‘मायावी अम्बा और शैतान’: डर गुस्से की तरह नहीं होता, यह अलग-अलग चरणों में आता है!

ऋचा लखेड़ा, वरिष्ठ लेखक, दिल्ली

डर गुस्से की तरह नहीं होता। यह अलग-अलग चरणों में आता है, जिन्हें गिना नहीं जा सकता। डर को सन्दूक में बन्द नहीं कर सकते। उसे हिस्सों में नही बाँट सकते। भयभीत व्यक्ति से विवेकवान होने की उम्मीद नहीं की जा सकती। इस वक्त अंबा को लग रहा था, जैसे उसके जैसे लोगों के लिए दुनियाभर में डर ही डर भरा हुआ है। नाथन के शब्द उसके कानों में जहर की तरह घुल गए थे। उसे अपना खून धीरे-धीरे जमता हुआ महसूस हुआ। उसकी कल्पनाओं में भयानक संभावनाएँ जन्म लेने लगीं। उनके बारे में सोचकर उसका जी मिचलाने लगा। गुस्सा उसे पागल कर रहा था। डर दिमाग पर हावी हो गया। उसे भय था कि कुछ बहुत बुरा होने वाला है, जिसे वह शायद रोक नहीं पाएगी। मैडबुल की आँखों में वह दरिंदगी की हद देख चुकी थी।

“जिस पहरेदार ने मेरी मदद की, उसका कहना था कि उसने पेट्रोल, डीजल के बहुत सारे डिब्बे, विस्फोटक और हथियारों को ट्रकों पर लादे जाते हुए देखा है। इससे आशंका होती है कि मैडबुल अपने काले कारनामों के सभी सबूत मिटाने की साजिश कर रहा है। इसके लिए वह किसी ऐसी दुर्घटना का नाटक रच रहा है, जिसका सारा दोष ग्रामीणों पर डाला जा सके।”

नाथन ने उसे चेताया कि मैडबुल संभवत: ग्रामीणों का सामूहिक नरसंहार कर सकता है। इस बाबत उसके आदमी तैयारी कर रहे हैं।

“ये लोग अपराधी हैं अंबा। बेईमान और निर्दयी लोग हैं, जिनमें कोई नैतिकता नहीं है। उसने जिन लोगों को चुना है, वे रेजीमेंट के लोग नहीं हैं। वे रैड-हाउंड्स हैं, बेहद जंगली और बर्बर। भयंकर दरिंदगी करने की उनकी आदत के कारण ही उन्हें इस टीम में चुना गया है।”

इसके बाद आगे की यात्रा में उन सभी के बीच ज्यादा बातचीत नहीं हुई। नकुल अब तक अलग-थलग बैठा था। उससे कोई भी बात करना कठिन था। वह चुप था, नाराज और दुखी भी। इस तरह, सभी के लिए अब एकाकी यात्रा थी, क्योंकि कोई किसी से बात नहीं कर रहा था। सबके दिल दुख से भरे थे। यह यात्रा कठिन और उदास थी। अनहोनी की आशंकाओं से भरी हुई थी। नकुल तो जैसे पूरी तरह टूटा और बिखरा हुआ था। लेकिन अंबा को उम्मीद थी कि समय के साथ-साथ सब ठीक हो जाएगा। भाई-बहन का प्यार जीतेगा आखिर में।

इसी बीच, एक जगह गाड़ी के चक्के जाम हो गए। इससे पहले किसी को अंदाजा भी नहीं था कि यह कोई गंभीर मामला है। बादल फटने से हुई तेज बारिश के कारण सड़क पर काफी पानी बह रहा था। इधर-उधर से उखड़कर आए पेड़ पानी में बह रहे थे। वे रास्ते की रुकावट बन रहे थे। फिर भी नाथन ने गाड़ी का गियर नीचे करके उसे आगे ले जाने की कोशिश की। लेकिन वह कुछ कदम आगे खिसकर एक गड्‌ढे में फँस गई। नाथन ने एक्सेलरेटर जोर से दबाया, मगर यह उसकी गलती साबित हुई। गाड़ी थोड़ी तो आगे खिसकी लेकिन फिर लगातार गड्‌ढे में धँसने लगी।

गाड़ी का इंजन भी बंद हो गया और फिर चालू नहीं हुआ। गाड़ी लगभग 10 फीट धँस गई थी। पानी का तेज बहाव लगातार उसे खतरनाक तरीके से विपरीत दिशा में धकेल रहा था। आगे तीखी ढलान थी। सभी यात्रियों की साँसें अटकें हुईं थीं कि तभी पानी के तेज दबाव के कारण गाड़ी जोर के झटके के साथ गड्‌ढे से बाहर निकलकर एक अन्य अवरोधक से भिड़ गई। इससे अंबा का सिर गाड़ी के दरवाजे से बहुत जोर से कई बार टकराया। झटका बहुत तगड़ा था। अंबा ने इस स्थिति से बचने की कोशिश की कि तभी दरवाजा खुल गया। दूसरे यात्रियों में से किसी का उसे धक्का लगा और वह बाहर लुढ़क गई। कीचड़ भरे दलदल की ओर खिसकने लगी लेकिन नकुल ने फुर्ती से उसका हाथ थाम लिया। उसे भीतर की तरफ खींचा और मजबूती से गाड़ी का दरवाजा बंद कर दिया।

गाड़ी के भीतर सभी यात्री निस्तब्ध से शान्त बैठे हुए थे। आसमान जंग खाए हुए लोहे की तरह नजर आ रहा था और पेड़ स्याही के जैसे धुँधले दिख रहे थे। तेज हवाओं के साथ तूफान ने दस्तक दे दी थी। अंबा गाड़ी में पीठ के बल लेटी थी। किसी को कुछ सूझ नहीं रहा था। उसी समय अचानक घाटी में तेज रोशनी के साथ धमाकों की आवाजें सुनाई देने लगीं। उन सभी को इसकी आशंका तो थी लेकिन फिर भी वे इस वक्त हैरान थे। गोलाबारी लगातार बढ़ती जा रही थी। हमलावरों की बन्दूकें आग उगल रहीं थीं। गाड़ी में जितने लोग थे, सब जान बचाने के लिए नीचे झुक गए।

हमलावरों का पहला बड़ा धमाका ही इतना भयानक था कि उनके दिल दहल गए। वे अभी कुछ समझ पाते या कर पाते कि उससे पहले ही उनकी गाड़ी गोलाबारी के निशाने पर आ गई। उसके लोहे के बाहरी ढाँचे में आग लग गई। हालाँकि गाड़ी का ईधन टैंक अभी सुरक्षित था। तभी उनके पीछे एक और रॉकेट फटा। उसी की रोशनी में उन्होंने देखा कि उनसे करीब 50 मीटर की दूरी पर एक घर मलबे के ढेर में तब्दील हो गया है। अब तक गाड़ी के टायरों ने भी आग पकड़ ली थी। तभी उसके ठीक सामने एक और विस्फोट हुआ। इससे गाड़ी लगभग पलट गई। अंबा पीछे गिर गई और नाथन उसके ऊपर जा गिरा। तेज झटके के कारण दरवाजे बाहर की ओर खुल गए। दरवाजे भी आग की लपटों से घिरे हुए थे। धमाका इतना तेज था कि नकुल और रोध तो पीछे की सीट पर जा गिरे। अंबा को उस वक्त बस, वही आखिरी दृश्य दिखाई दिया। इसके बाद आग की तेज रोशनी में उसे कुछ और नहीं नजर आया।

खुद को सँभालने की कोशिश में अंबा थोड़ा पीछे हुई। तभी रॉकेट की चिरपरिचित आवाज के साथ लगातार कुछ और धमाके हुए। गोलियाँ सनसनाते हुए सिर के ऊपर से गुजरीं। उनकी आवाजों से कान सुन्न हो गए। तब अंबा को कुछ सूझा नहीं तो उसने नाथन की बंदूक ली और हमलावरों पर गोली चला दी। लेकिन उसके जवाब में उसके कानों के पास से इतनी गोलियाँ गुजरीं कि वह गिनती तक भूल गई। हमलावरों की आक्रामकता देख उसका दिल बेतहाशा धड़कने लगा। इसी बीच, गाड़ी अनियंत्रित होकर बेतहाशा हिचकोले खाती, कूदती-फाँदती आगे की ओर लुढ़क गई। उसके पुर्जे-पुर्जे आवाज करने लगे। उसका बोनट कभी जमीन पर टकराता तो कभी आसमान की तरफ हो जाता। चक्कर खाती, गिरती-पड़ती वह गाड़ी ऐसी जगह पर आकर ठहरी, जहाँ भयानक अँधेरा था। वहाँ देखते-देखते वह दो हिस्सों में टूटकर ढेर हो गई।

उसी समय हमलावरों की एक गोली ठीक निशाने पर लगी और गाड़ी का ईंधन टैंक धमाके के साथ उड़ गया। आग के शोलों से दूर तक रोशनी फैल गई। अंबा ने जब आग से नजरें हटाकर देखा तो पाया कि गाड़ी चलाने वाले का सिर कटकर दूर जा गिरा है। महज चार-पाँच सेकेंड में इतना सब हो गया था। अंबा इस वक्त गाड़ी के सुलगते हुए मलबे के ढेर के पास कहीं थी। नाथन खाँसता हुआ जमीन पर औंधा पड़ा हुआ था। उसका गला जाम हो गया था। तभी किसी ने अंबा के हाथ को जोर से दबाया तो उसे एहसास हुआ कि वह अभी जिंदा है।

#MayaviAmbaAurShaitan 

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(नोट :  यह श्रृंखला एनडीटीवी की पत्रकार और लेखक ऋचा लखेड़ा की ‘प्रभात प्रकाशन’ से प्रकाशित पुस्तक ‘मायावी अंबा और शैतान’ पर आधारित है। इस पुस्तक में ऋचा ने हिन्दुस्तान के कई अन्दरूनी इलाक़ों में आज भी व्याप्त कुरीति ‘डायन’ प्रथा को प्रभावी तरीक़े से उकेरा है। ऐसे सामाजिक मसलों से #अपनीडिजिटलडायरी का सरोकार है। इसीलिए प्रकाशक से पूर्व अनुमति लेकर #‘डायरी’ पर यह श्रृंखला चलाई जा रही है। पुस्तक पर पूरा कॉपीराइट लेखक और प्रकाशक का है। इसे किसी भी रूप में इस्तेमाल करना कानूनी कार्यवाही को बुलावा दे सकता है।) 

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पुस्तक की पिछली 10 कड़ियाँ

70 – ‘मायावी अम्बा और शैतान’: आखिरी अंजाम तक, क्या मतलब है तुम्हारा?
69 – ‘मायावी अम्बा और शैतान’: जंगल में महज किसी की मौत से कहानी खत्म नहीं होती!
68 – ‘मायावी अम्बा और शैतान’: मैं उसे ऐसे छोड़कर नहीं जा सकता, वह मुझसे प्यार करता था!
67 – ‘मायावी अम्बा और शैतान’ : उस वासना को तुम प्यार कहते हो? मुझे भी जानवर बना दिया तुमने!
66 – ‘मायावी अम्बा और शैतान’ : उस घिनौने रहस्य से परदा हटते ही उसकी आँखें फटी रह गईं
65 – ‘मायावी अम्बा और शैतान’ : नकुल में बदलाव तब से आया, जब माँ के साथ दुष्कर्म हुआ
64 – ‘मायावी अम्बा और शैतान’ : वह रो रहा था क्योंकि उसे पता था कि वह पाप कर रहा है!
63 – ‘मायावी अम्बा और शैतान’ : पछतावा…, हमारे बच्चे में इसका अंश भी नहीं होना चाहिए
62 – ‘मायावी अम्बा और शैतान’ : वह बहुत ताकतवर है… क्या ताकतवर है?… पछतावा!
61 – ‘मायावी अम्बा और शैतान’ : रैड-हाउंड्स खून के प्यासे दरिंदे हैं!

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