सांकेतिक तस्वीर
टीम डायरी
जिनके सिर के बाल झड़ चुके हैं या लगातार झड़ रहे हैं और जिन्हें इस कारण से अक्सर शर्मिन्दगी जैसी स्थिति का सामना करना पड़ता है, उनके लिए खुशखबरी है। अब जल्दी ही गंजे सिर पर बाल उगाए जा सकते हैं। इस सिलसिले में एक सफल प्रयोग हाल ही में हुआ है।
जानकारी के मुताबिक वैज्ञानिकों ने एंड्रोजेनेटिक एलोपेसिया नामक बीमारी का सफल इलाज ढूँढ लिया है। इसी बीमारी के कारण अधिकांश लोगों के सिर के बाल झड़ जाते हैं। वे गंजेपन के शिकार हो जाते हैं। ऐसे लोगों में पुरुष और महिला दोनों हो सकते हैं। अक्सर यह बीमारी अनुवांशिक होती है। यानी माता-पिता से उनके बच्चों में आती है। अब तक दुनिया में इस बीमारी को लाइलाज माना जाता रहा है। ऐसे में गंजेपन की स्थिति का सामना करने वाले लोग या तो अपनी स्थिति को यूँ ही स्वीकार कर लेते हैं या नकली बालों के विग से अपने गंजेपन को ढँकते हैं।
हालाँकि, अब ऐसे लोगों के लिए उम्मीद की एक किरण दिखी है। स्पेन की राजधानी मैड्रिड के सैन कार्लोस क्लीनिकल हॉस्पिटल के शोधकर्ताओं ने इस समस्या का सम्भावित इलाज खोज लिया है। इन शोधकर्ताओं के अध्ययन के निष्कर्ष ‘स्टैम सैल रिसर्च एण्ड थैरेपी’ नामक पत्रिका में प्रकाशित हुए हैं। इसके मुताबिक, अध्ययन के दौरान चूहों और चुहियों के शरीर से पूरी तरह बाल हटाने के बाद फिर प्राकृतिक रूप से उनके बाल उगाने की कोशिश की गई थी। इस दौरान पाया गया कि 100 प्रतिशत चूहों में बाल दोबारा उग आए हैं। कुछ में बहुत घने तो कुछ में उतने ही जितने पहले थे। जबकि 90 प्रतिशत चुहियों में भी इसी तरह से बालों का फिर से उगना देखा गया।
अब इस सफलता के बाद वैज्ञानिक इंसानों पर इसी प्रयोग को दोहराने वाले हैं। अगर उन पर भी प्रयोग सफल रहता है तो यह शोध दुनियाभर में गंजेपन की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है। जानकार बताते हैं कि दुनियाभर में 25 साल से ऊपर के 25 फीसदी लोगों बाल झड़ने की समस्या से जूझने लगते हैं। वहीं 50 साल से अधिक से 50 फीसद लोगों में यह समस्या देखी जाती है। जबकि वृद्धावस्था आते-आते तो 98 प्रतिशत लोगों के सिर के बाल झड़ जाते हैं। भारत से सम्बन्धित एक सर्वे रिपोर्ट इसी साल के शुरू में आई थी। उसमें बताया गया था कि देश में 25 से ऊपर के 50.31 प्रतिशत युवक बालों के झड़ने की समस्या से जूझते हैं। जबकि 20 से 30 फीसदी महिलाएँ भी बालों के कम होने, पतले होने की समस्या का सामना करने लगती हैं। इससे उन्हें तनाव, शर्मिन्दगी, और सार्वजनिक रूप से आत्मविश्वास कम होने जैसी तमाम समस्याओं से भी जूझना पड़ता है।
तो उम्मीद करें कि स्पेन में चल रहा प्रयोग इंसानों पर भी सफल रहे, कोई स्थायी इलाज जल्दी ही सामने आए और ऐसी तमाम समस्या से जूझ रहे लोगों को राहत मिले।
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