सांकेतिक तस्वीर
टीम डायरी
हर रोज सुबह-सुबह देश के तमाम शहरों-कस्बों के गली-चौबारों में घूमने वाली नगरीय निकायों की कचरा गाड़ियाँ गाना बजाती हैं, “स्वच्छ भारत का इरादा कर लिया हमने, देश से अपने ये वादा कर लिया हमने।” लेकिन सच्चाई यह है कि ऐसा वादा-इरादा सिर्फ नारों और गानों तक ही सीमित है। आम आदमी के स्तर पर देश में इक्का-दुक्का किसी शहर या कस्बे को छोड़ दें तो कहीं किसी में भी स्वच्छता के प्रति ऐसी जागरुकता नहीं दिखती कि जिससे लगे कि यह काम हमारे देश की छवि से जुड़ा है। इससे देश की छवि दुनिया में अच्छी या खराब होती है और लोग इस बात को समझते हैं। नहीं तो क्या वजह है कि आज भी तमाम शहरों-कस्बों में जगह-जगह कचरे के ढेर नजर आते हैं? क्या कारण है कि किसी भी शहर-कस्बे की गलियाें-सड़कों से निकल जाएँ, पान-गुटखा थूके जाने के निशान दिखते हैं जगह-जगह? कोई कहीं भी थूकता है, गंदगी फेंकता है, छिलके-पन्नियाँ, वगैरा चलते वाहनों से उछाल देता है ओर किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता? यही नहीं, कुछ चुनिन्दा लोगों को फर्क अगर पड़ता भी है तो उन्हें बेवकूफ समझा जाता है, यहाँ तक कि उनके साथ डण्डे-पत्थर से मारपीट तक कर दी जाती है? है कोई जवाब?
मुम्बई के उपनगरीय इलाके ठाणे से एक वीडियो सामने आया है। इसमें एक व्यक्ति बुजुर्ग दंपति के साथ मारपीट करते हुए दिखाई दे रहा है। जानकारी के अनुसार, मारपीट करने वाला व्यक्ति कोई टैक्सी चालक है। वह ज्यूपिटर अस्पताल के पास सड़क पर ही गरारा कर के कुल्ला कर रहा था। बुजुर्ग दंपति ने इसका विरोध किया तो वह आदमी उनसे बहस करने लगा। बात बढ़ते-बढ़ते मार-पीट तक पहुँच गई। आरोपी का नाम निशांत शुक्ला बताया जाता है। उसकी उम्र 40 साल के आस-पास है। जबकि उसने जिनसे मार-पीट की उनका नाम सरोज दस्तूर है, जो कि 75 वर्ष के करीब है। साथ में उनकी पत्नी भी थीं घटना के वक्त। उनका नाम राधिका सरोज दस्तूर है। वह भी 72 वर्ष के आस-पास हैं। पर आरोपी ने उन दोनों की उम्र का भी लिहाज नहीं किया। अपनी गलती के लिए खेद जताने या माफी माँगने के बजाय उसने उनसे न सिर्फ बहस की, बल्कि सरोज दस्तूर जी को मारते हुए जमीन पर गिरा दिया। बड़ा-सा पत्थर उठाकर वह भी उन पर दे मारा। इससे उनका पैर टूट गया। शरीर में अन्य चोटें भी आई हैं उन्हें।
सरोज और उनकी पत्नी पास में ही एक आवासीय सोसायटी में रहते हैं। शाम के वक्त दोनों जब घूमने निकले तब यह घटना हुई। बताया जाता है कि स्थानीय शिवसेना कार्यकर्ताओं ने आरोपी को पकड़कर पहले तो अच्छे से सबक सिखाया और फिर उसे पुलिस के हवाले कर दिया। अलबत्ता, इससे क्या फर्क पड़ता है? क्योंकि आरोपी को सबक सिखाने का दावा करने वाले नेता-कार्यकर्ता भी तो खुलेआम, पूरी ठसक से वही करते होंगे, जो निशांत ने किया। कि पहले तो कहीं भी थूक देना, कचरा वगैरा फेंक देना, और फिर कोई रोके-टोके तो उससे लड़ाई-झगड़ा करना! ऐसा नहीं है क्या? पूरे देश में यही हो रहा है। इसीलिए तो ऊपर लिखा है,“स्वच्छ भारत : एक कदम स्वच्छता की ओर…, लेकिन हाथ में डण्डा-पत्थर लेकर ताकि… स्वच्छता हमारे आस-पास भी न फटके!
हम अपने घरों की महिलाओं सै अक्सर कह दिया करते हैं, “तुम्हें काम ही क्या… Read More
भारत में जारी जनगणना प्रक्रिया के बीच ही जनसंख्या को लेकर नई बहस छिड़ गई… Read More
एक गाना है ‘सिलसिला’ फिल्म (1981) का, “ये कहाँ आ गए हम, यूँ ही साथ… Read More
‘सनातन’ शब्द पहली बार गौतम बुद्ध ने इस्तेमाल किया! इस तरह का दावा लगातार एक… Read More
गोस्वामी श्री नाभादास जी के हाथों जब ‘श्री भक्तमाल’ प्रकट हुआ, जब उन्होंने पहली बार… Read More
मैं बेंगलुरू में जहाँ रहता हूँ, वहाँ अपने घर के सामने रोज इस तरह का… Read More