तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने इनाम की घोषणा की है।
टीम डायरी
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने अभी हाल ही में एक अनोखी घोषणा की है। उन्होंने कहा है कि जो भी व्यक्ति या विशेषज्ञ सिन्धु घाटी सभ्यता की लिपि को पढ़ लेगा, उसे उनकी सरकार 10 लाख अमेरिकी डॉलर का इनाम देगी। चूँकि अभी एक अमेरिकी डॉलर की कीमत 85.90 रुपए के आस-पास है। इस हिसाब भारतीय मुद्रा में इनाम की रकम 8.59 करोड़ रुपए होती है। ज़ाहिर है, राजनैतिक स्तर पर इतना बड़ा इनाम घोषित होने के बाद देश में हलचल है। सो, इसके बाद सवाल भी उठने लगे हैं कि स्टालिन ने सच में, भाषा-संस्कृति, इतिहास-पुरातत्त्व जैेसे विषय के हित के लिए यह इनाम घोषित किया है़? या उनका कोई और मक़सद है, जिसे वे साधना चाहते हैं?
इन सवालों का ज़वाब जानने से पहले संक्षेप में पीछे का इतिहास समझ लेते हैं। इसमें यह जानना-समझना सबसे पहले ज़रूरी है कि सिन्धु घाटी सभ्यता की लिपि को समझने की कोशिशें क़रीब 100 साल से जारी हैं। तब से ही, जब से सिन्धु घाटी सभ्यता के पुरातात्त्विक अवशेष ‘प्राचीन भारत की घरती’ (आज के भारत से लेकर पाकिस्तान-अफ़ग़ानिस्तान तक) ने उगलने शुरू किए। इन पुरातात्त्विक अवशेषों में से कई में कुछ ख़ास तरह के निशान बने हुए हैं। इन निशानों की कुल संख्या 600 के आस-पास बताई जाती है। कहा जा रहा है कि ये निशान ही उस दौर में बोली जाने वाली भाषा की लिपि यानि लेखनी हो सकते हैं। हालाँकि पुख़्ता तौर पर अभी यह बात भी प्रमाणित नहीं है।
जब तक इन निशानों का सही-सही अर्थ समझ नहीं लिया जाता, तब तक स्थिति स्पष्ट नहीं होगी। लिहाज़ा, अभी सबके अपने-अपने अन्दाज़ हैं। सभी के अपने तर्क हैं। कोई इन्हें लिपि मानता है, क्योंकि कुछ इसी तरह की लिपियाँ दुनिया के अन्य हिस्सों में भी मिल चुकी हैं, जो प्राचीन सभ्यताओं से सम्बन्धित हैं। जबकि एक अन्य वर्ग है, जो सिन्धु घाटी सभ्यता से जुड़े इन निशानों को लिपि नहीं मानता। उसका तर्क है कि एक-दो या अधिकतम पाँच निशान (जैसे कि अब तक मिले हैं) भी एक साथ मिलाकर पूरी बात कहना, समझाना मुमकिन नहीं लगता। ऐसे ही, पक्ष-विपक्ष में और कई तर्क हैं। सभी तर्कों का अपना आधार है। इनके पक्षकार अपना आधार मजबूत करने में लगे हैं।
इसी सबके बीच, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने भी सम्भवत: अपना ‘आधार’ मज़बूत करने का रास्ता खोज लिया है। दरअस्ल तमिलनाडु के पुरातत्त्व विभाग ने कुछ वक्त पहले ही एक अध्ययन रिपोर्ट जारी की थी। इसका शीर्षक था, ‘सिन्धु घाटी सभ्यता के निशान और तमिलनाडु के भित्तिचित्र- एक रूपात्मक अध्ययन’। इसमें बताया गया है कि तमिलनाडु के विभिन्न पुरातात्त्विक स्थलों (दक्षिण भारत में पनपी वैगेई नदी घाटी सभ्यता से जुड़े) की खुदाई के दौरान जो भित्तिचित्र मिले हैं, वे 90% तक सिन्धु घाटी सभ्यता के निशानों जैसे ही हैं। बताया ये भी गया कि वैगेई नदी घाटी सभ्यता लौहयुग तक आ चुकी थी। वहीं सिन्धु घाटी सभ्यता ताम्रपाषाण युग तक ही रही।
बस, यहीं पूरी कहानी का केन्द्र ठहरा हुआ है। अस्ल में, बीते कई दशकों से एमके स्टालिन जैसे तमिलनाडु के कई नेता और उनकी पार्टी के जैसे राजनैतिक दल तमिल भाषा तथा संस्कृति की श्रेष्ठता स्थापित करने के नाम पर मौके भुनाते रहे हैं। वहाँ हिन्दी भाषा का उग्र विरोध होता है। वैदिक संस्कृति और परम्पराओं को ख़ारिज किया जाता है। बल्कि उन्हें निम्न साबित करने की लगातार क़ोशिश की जाती है। इसके लिए राजनैतिक दलों के प्रोत्साहन से जनान्दोलन चलाए जाते हैं। इस तरह, सत्ता तक पहुँचने के रास्ते बनाए जाते हैं। ख़ुद स्टालिन की पार्टी भी इसी तरह के रास्ते से होकर प्रदेश की सत्ता तक पहुँची और प्रमुख पार्टी बनी है। वहाँ मुख्य विपक्षी दल भी ऐसा ही है।
लिहाज़ा, माना यही जा रहा है कि स्टालिन ने इतने बड़े इनाम की घोषणा सिर्फ़ अपना राजनैतिक आधार मज़बूत करने और सियासी मक़सद साधने के लिए ही की है। इसके माध्यम से वे वैदिक संस्कृति पर अपने विचार (द्रविड़ संस्कृति) की श्रेष्ठता साबित करने का प्रयास करना चाहते हैं। क्योंकि सिन्धु घाटी सभ्यता को अब तक मुख्य रूप से प्राचीन भारत की वैदिक संस्कृति से जोड़कर देखा गया है। अलबत्ता, स्टालिन की घोषणा के पीछे अगर वाक़ई यही मक़सद है तो यक़ीन मानिए, लम्बी अवधि में यह ख़तरनाक खेल साबित हो सकता है। इस खेल से उन्हें या उनके जैसे नेताओं को लाभ होगा ही, यह तो नहीं पता, मगर देश का सामाजिक वातावरण ज़रूर जहरीला होगा।
देश में जनगणना होने वाली है। मतलब जनसंख्या कितनी है और उसका स्वरूप कैसा है,… Read More
जय जय श्री राधे Read More
अभी एक तारीख को किसी जरूरी काम से भोपाल से पन्ना जाना हुआ। वहाँ ट्रेन… Read More
भारत के प्रधानमंत्री कार्यालय के नए परिसर का उद्घाटन 13 फरवरी 2026 को हुआ। इसे… Read More
‘भ्रष्ट’ का अर्थ है- जब कोई अपने धर्म (कर्तव्य-पथ) से दूर हट जाए और ‘आचार’… Read More
ऐसी सूचना है कि अंग्रेजों की ईस्ट इण्डिया कम्पनी फिर दिवालिया हो गई और उसका… Read More