई हम पर मिट्टी, कीचड़ फेंके तो हम क्या करें?

खिलाड़ी देश के प्रतिनिधि हैं, किसी जाति, धर्म या प्रदेश के नहीं

सौभाग्य से मुझे भारतीय सेना के साथ काम करने का अवसर प्राप्त हुआ। मैं व्यक्तिगत तौर पर जिन भी सैनिकों से संपर्क में आया, उनसे…

View More खिलाड़ी देश के प्रतिनिधि हैं, किसी जाति, धर्म या प्रदेश के नहीं

सम्यक कर्म : सही क्या, गलत क्या, इसका निर्णय कैसे हो?

मेरे मित्र के बॉस नेत्रहीन हैं। उनका मानना है कि उनके द्वारा किए गए सभी कार्य सही ही हैं। चाहे वे कार्य दूसरों की नज़र में ग़लत या…

View More सम्यक कर्म : सही क्या, गलत क्या, इसका निर्णय कैसे हो?

अपने बच्चों से हमें बाज की परवाज़ सी उम्मीद कब करनी चाहिए?

बड़ी मौज़ूँ है ये कहानी। अभी जब जापान की राजधानी में टोक्यो में ओलम्पिक खेल चल रहे हैं, तब ख़ास तौर पर। बाज या शाहीन, जिसे…

View More अपने बच्चों से हमें बाज की परवाज़ सी उम्मीद कब करनी चाहिए?

सम्यक वचन : वाणी के व्यवहार से हर व्यक्ति के स्तर का पता चलता है

“ऐसी वाणी बोलिए मन का आपा खोए, औरन को शीतल करे आपहुँ शीतल होए।” यह दोहा हम बचपन से सुनते-पढ़ते आ रहे हैं। लेकिन इसे अपनाते-अपनाते…

View More सम्यक वचन : वाणी के व्यवहार से हर व्यक्ति के स्तर का पता चलता है

दो शहर, दो बरस, दो पुस्तक पंक्तियाँ, एक कवि और एक ही तारीख

आज फेसबुक की याद गली से गुज़रा तो यादें मिलीं। उसने कमाल की चीज़ याद दिलाई। दो साल के अंतराल की। एक 2018 और दूसरी 2020 की।…

View More दो शहर, दो बरस, दो पुस्तक पंक्तियाँ, एक कवि और एक ही तारीख

जगन्नाथ की मूर्तियों का सन्देश, अधीरता का हासिल अधूरापन होता है

उस ज़माने में ओडिशा या उत्कल प्रदेश के राजा हुआ करते थे इन्द्रद्युम्न। भगवान नीलमाधव, यानि श्रीहरि, श्रीकृष्ण के भक्त थे। कहते हैं, उन्हें एक रोज…

View More जगन्नाथ की मूर्तियों का सन्देश, अधीरता का हासिल अधूरापन होता है

ओ मानसून के मन, सुन…

प्रिय मानसून,  कहाँ हो तुम? तुम्हें मालूम भी है, कब से यहाँ सब तुम्हारी राह देख रहे हैं? अब और देर मत करो आ जाओ। मैंने अख़बारों…

View More ओ मानसून के मन, सुन…

सम्यक ज्ञान, हम जब समाज का हित सोचते हैं, स्वयं का हित स्वत: होने लगता है

हम अपने जीवन में लोगों के बारे में धारणाएँ अक्सर बाहरी आवरण देखकर बना लेते हैं। रूप, रंग, वस्त्र के आधार पर व्यक्ति की छवि बना…

View More सम्यक ज्ञान, हम जब समाज का हित सोचते हैं, स्वयं का हित स्वत: होने लगता है