टीम डायरी
“आज मैं बोरीवली में अपनी ट्रेन का इंतजार कर रहा था। प्लेटफॉर्म लगभग पूरी तरह खाली था। हर तरफ चुप्पी-सी छाई हुई थी। थोड़ी देर पहले ही मेरी ट्रेन छूट गई थी और उस वक्त में अगली ट्रेन की राह देख रहा था, जो लगभग एक घण्टे बाद आने वाली थी। इसलिए मैं प्लेटफॉर्म से यहाँ-वहाँ गुजरने वाले कुछ यात्रियों को यूँ ही बैठा-बैठा देख रहा था। इसी दौरान मेरी नजर मेरे बाईं ओर गई। वहाँ एक और व्यक्ति बैठा हुआ था, मेरी ही तरह। बिल्कुल चुपचाप सा। शायद उसकी भी ट्रेन छूट गई थी और वह अगली ट्रेन के इंतजार में था। या हो सकता है, कोई और कारण हो, जो इससे ज्यादा बड़ा हो, मालूम नहीं। अलबत्ता, मैंने गौर किया कि उसका सिर झुका हुआ था। आँखें डबडबाई हुई थीँ। वह रो रहा था… लेकिन साथ ही साथ अपने आँसू छिपाने की कोशिश भी कर रहा था कि कहीं कोई देख न ले। वह चुप्पी ओढ़कर रोने की कोशिश कर रहा था।
अपना गम आँसुओं में बहा देने का यह ऐसा तरीका है, जो किसी से हमदर्दी की अपेक्षा नहीं करता। बस, बह जाना चाहता है, निकल जाना चाहता है। उसे इस हाल में देखकर मैं कुछ पल के लिए अपने आप को भूल गया। मैं उठकर उसके पास चला गया। बगल में बैठा और धीरे से उससे पूछा- तुम ठीक तो हो न? पर उसने कुछ ज्यादा कहा नहीं। बस, इतना ही कि याद आ गया कुछ, हाल पूछने के लिए शुक्रिया। और फिर उसने चुप्पी ओढ़ ली। सूनी आँखों से वह सामने खाली पड़ी रेल पटरियों को देखने लगा। शायद वह ऐसी ट्रेन के इंतजार में था, जो कभी नहीं आने वाली थी। या हो सकता है कि उसने किसी को खो दिया हो। या कुछ और भी मुमकिन है, कह नहीं सकता। कुछ देर बाद मैं अपनी जगह पर वापस आ गया।
दीन-दुनिया अपनी मंथर गति से चल रही थी। बत्तियाँ जल चुकी थीं। और मैं सोच रहा था- पुरुष भी रोते हैं, लेकिन चुप्पी ओढ़कर। इसलिए नहीं कि वे कमजोर होते हैं बल्कि शायद इसलिए कि उन्हें लगता है- तकलीफ की भाषा को खामोशी बेहतर समझती है। दर्द भी खामोशी की भाषा को उतने ही अच्छे से समझता है शायद। इसीलिए तो पुरुष अक्सर ऐसी चुप्पी ओढ़ लेते हैं।
यह सोचते-सोचते मैं बैठा-बैठा ऊपर वाले से दुआ भी कर रहा था- हे ईश्वर, इस व्यक्ति को जो खुशी चाहिए, वह इसे दे दीजिए न…!
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(मुम्बई से तिलक दुबे नाम के युवक ने अपना यह अनुभव सोशल मीडिया पर साझा किया है। इसके बाद यह मीडिया की सुर्खियों में भी रहा है। चूँकि यह एक आम व्यक्ति की मनोदशा, उसकी पीड़ा, उसके संघर्ष को दर्शाता है, और ऐसे विषय #अपनीडिजिटलडायरी के सरोकारों में शुमार हैं। इसीलिए यह पोस्ट #डायरी पर दर्ज की गई है।)
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