प्रतीकात्मक तस्वीर
ज़ीनत ज़ैदी, शाहदरा दिल्ली से
ज़िन्दगी वो अज़ीम तोहफा है, जो इस दुनिया को ख़ल्क़ (सृष्टि करना) करने वाले ने हम सबको दिया है। हम ज़िन्दगी को जन्म से मौत तक के वक्त में परिभाषित नहीं कर सकते। क्योंकि ज़िन्दगी एक एहसास है, मेहनत है, लगन है। आसान और मुश्किल क्यूँ? ये वक़्त है। और सबसे ज़रूरी यह हमारे अपनों का साथ है।
इंसान एक अच्छी ज़िन्दगी पाने के लिए क्या कुछ नहीं करता। बचपन से बुढ़ापे तक लगा रहता है, अपनी ज़िन्दगी को और बेहतर बनाने में। जो ऐसा करने में क़ामयाब होते हैं, उन्हें अक्सर हम ख़ुशक़िस्मत कहते हैं। लेकिन क्या ख़ुशक़िस्मती और बदक़िस्मती जैसी कोई चीज होती भी है? या हमने इसे सिर्फ़ मन बहलाने और अपनी नाक़ामयाबी को छुपाने का एक जरिया बना लिया है।
उदाहरण लेकर देखते हैं कि कोई आदमी अपने बच्चों को परेशानियों में डाल सकता है या नहीं? इसमें हम सबका ज़वाब यही होगा कि कोई भी व्यक्ति जानबूझकर अपने बच्चों को किसी परेशानी में नहीं डाल सकता। तो तसव्वुर करें कि जिस ख़ुदा ने हमें और इस दुनिया को इतने प्यार और मेहनत से बनाया है, वह अपनी बनाई हुई मखलूक (रचना), यानी हम सबको परेशानी में कैसे डाल सकता है?
दरअस्ल, ऊपर वाले ने अच्छी क़िस्मत और बुरी क़िस्मत जैसा कुछ बनाया ही नहीं। वह तो हम ही हैं कि जब हमें कुछ अच्छा लगता है और हम उसे पाने मे क़ामयाब हो जाते हैं, तो उसे ख़ुशक़िस्मती करार देते हैं। और जब हमारा मंसूबा पूरा नहीं होता, तो हम ही उसे बदक़िस्मती का नाम दे देते हैं। जबकि सच्चाई ये है कि हमारी क़िस्मत सिर्फ़ अच्छी ही होती है। क्योंकि जैसा बड़े-बुज़ुर्ग कह गए हैं न, जो होता है अच्छे के लिए होता है।
अपनी ख़्वाहिशों के पूरा हो जाने को हम अच्छा समझ लेते हैं, जबकि हमें यह तक नहीं मालूम होता कि इसका अंज़ाम क्या होगा। अलबत्ता वह, जिसने हमें बनाया है, उसे अच्छी तरह पता है कि हमारे लिए क्या अच्छा है और क्या बुरा। सो, भरोसा रखिए, वह क़िस्मत लिख सकता है, तो वही उसे बदल भी सकता है।
फिर भी अगर हम अपनी क़ाबिलियत का अंदाज़ा लगाना चाहते हैं, उसके लिए बस एक छोटा सा काम करना होगा। वह है ऐसी ज़बर्दस्त मेहनत जो हमें उस मक़ाम तक पहुँचाएगी जो हमें चाहिए था। या जिसे हम ख़ुशक़िस्मती की अलामत (पहचान) समझते होंगे। क्योंकि अगर मेहनत सच्चे दिल से की गई, तो वह क़िस्मत लिखने वाला भी हमारी क़िस्मत बदलने को मज़बूर हो जाएगा।
जय हिन्द
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(ज़ीनत #अपनीडिजिटलडायरी के सजग पाठक और नियमित लेखकों में से एक हैं। दिल्ली के आरपीवीवी, सूरजमलविहार स्कूल में 11वीं कक्षा में पढ़ती हैं। लेकिन इतनी कम उम्र में भी अपने लेखों के जरिए गम्भीर मसले उठाती हैं। उन्होंने यह आर्टिकल सीधे #अपनीडिजिटलडायरी के ‘अपनी डायरी लिखिए’ सेक्शन पर पोस्ट किया है।)
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