प्रतीकात्मक तस्वीर
खुशी अरोड़ा, दिल्ली
वर्षा की ऋतु निकल चुकी है। लेकिन बारिश इन दिनों कभी भी हो जाया करती है। आज भी हो रही है। उसे देखकर मन में ख़्याल आता है कि ये बारिश भी क्या चीज है। हर इंसान में, यहाँ तक कि पेड़-पौधों, जीव-जन्तुओं में भी उमंग भर देती है। हम बचपन से पढ़ाई-लिखाई के दौरान सीखते रहे हैं कि वर्षा हमारे लिए कितनी महत्त्वपूर्ण है। इसके क्या-क्या फायदे हैं। तो इसीलिए आज लगा कि इस हल्की बारिश के बीच थोड़ी चर्चा इसी विषय की कर लूँ।
हम जानते हैं पृथ्वी पर पानी का सबसे बड़ा स्रोत बारिश ही है। यह हमारे जीवन के लिए भी बहुत ज़्यादा महत्त्वपूर्ण है। क्योंकि वर्षा हमारी फसलों के लिए बहुत जरूरी है। इसी के पानी का उपयोग कर हम बिजली बनाते हैं। ‘रेन वॉटर हार्वेस्टिंग’ जैसे तरीकों से धरती के नीचे के जलस्तर को बेहतर करते हैं। ताकि फसलों को साल भर अच्छा पानी मिलता रहे। वे हरी-भरी रहें। धरती का तापमान कम रहे। वातावरण थोड़ा ठंडा रहे।
सब यह भी जानते हैं कि वर्षा के दौरान वातावरण में प्रदूषण कम हो जाता है। तालाब, कुएँ, नदियाँ आदि फिर से भर जाते हैं। पेड़-पौधों में जीवन का संचार हो जाता है। मिट्टी सौंधी ख़ुशबू से महकने लगती है। मतलब प्रकृति का रोम-रोम जीवन्त हो उठता है। तो फिर सवाल उठता है कि हम ही प्रकृति के इस तारतम्य को बिगाड़ क्याें रहे हैं? पर्यावरण में, वातावरण में, इतना असन्तुलन क्यों पैदा कर रहे हैं कि बारिश कभी भी, किसी भी मौसम में आ धमके? बात सोचने की है, समझने की है, और हो सके तो इन प्रश्नों का उत्तर तलाशने की भी है।
धन्यवाद, मेरे इन विचारों को पढ़ने के लिए।
आपका दिन मंगलमय हो।
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(खुशी दिल्ली के आरपीवीवी सूरजमल विहार स्कूल में 11वीं कक्षा में पढ़ती हैं। उन्होंने ‘अपनीडायरीलिखिए’ सेक्शन में लिखकर यह पोस्ट #अपनीडिजिटलडायरी तक पहुँचाई है। वह डायरी की पाठकों में से एक हैं।)
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