टीम डायरी
राष्ट्रगीत वन्देमातरम् अब आधा नहीं गाया जाएगा। हर सरकारी समारोह में इसे पूरा गाना होगा। यानी इसके छह में से छहों अंतरे गाए जाएँगे। इन्हें गाए जाने की कुल समयावधि 3 मिनट 10 सेकेण्ड निर्धारित है। इस दौरान कार्यक्रमों में मौजूद सभी लोगों को खड़े भी होना होगा। केन्द्र सरकार ने इस सम्बन्ध में आदेश जारी कर दिया है। यह तत्काल प्रभाव से लागू भी हो गया है।
बता दें कि हिन्दुस्तान की आजादी के बाद जब वन्देमातरम् को राष्ट्रगीत के रूप में स्वीकार किया गया, तब मुस्लिम समुदाय के ऐतिराज को ध्यान में रखकर इसके शुरुआती दो छन्द ही गाए जाने का प्रावधान हुआ था। यद्यपि पिछले साल इस गीत के 150 साल पूरे होने पर संसद में जैसी चर्चा हुई, उससे स्पष्ट था कि सरकार देर-सबेर इसका पूरा गान अनिवार्य कर सकती है, जो अब कर दिया गया है।
वन्देमातरम् का पूर्ण पाठ नीचे दिया गया है, पढ़ा जा सकता है।
केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने छह फरवरी को इस सम्बन्ध में आदेश जारी किया है। इसके अनुसार, बंकिम चन्द्र चटर्जी द्वारा लिखित राष्ट्रगीत वन्देमातरम् को राष्ट्रीय ध्वज फहराए जाने के सभी अवसरों पर निर्धारित अवधि के भीतर गाया- बजाया जाएगा। इसके अलावा केन्द्र और राज्य सरकारों के सभी सम्मान समारोहों दौरान, राष्ट्रपति एवं राज्यपालों की मौजूदगी वाले कार्यक्रमों और आकाशवाणी-दूरदर्शन आदि पर महामहिम के भाषणों से पहले तथा बाद में वन्देमातरम् को गाना-बजाना अनिवार्य किया गया है।
इसके अलावा भी वन्देमातरम् को गाए-बजाने के सम्बन्ध में नियम-कायदे तय किए गए हैं। यद्यपि फिल्मों, धारावाहिकों, आदि में अगर वन्देमातरम् का संक्षिप्त संस्करण गाया-बजाया जाता है, तो उस दौरान जनसामान्य के लिए खड़े होना अनिवार्य नहीं होगा। ऐसी कुछ छूट भी है। और हाँ, राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ से सम्बन्धित नियम-कायदे पहले की तरह जस के तस हैं। उनमें किसी तरह का कोई बदलाव नहीं किया गया है। राष्ट्रगीत का गायन-वादन उसके साथ अतिरिक्त प्रावधान है।
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