शिक्षक वो अज़ीम शख़्सियत है, जो हमेशा हमें आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करता है

ज़ीनत ज़ैदी, शाहदरा, दिल्ली से

ज़िन्दगी में दो ही लोग चाहते हैं कि हम उनसे ज्यादा कामयाब हों। पहले- हमारे माता-पिता और दूसरे हमारे शिक्षक। हम कितने भी अमीर या बुद्धिमान क्यों ना हो जाएँ, इनके आगे हम हमेशा ही कम रहते हैं। लेकिन बच्चे अपने पैरों पर खड़े होने के बाद दोनों के ही एहसान भूल जाते हैं। शिक्षकों के लिए सम्मान तो शायद मुश्किल से ही 30% विद्यार्थियों के दिल में होता हो। क्लासरूम में उन बच्चों को देखकर आश्चर्य होता है, जो शिक्षकों के आगे घमंड दिखाते हैं। अक्सर वह बच्चे अपना टशन दिखाने के चक्कर में शिक्षको को नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं। उन्हें ख़्याल भी नहीं होता कि हम उन्हें नीचा दिखा रहे हैं, जो हमसे उम्र और तज़ुर्बे में कई गुना बड़े हैं। हमारे माँ-बाप के समान है।

एक शिक्षक तो हमें हमारे माता-पिता से भी ज्यादा सपोर्ट करता है। हमें हर अच्छी-बुरी चीज के बारे में समझाता है। शिक्षक अज़ीम शख़्सियत होता है, जो हमेशा हमें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। उनसे हम कुछ भी साझा कर सकते हैं, पूछ लेते हैं। वह अपनी पूरी मेहनत, दिल और दिमाग़ लगाकर अपने बच्चे की तरह हमारा मार्गदर्शन करते है। हमें हर अच्छे बुरे वक़्त में साहसपूर्वक खड़े रहने के लिए तैयार करते हैं। इसके बदले में वह हमसे कुछ नहीं चाहते सिवाय आदर और प्रेम के।

शिक्षक एकमात्र व्यक्ति है, जो बगैर किसी रिश्ते-नाते और फ़ायदे के हमें एक बेहतर इंसान बनाना चाहता है। शिक्षक की डाँट विद्यार्थियों के लिए प्रसाद के समान होती है। जिस तरह बिना भगवान के आशीर्वाद के ज़िन्दगी अधूरी है, उसी तरह बिना शिक्षक की डाँट के कोई सफल हो ही नहीं सकता। एक बेहतर शिक्षक हमेशा ही हमारे भले के लिए हमें समझाता और डाँटता है। क्या इस सब के बदले हमें शिक्षक का सम्मान नहीं करना चाहिए?

हमारे माता-पिता ने हमें चलना सिखाया। लेकिन सही मंजिल की राह दिखाने वाला शिक्षक ही होता है। चाहे हम कितने भी बड़े ओहदे पर क्यों न पहुँच जाएँ, हमारे लिए हमेशा ही हमारे गुरुजन सबसे बड़े होने चाहिए। वे केवल हमारे अध्यापक नहीं, बल्कि हमारे व्यक्तित्त्व के निर्माता होते हैं। हमें हमेशा उनके एहसान को याद रखना चाहिए। ख़्याल रखना चाहिए कि आज हम जो भी है, उनकी मेहनत और लगन की वजह से हैं।

जय हिन्द।
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(ज़ीनत #अपनीडिजिटलडायरी के सजग पाठक और नियमित लेखकों में से एक हैं। दिल्ली के आरपीवीवी, सूरजमलविहार स्कूल में 10वीं कक्षा में पढ़ती हैं। लेकिन इतनी कम उम्र में भी अपने लेखों के जरिए गम्भीर मसले उठाती हैं। उन्होंने यह आर्टिकल सीधे #अपनीडिजिटलडायरी के ‘अपनी डायरी लिखिए’ सेक्शन पर पोस्ट किया है।)
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