माइक्रोसॉफ्ट संकट में रूस-चीन ने दिखाया- पाबन्दी आत्मनिर्भरता की ओर ले जाती है

निकेश जैन, इन्दौर, मध्य प्रदेश

अभी 20 जुलाई को दुनिया जब ‘माइक्रोसॉफ्ट-संकट’ से जूझ रही थी तो चीन और रूस में जीवन सामान्य था। 

पाबन्दियों के अपने लाभ भी होते हैं। 

वे हमें आत्मनिर्भरता की ओर ले जाती हैं। 

जिस ‘क्राउडस्ट्राइक’ (साइबर सुरक्षा देने वाली अमेरिकी कम्पनी, जो माइक्रोसॉफ्ट को भी सेवाएँ देती है) के सॉफ्टवेयर में अपडेट्स की वजह से ‘माइक्रोसॉफ्ट-संकट’ पैदा हुआ, चीन उसका इस्तेमाल ही नहीं करता। उसके अपने कारण हैं। उनमें विकसित देशों की पाबन्दियों से जुड़ा भी एक कारण हो सकता है। 

वहीं रूस के ख़िलाफ़ तो बीते दो साल से दुनिया के कई देशों ने पाबन्दियाँ लगा ही रखी हैं। इसके बाद से वह भी अपने स्वदेशी सॉफ्टवेयर, आदि उपयोग कर रहा है। बस, इन दोनों देशों की इसी विशिष्टता के कारण इन्हें ‘माइक्रोसॉफ्ट-संकट’ छू भी नहीं पाया।

हालाँकि यह संकट और इससे चीन-रूस के बचे रहने का वाक़िआ दुनिया के अन्य देशों के लिए सबक ज़रूर दे गया। सबक यह कि इस तरह के किसी भी सम्भावित संकट से अपनी अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए उन्हें भी आत्मनिर्भरिता की राह पकड़नी होगी। डिजिटल परिचालन के लिए अपने तकनीकी समाधान अपनाने होंगे।

ग़ौर करें है कि ऐसी अनिवार्यता वाले देशों में भारत भी शामिल है। इसीलिए उम्मीद करते हैं कि ‘माइक्रोसॉफ्ट-संकट’ से अपने देश में कोई तो सचेत हो। और तकनीकी समाधानों में आत्मनिर्भरता की तरफ पहल करे। 

ऐसा मेरा विचार है! 

—–

निकेश का मूल लेख

In China and Russia life was as usual on 20th July when most of the world was struggling with Microsoft Outage….

The sanctions have its advantages too.

They make you self reliant!

China was not using CrowdStrike anyways for obvious reasons but Russia was till 2 years ago. But due to sanctions Russia started using local software and that saved them.

There is a learning here for all the countries that are growing.

They need to protect their economy against such outages and they need to build resilience in their digital operations.

India is one of those countries 🙏

Hope someone up there is paying attention.

Thoughts? 

——- 

(निकेश जैन, शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाली कंपनी- एड्यूरिगो टेक्नोलॉजी के सह-संस्थापक हैं। उनकी अनुमति से उनका यह लेख अपेक्षित संशोधनों और भाषायी बदलावों के साथ #अपनीडिजिटलडायरी पर लिया गया है। मूल रूप से अंग्रेजी में उन्होंने इसे लिंक्डइन पर लिखा है।)

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