बेटी के नाम चौथी पाती : तुम्हारा होना जीवन की सबसे ख़ूबसूरत रंगत है

दीपक गौतम, सतना, मध्य प्रदेश से, 18/4/2022

प्रिय मुनिया,

मेरी जान, तुम्हारे जन्मोत्सव के बाद मुझे तुम्हें यह चौथा पत्र लिखने में तनिक विलम्ब हो गया है। मैं तुम्हें यह पत्र तुम्हारे ठीक जाने वाले रोज बीते इतवार को ही लिखना चाह रहा था। जब तुम्हारी पहली यात्रा जो अपने ननिहाल अहमदाबाद (नाना-नानी) के घर जाने के लिए हुई थी, उसकी शुरुआत हुई थी। तुमने लगभग डेढ़ माह की उम्र में यह पहली रेलयात्रा की। तुम्हें या जानकर खुशी होगी कि तुम्हारे अपने ननिहाल अहमदाबाद पहुँचने से पहले आज होली तक तुम अपनी माँ के ननिहाल लखनऊ में हो। कल 19 मार्च 2022 को तुम अहमदाबाद के लिए लखनऊ से कूच करोगी। तुम्हारे बिन गुजरा ये पिछला हफ्ता बड़ा सूना सा बीत गया है। जैसे, तुम अपने संग जीवन का सारा रंग ले गई हो। ये तुम्हारा प्रेम ही है कि मैं फिर भी तुम्हें और तुम्हारे स्पर्श को अपने आस-पास सदा महसूस करता हूँ।

प्रिय मुनिया,

मेरी लाडो, मैंने तुम्हें पिछले पत्र में लिखा था कि देश के पाँच राज्यों में चल रहे विधानसभा चुनावों का अन्तिम चरण है। अब तो चुनाव परिणाम भी आ गए हैं। चार राज्यों में जनमत इस बार केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा के साथ दिखाई दिया है। इस सफलता का श्रेय लोकप्रिय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को दिया जा रहा है। पंजाब में तो अन्ना आन्दोलन से निकली आम आदमी पार्टी यानि आप ने जीत हासिल कर सरकार भी बना ली है। चुनावों में चौतरफा सशक्त विपक्ष न होने से इस बार विधानसभा चुनावों में देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस को मुँह की खानी पड़ी है। मुझे पता है कि देश-दुनिया के हाल तुम्हें इन पत्रों में कम ही पसन्द आएँगे, लेकिन इस वक्त घट रहा एक-एक घटनाक्रम तारीख़ों में दर्ज़ होने वाला है। इसलिए इस परिदृश्य की एक झलक को पत्र के एक टुकड़े में उकेरने की कोशिश की है। यूँ भी प्रेम में कोई राजनीति नहीं चलती। इसलिए मुझे राजनीति उतनी ही पसन्द है, जितने में प्रेम बना रह सके। अपनी तो असल फसल यही है। इसलिए सिर्फ़ प्रेम पर ध्यान केन्द्रित रखना चाहिए। आज दुनिया को सबसे ज़्यादा प्रेम की ज़रूरत है। कम से कम दुनिया के एक हिस्से में चल रहे युद्ध को देखकर तो यही लगता है। रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध को चलते हुए लगभग 25 रोज बीत गए हैं। कहीं न कहीं ग्राम दो ग्राम प्रेम का पराग छटक गया होता तो नफ़रत से पनपी जंग खत्म हो जाती। अबकी होली पर दुनिया को प्रेम के रंग में सराबोर रखने और दिलों को रंगों से जोड़ने वाले इस त्यौहार पर प्रेम के एक रंग का ही सन्देश दिया जाना चाहिए।

प्रिय मुनिया,

बेटी यज्ञा, तुम्हारे नामकरण के बाद भी तुम्हें सब लोग ‘निवेदिता’ या ‘यज्ञा’ नहीं अपनी-अपनी पसंद के लाड़ के नामों से पुकारते हैं। जब तुम बड़ी होकर ये पत्र पढ़ोगी, तो तुम्हें ये जानकर बहुत रोमांच महसूस होगा कि तुम्हारे एक नहीं अनेक नाम हो गए हैं। किसी के लिए तुम लाडो हो, तो कोई तुम्हें बिट्टो या बिट्टी कह रहा है। किसी ने गुड्डो या गुड़िया कहना तय कर लिया है, तो कोई बिटिया रानी, लड्डू, गिट्टी या गिल्लू कहकर दुलारता-पुचकारता रहता है। तुम्हें ये लिखते हुए हर्ष हो रहा है कि तुम्हारे आने से जीवन में रंग ही रंग है। अबकी होली तुम्हें आरव और शौर्य दादा ने यहां गाँव पर बहुत याद किया। हम सभी में सबसे ज्यादा तुम्हें दादा-दादी ने बहुत याद किया। और यह जानकर वो भी खुश हुए कि तुम अपने मामा के यहाँ पर हो।

प्रिय मुनिया,

मेरी बेटी, आज देश भर में होली पर प्यार के रंग से सराबोर तस्वीरें सोशल मीडिया पर तैरती रही हैं। देश में होली या दूसरे त्यौहार अब सोशल मीडिया पर सबसे ज़्यादा सेलिब्रेट होते हैं। इसलिए मैं होली पर तुम्हें पत्र लिखकर इस होली को एक तारीख़ी होली बना देना चाहता हूँ। तुम्हारे जन्म के बाद की इस पहली होली में तुम्हारा न होना इतना नहीं खला है, क्योंकि तुम्हारे जीवन में आ जाने की खुशी ने इसका असर नहीं पड़ने दिया है। तुम हो तो इस रंगोत्सव में रंग ही रंग भर गए हैं। तुम्हारा होना जीवन के कैनवास पर ईश्वर की सबसे खूबसूरत रंगत है। तुम ही तो जीवन का असल रंग हो। तुम्हें होली की ढेरों बधाई और शुभकामनाएं। लव यू मुनिया 💝

तुम्हारा पिता……..18/2/2022 
दीपक गौतम
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(दीपक, स्वतंत्र पत्रकार हैं। मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र में लगभग डेढ़ दशक तक राजस्थान पत्रिका, दैनिक भास्कर, राज एक्सप्रेस तथा लोकमत जैसे संस्थानों में मुख्यधारा की पत्रकारिता कर चुके हैं। इन दिनों अपने गाँव से ही स्वतंत्र लेखन कर रहे हैं। इन्होंने बेटी के लिए लिखा यह बेहद भावनात्मक पत्र के ई-मेल पर #अपनीडिजिटलडायरी तक भेजा है। यह 4 हिस्सों में है। यह उनमें से चौथा है।) 
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अपनी बेटी के नाम दीपक पिछली चिटि्ठयाँ 

3.  एक पिता की बेटी के नाम तीसरी पाती : तुम्हारा रोना हमारी आँखों से छलकेगा  
2. एक पिता की बेटी के नाम दूसरी पाती….मैं तुम्हें प्रेम की मिल्कियत सौंप जाऊँगा 
1. प्रिय मुनिया, मेरी लाडो, आगे समाचार यह है कि…

 

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