“उड़ने के लिए पूछिए मत, पंख तुम्हारे हैं और आसमान किसी एक का नहीं”

टीम डायरी

कांग्रेस के  लोकसभा सदस्य शशि थरूर के इन दिनों पार्टी के साथ मतभेद चल रहे हैं। अलबत्ता, इन मतभेदों और आरोप-प्रत्यारोप के बीच से जीवन में सबके काम आने वाली चीजें भी निकल रही हैं। मसलन- कुछ दिनों पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, “कुछ लोग कहते हैं मोदी (प्रधानमंत्री) पहले, देश बाद में।

टिप्पणी थरूर पर थी, जिसके जवाब में शशि थरूर ने एक्स अकाउंट पर लिखा, “उड़ने के लिए पूछिए मत। पंख तुम्हारे हैं और आसमान किसी एक का नहीं।” उन्होंने यह उत्तर कांग्रेस नेतृत्त्व को सीधी चुनौती के रूप में दिया। हालाँकि, यह बात है तो सभी के काम की। हम में से किसी को भी अपने सपनों की उड़ान भरने, लक्ष्यों तक पहुँचने की कोशिश करने के लिए किसी से इजाजत लेने या उससे आस लगाने की जरूरत है क्या? ईश्वर ने हम सबको कुछ विशिष्ट क्षमताओं, कुशलताओं से नवाजा है। उनके बलबूते हम भी आसमान छू सकते हैं न? और आसमान तो सबके लिए खुला होता है। हाथ फैला कर सबको गले लगता है। वह किसी की बपौती थोड़े ही है?  

मामले में शशि थरूर की ओर से अप्रथ्यक्ष तौर पर आई चुनौती का कांग्रेस नेतृत्त्व ने तो कोई जवाब नहीं दिया। लेकिन तमिलनाडु के विरुधनगर से कांग्रेस के लोकसभा सदस्य मणिकम टैगोर ने थरूर को उन्हीं के अन्दाज में जवाब जरूर दिया। सो, उनका लिखा हुआ भी जीवन के एक सबक की तरह सामने आया।

टैगोर ने लिखा, “उड़ने के लिए पूछिए मत। पक्षियों को ऊँचाई पर जाने के लिए किसी की हरी झंडी की जरूरत भी नहीं है। लेकिन आजकल आजाद परिन्दे भी आसमान में जरा देख-समझकर उड़ते हैं। क्योंकि बाज, गिद्ध, जैसे शिकारी पक्षी भी वहाँ हमेशा शिकार की ताक में मौजूद रहते हैं। आजादी निशुल्क नहीं होती।

तो कहिए, है न दोनों की बातें ‘रोचक-सोचक’ और बड़े काम की भी?

 

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Neelesh Dwivedi

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