टीम डायरी, 18/72021
इस देश में नेताओं और उनके परिवारों ने छवि इस तरह की बना ली है कि एक बार इस तस्वीर (लेख के साथ दी गई) पर शायद ही किसी को यक़ीन हो। लेकिन यह सच्ची तस्वीर है। सहजता और सादगी की। तस्वीर में दिख रहे दम्पति केन्द्रीय मंत्री एल मुरुगन के माता-पिता हैं। पिता- लाेगनाथन, उम्र 68 साल और माँ- वरुदम्मल, उम्र 59 साल। दोनों तमिलनाडु के नमक्कल जिले में स्थित अपने गाँव कोनुर में रहते हैं। आज से कई बरस पहले जब बेटा (मुरुगन) छोटा था, तब ऐसे ही मज़दूरी किया करते थे। उसे जैसे-तैसे इधर-उधर से कर्ज लेकर पढ़ाया-लिखाया। बेटा होनहार था। जल्द ही अपने पैरों पर खड़ा हो गया। वकील बन गया। राजनीति में कदम रखे और देश के सत्ताधारी दल की तमिलनाडु इकाई का अध्यक्ष बना दिया गया। लेकिन उसके माता-पिता अपनी सहज ग्रामीण ज़िन्दगी में ही रमे रहे। खेतों में ही काम करके अपनी आजीविका का बन्दोबस्त करते रहे।
फिर एक दिन उन बुज़ुर्ग दम्पति को ख़बर मिली कि उनका बेटा भारत सरकार में मंत्री बन गया है। कुछ ख़बरखोजी बरादरी के लिए लोगों ने उनके पास पहुँचकर उन्हें यह सूचना दी थी। लेकिन उनकी सहजता काबिल-ए-गौर। माँ वरदम्मल ने मीडिया के लोगों को सपाट लहज़े में ज़वाब दे दिया, “वह मंत्री बन गया, तो इससे हमें क्या? वह आज जो भी है, अपनी मेहनत, अपनी लगन से है। उसकी उपलब्धि में हमारी कोई भूमिका नहीं।” इसके बाद वे और उनके पति फिर अपने उस काम में जुट गए, जिससे उनकी रोजी-रोटी आज भी चला करती है। कारण कि वे इस उम्र में भी, अपने बेटे के भारी-भरकम रुतबे से अलग, अपनी दम पर अपना जीवनयापन करने की इच्छा रखते हैं। इसके लिए उन्हें रोज दूसरों के खेतों में काम करना पड़ रहा है। क्योंकि उनके पास आज तक भी अपनी कोई ज़मीन नहीं है। पर ख़ुद्दारी ने उनका साथ नहीं छोड़ा है। इसलिए उन्हें कोई मलाल भी नहीं है।
निश्चित ही बड़ी बात है, लोगनाथन और वरुदम्मल की यह कहानी। इस दौर में जब लोग दूर-दराज़ के रसूख़दार रिश्तों को भी अक्सर सिर्फ़ इसलिए अपने साथ जोड़ लिया करते हैं कि इससे उसका रुतबा बढ़ेगा,तब ये बूढ़े माता-पिता अपने ही बेटे से दूरी बनाए हुए हैं। आज जब नेताओं के परिजन, सम्बन्धीजन भी छोटा-बड़ा मौका मिलते ही भ्रष्टाचार से हासिल धन लूटने-खसोटने का अवसर नहीं छोड़ते, ये दोनों गाँव में दिहाड़ी मज़दूरी से मिले चन्द पैसों से खुश हैं। सादगी और ईमानदारी की मिसालें ऐसी ही हुआ करती हैं यक़ीनन।
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