आध्यात्मिकता और अहंकार साथ नहीं चलते…रजनीकांत अपने अनुभव से बता रहे हैं, सुनिए!

टीम डायरी

आध्यात्मिकता और अहंकार साथ नहीं चलते, चल ही नहीं सकते। रह ही नहीं सकते एक साथ। अगर कोई आध्यात्मिक होने का दावा-दिखावा करता है और उसमें अहंकार भी झलकता रहता है, तो सच मानिए, आध्यात्मिकता की उसकी दावेदारी झूठी है। इसके ठीक उलट अगर कोई अहंकारशून्य है, तो वह दावा करे या न करे, दिखावा करे या न करे, उसकी आध्यात्मिकता को नि:संदेह स्वीकार किया जाना चाहिए। 

दक्षिण भारतीय फिल्मों के लोकप्रिय अभिनेता रजनीकांत का यह वीडियो गौर देखिए और उतने ही ध्यान से उनकी बातें सुनिए। उन्होंने बड़े ‘रोचक-सोचक’ अंदाज में अपना एक ताजातरीन अनुभव साझा किया है। यह वीडियो देखने-सुनने के बाद ऊपर जो बातें कही गईं हैं, उनकी सत्यता खुद सिद्ध हो जाएगी।  

रजनीकांत बता रहे हैं कि वह हाल ही में श्रीश्री रविशंकर के बेंगलुरू स्थित आश्रम में थे। वहाँ एक शुभ दिन पर श्रीश्री रविशंकर ने उनसे कहा कि वह अपने अनुयायियों से मिलने जा रहे हैं, आप (रजनीकांत) भी साथ चलिए। तब रजनीकांत बोले, “मेरी वजह से आपको कोई परेशानी तो नहीं होगी?” इस वक्त रजनीकांत को लग रहा था कि वह चूँकि दक्षिण भारतीय फिल्मों के बड़े लोकप्रिय कलाकार (उन्हें वहाँ अमिताभ बच्चन के जैसा दर्जा हासिल है) हैं, इसलिए आम लोगों का ध्यान उनकी तरफ चला जाएगा। भीड़ बेकाबू हो सकती है, जैसा कि अक्सर अन्य जगहों पर होने वाले कार्यक्रमों के दौरान हो भी जाता है। 

हालाँकि श्रीश्री रविशंकर ने उन्हें आश्वस्त किया, “कुछ नहीं होगा, आप चलिए।” और दोनों एक साथ श्रद्धालुओं की भीड़ के सामने जा पहुँचे। रजनीकांत ने वहाँ पहुँचकर, अपनी आदत के मुताबिक, हाथ हिलाकर लोगों का अभिवादन करने की कोशिश की। लेकिन आश्चर्य (रजनीकांत के लिए ज्यादा) कि किसी ने उनके अभिवादन का जवाब तक नहीं दिया। बल्कि उनकी ओर देखा तक नहीं। क्षणभर में रजनीकांत का अहंकार चूर-चूर हो गया (खुद रजनीकांत ऐसा कह रहे हैं)। उन्हें आध्यात्मिकता की शक्ति समझ में आ गई। उनको यह भी मान लेना पड़ा कि आध्यात्मिकता और अहंकार एक साथ नहीं चल सकते।

इतनी सी बात हम-आप भी मान लें, तो जीवन में बड़ा परिवर्तन आ सकता है। 

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Neelesh Dwivedi

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Neelesh Dwivedi

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