‘ग्रामोदय से भारत उदय’ की अवधारणा नानाजी देशमुख की थी, हम उसी से फूटे अंकुर हैं!

डॉक्टर प्रमोद पांडे, कैलीफोर्निया, अमेरिका से, 30/10/2020

मैं प्रमोद पांडे। वर्तमान में अमेरिका के कैलीफोर्निया विश्वविद्यालय में व्याख्याता (Professor) हूँ। हालाँकि मैं मूल रूप से मध्य प्रदेश के सतना जिले के चित्रकूट से ताल्लुक रखता हूँ। वहाँ के नज़दीकी गाँव नकैला में मेरा जन्म हुआ। शुरुआती शिक्षा भी गाँव के सरकारी विद्यालय में ही हुई। इसके बाद मैं उच्च शिक्षा के लिए चित्रकूट आ गया। वहाँ ग्रामोदय विश्वविद्यालय से मैंने अभियांत्रिकी में स्नातक (Bachelor in Engineering) की उपाधि ली। वहाँ की पढ़ाई मेरे जीवन का सबसे अहम मोड़ साबित हुई। यह मानने में मुझे कोई संकोच नहीं है। 

हम सबको पता है कि ग्रामोदय विश्वविद्यालय की स्थापना भारत रत्न नानाजी देशमुख ने की थी। लिहाज़ा यहाँ पढ़ाई के दौरान विश्वविद्यालय के तमाम अन्य विद्यार्थियों की तरह मुझे भी जब-तब नानाजी से किसी न किसी रूप में रू-ब-रू होने का मौका मिलता रहा। उनके विचारों को जानने-समझने और उन पर चिन्तन-मनन करने का अवसर मिला। यहीं मैंने समझा कि असल में नानाजी के समाज सेवा कार्यों के मूल में ‘ग्रामोदय से भारत उदय’ की अवधारणा है। यह उनका ही मौलिक चिन्तन था। उनका स्पष्ट मत था कि गाँवों को, ग्रामीणों को हर तरह से आत्मनिर्भर बना दिया जाए तो सही अर्थों में भारत उदय हो सकेगा। इस रूप में भारत की ख्याति पूरी दुनिया में फिर वैसे ही फैल सकेगी, जैसे कभी प्राचील काल में फैली हुई थी। और नानाजी ने अपनी अवधारणा को जिस तरह भारत के कई गाँवों में लागू किया, कराया, उसके अपेक्षित नतीज़े मिले भी। मैं और मेरे जैसे न जाने कितने विद्यार्थी इसकी मिसाल हैं। 

हम भारत के छोटे-छोटे गाँवों से निकले सब विद्यार्थी असल में भारत से निकलकर अमेरिका सहित दुनिया के अन्य देशों में कर क्या रहे हैं? नानाजी के विचारों का प्रचार-प्रसार ही तो? ये विचार हमारी आत्मा में रचे-बसे हैं। उनके दिए ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ जैसे संस्कारों को आधार बनाकर ही हमने यहाँ, दूर देश में अपना परिवार बनाया। अपने मित्रों  का समूह बनाया। मिसाल के तौर पर मेरी पत्नी चीन की हैं। लेकिन मेरे साथ-साथ रहते-रहते वे भी नानाजी जैसे भारतीय महापुरुषों से अच्छी तरह परिचित हो चुकी हैं। उनका सम्मान करने लगी हैं। 

इसी तरह मेरे तमाम अमेरिकी मित्र, जो नानाजी से कभी मिले तो नहीं लेकिन उनके विचारों से बेहद प्रभावित हैं। इतने अधिक कि जब उन्हें पता चला कि 30 अक्टूबर को हिन्दी महीने की तिथि के अनुसार नानाजी की जयन्ती ऑनलाइन मनाई जाने वाली है, तो उनकी खुशी का ठिकाना न रहा। मेरी तो खुशी दोगुनी है। चित्रकूट में रहते हुए मैं हर साल ‘शरदोत्सव’ कार्यक्रम का साक्षी बना करता था। अमेरिका आने के बाद यह सिलसिला टूट गया। लेकिन हाल ही में जब मुझे ये पता चला कि इस साल शरद पूर्णिमा पर ‘टुवॉर्ड्स बैटर इंडिया° (Towards Better India) नाम की संस्था ‘अनहद-2020’ का आयोजन कर रही है, तो सब पुरानी यादे ताज़ हो गईं। मैं आज उन तमाम पुरानी स्मृतियों को अपने परिजनों और मित्रों के साथ भी साझा करने वाला हूँ। शाम छह से आठ बजे के बीच। मुझे यकीन है कि दुनिया के दूसरे देशों में बैठे नानाजी के प्रशंसक भी निश्चित रूप से यही करने वाले हैं। 

——-

(डॉक्टर प्रमोद पांडेय ने वीडियो सन्देश के जरिए अपने विचार #अपनीडिजिटलडायरी को भेजे हैं। माध्यम बनी हैं, समाजसेवी डॉक्टर नन्दिता पाठक, जाे नानाजी देशमुख की निकट सहयोगी रही हैं। डायरी पर नियमित लेखन करती हैं। ‘अनहद-2020’ की आयोजक भी हैं।)

सोशल मीडिया पर शेयर करें
Apni Digital Diary

Share
Published by
Apni Digital Diary

Recent Posts

56 साल के ‘युवा’ सत्ता के लिए आग भड़का रहे और 28 साल के देश को नई ऊँचाई दे रहे!

अभी सोमवार, 20 जुलाई को संसद का मॉनसून सत्र शुरू हुआ। इससे कुछ समय पहले… Read More

3 hours ago

वंदेमातरम

जय जय श्री राधे Read More

1 day ago

‘सरल भक्तमाल’- 11..: तर्क कोई कितने भी दे, वैष्णव भक्ति के मूल सम्प्रदाय तो चार ही हैं!

कलि युग में भक्ति मार्ग पाखण्ड से घिरा रहता है, इसलिए भगवान के भजन-पूजन, नाम… Read More

3 days ago

फिल्म ‘थ्री इडियट’ के फुनसुक वाँगड़ू नहीं हैं सोनम वाँगचुक, फिर भी ऐसा प्रचार क्यों?

शिक्षा प्रणाली में मूलभूत सुधार और केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की माँग… Read More

4 days ago

केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा मण्डल ने अंग्रेजी को ‘विदेशी भाषा’ कह दिया, तो हाय-तौबा क्यों?

भाषा को लेकर बेवजह की हाय-तौबा मची हुई इन दिनों। वजह वही, पीढ़ियों से भारतीय… Read More

5 days ago

जिन्हें सच्ची खुशी की तलाश, वे आईआईटी प्रवेश परीक्षा में जानबूझकर फेल भी हो जाते हैं!

जिन्दगी अपनी है, चुनाव भी अपने ही होते हैं। ऐसा अक्सर कहा जाता है। लेकिन… Read More

6 days ago