सांकेतिक तस्वीर
टीम डायरी
बीएसएनएल यानि ‘भारत संचार निगम लिमिटेड’। भारत सरकार की इस कम्पनी की जिम्मेदारी है पूरे देश में आम आदमी को उच्च गुणत्ता की संचार सुविधाएँ देना। लेकिन सच्चाई यह है कि कम्पनी सरकार के विभागों को भी अच्छी संचार सुविधा नहीं दे पा रही है। और विभाग भी कौन? पुलिस का, जिसे हर समय अत्याधुनिक होते अपराधियों से निपटना पड़ता है। दूरदराज के इलाकों से भी जिसे तेजी से सन्देशों के आदान-प्रदान की जरूरत है। उस विभाग तक को बीएसएनल से ठीक-ठाक स्तर की संचार सुविधा भी नहीं मिल पा रही है।
इसीलिए अब मध्य प्रदेश के पुलिस विभाग ने फैसला किया है कि वह अपने सभी जवानों और अफसरों को दी गई बीएसएनएल की सिमों को बीएसएनएल से हटाकर एयरटेल में ले जाएगा। ये सिमें भी कोई इक्का-दुक्का नहीं है। करीब 79,000 सिमें हैं, जो बीएसएनएल से हटाई जा रही हैं। कारण? बीएसएनल की सिमों से इन्टरनेट की स्पीड नहीं मिलती और कहीं-कहीं तो नेटवर्क ही नहीं मिलता। इससे अपराधियों की धरपकड़, अपराधों की रोकथाम और जाँच तथा उसके बाद की कानूनी प्रक्रिया में दिक्कतें आ रही हैं। इसीलिए बदलाव जरूरी है।
मध्य प्रदेश पुलिस विभाग की ओर से बाकायदा आदेश जारी किया गया है। इसमें सभी जवानों और अफसरों को अपनी सिमें एयरटेल में ले जाने के लिए जरूरी कदम उठाने को कहा गया है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, बीएसएनल अब तक 3जी और 4जी सेवाएँ ही दे रहा है। जबकि वर्तमान जरूरतों के देखते हुए आवश्यकता 5जी सेवा की है। इसी कारण एयरटेल की ओर से रुख किया जा रहा है, जो 5जी सेवा दे रही है।
अब यहाँ एक ‘रोचक-सोचक’ जानकारी याद दिलाते हैं। यह कि बीएसएनएल के साथ कई जगहों पर नेटवर्क न मिलने या इन्टरनेट की धीमी गति की शिकायतें बरसों से चस्पा होती रहीं हैं। इसी चक्कर में कुछ लोग तो मजाक ही मजाक में बीएसएनएल का पूरा नाम यूँ भी कहने लगे थे, ‘भीतर से न लगे’, ‘बाहर से न लगे’ वह बीएसएनएल। अलबत्ता, मजाक की यह बात आम आदमी से जुड़ी थी। शायद इसीलिए बीएसएनएल ने उस पर ध्यान ही नहीं दिया। फिर उसे सरकारी विभागों से पर्याप्त उपभोक्ता भी मिल ही रहे थे। इसीलिए भी बेफिक्री थी।
लेकिन अब क्या? मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्य के पुलिस विभाग ने इसी बेफिक्री के चक्कर में थोक के भाव से 79,000 सिमों को बीएसएनएल से हटाने का निर्णय ले लिया! क्या अब भी बीएसएनएल अपनी सेवाओं के मामले में पहले जैसी ही बेफिक्री का शिकार रहेगा? या फिर अब उसमें थोड़ी शर्म का संचार होगा? और वह अपनी सेवाओं की गुणवत्ता को सुधारने पर प्राथमिकता से ध्यान देगा? क्योंकि प्रतिस्पर्धी बाजार व्यवस्था में इस तरह का झटका किसी भी कम्पनी के लिए शर्म का विषय ही हुआ करता है, अनदेखी करने का नहीं!
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