क्या डोनाल्ड ट्रम्प कोरोना पर ‘चुनावी जोख़िम’ ले रहे हैं?

टीम डायरी, 6/10/2020

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बारे में सूचना है कि वे सोमवार को (अमेरिकी समयानुसार) कोरोना संक्रमण के बावज़ूद अपने आधिकारिक निवास ‘व्हाइट हाउस’ (White House) लौट आए हैं। इससे पहले वे चार दिन तक सेना के अस्पताल (Walter Read National Medical Center) में भर्ती रहे। लेकिन चिकित्सकों ने उनके कहने पर ही उन्हें वहाँ से छुट्‌टी दे दी। 

हिन्दुस्तान टाइम्स (HIndustan Times) के अनुसार, डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने निवास में सीढ़ियों से दाख़िल हुए। इससे पहले व्हाइट हाउस में ही कुछ दूरी पर मौज़ूद मीडिया के प्रतिनिधियों का हाथ हिलाकर अभिवादन किया। मुँह से मास्क हटा दिया। पास में खड़े सुरक्षाकर्मी को जवाबी सलाम (Salute) किया। फिर भीतर गए। इसके बाद उनकी ओर से ट्विटर (Twitter) के जरिए आधिकारिक तौर पर सूचना दी गई कि वे “जल्दी चुनाव प्रचार के मैदान पर लौटेंगे”। इसी से सवाल उठता है कि क्या ट्रम्प कोरोना जैसी जानलेवा बीमारी पर ‘चुनावी जोख़िम’ ले रहे हैं? इस प्रश्न के आधार में तथ्य हैं। इनमें पहला तो यही है कि ट्रम्प अब तक अपने ‘असामान्य, अनिश्चित रवैये और व्यवहार’ के लिए दुनिया में पहचान बना चुके हैं। उनके व्यवहार तथा नीतियों में न स्थिरता है, न गम्भीरता और न परिपक्वता। इसलिए वे नवम्बर में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के मद्देनज़र जोख़िम ले रहे हों तो किसी को अचरज नहीं होगा।

ख़ुद ट्रम्प के लिए कोरोना पर उनका रवैया दोतरफ़ा ‘जोख़िम’ है। पहला- उनके अपने जीवन का। कोरोना विशेषज्ञ चिकित्सकों ने ट्रम्प के अब तक हुए इलाज के आधार पर राय बनाई है। द इकॉनॉमिक टाइम्स (The Economic Times) के अनुसार विशेषज्ञ चिकिस्सकों का मानना है कि ट्रम्प में गम्भीर कोरोना संक्रमण के लक्षण हैं। उनके खून में ऑक्सीजन का स्तर तेजी से ऊपर-नीचे हो रहा है। उन्हें दी जा रही दवाएँ (Remdesivir, Steroid) से भी उनके फेंफड़ों में संक्रमण की गम्भीरता की पुष्टि होती है। उनकी उम्र भी 77 साल है। इस हिसाब से वे अगर अपनी सेहत को लेकर ‘चुनावी कारणों’ से सही, लापरवाही बरतते हैं तो उनके जीवन के लिए ख़तरा रहेगा। दूसरी बात- ट्रम्प के रवैये से उनके परिजनों व कर्मचारियों में संक्रमण फैलने की भी आशंका रहेगी। बल्कि इसकी शुरुआत हो चुकी है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैली मैकेनी और उनकी टीम के दो अन्य सदस्य संक्रमित हो चुके हैं।

ट्रम्प इसी स्थिति में अगर चुनावी रैलियाँ करते हैं, तो ऐसे आयोजनों से आम जनता में संक्रमण फैलने का भी ख़तरा रहने वाला है। जबकि अमेरिका में पहले ही कोरोना संक्रमण की स्थिति दुनिया भी सबसे अधिक चिन्ताजनक है। वहाँ करीब साढ़े सात करोड़ लोग कोरोना संक्रमित हो चुके हैं और दो लाख 10 हजार लोगों की जान चली गई है। ऐसे में ट्रम्प के रवैये से हालात और बिगड़े तो उन्हें चुनावी नुकसान हो सकता है। क्योंकि वे पहले भी कोरोना के मामले में लगातार लापरवाही बरतते रहे हैं। बेफिक्री वाले बयान देते रहे हैं। इससे अमेरिकी नागरिकों में नाराज़गी देखी जा रही है।

इसीलिए यह देखना भी ‘रोचक-सोचक’ होगा कि अपनी ऐसी छवि के बावज़ूद अगर ट्रम्प कोरोना पर कोई ‘चुनावी जोख़िम’ लेकर आगे बढ़ रहे हैं, तो उसका अगला नतीज़ा क्या होता है। 

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