विश्व शतरंज चैम्पियन दिव्या देशमुख- ये दिन, ये तारीख, ये लम्हा, ये चेहरा…याद रखिएगा!

टीम डायरी

कुछ दिन, कोई तारीख, कोई लम्हा, कोई चेहरा, कभी-कभी ऐसा हो जाता है, जाे बरसों-बरस जेहन में समा जाता है। इतिहास के पन्नों में दर्ज हो जाता है। बार-बार, सालों-साल तक पीढ़ी-दर-पीढ़ी लोगों को प्रेरित करता रहता है। सोमवार, 28 जुलाई 2025 का दिन और तारीख ऐसी ही रही। इस दिन एक लम्हा और एक चेहरा यादगार बनकर उभरा और इंसानी यादों में हमेशा के लिए कैद हो गया।

वह चेहरा है दिव्या देशमुख का। और लम्हा, दिव्या के विश्व शतरंज चैम्पियन बनने का। दिव्या शतरंज में भारत की पहली महिला विश्व चैम्पियन हैं। साथ ही चौथी महिला ग्राण्ड मास्टर भी। इस नाते आने वाले कई सालों तक वह शतरंज के खेल में आने वाले बच्चों की प्रेरणा बनने वाली हैं। अलबत्ता, कहानी यहीं खत्म नहीं हो जाती। गौर करने लायक यह भी है कि दिव्या ने विश्व चैम्पियन का खिताब भारत की ही वरिष्ठ खिलाड़ी कोनेरू हम्पी को हराकर जीता है। यानि हर सूरत में इस बार यह उपलब्धि भारत को ही मिलनी थी। 

यही नहीं, पुरुष वर्ग में भी शतरंज के विश्च चैम्पियन भारत से ही हैं, डी गुकेश। उन्होंने दिसम्बर-2024 में चीन के डिंग लिरेन को हराकर विश्व चैम्पियन का खिताब अपने नाम किया था। उल्लेखनीय यह भी है कि दिव्या ने जहाँ 19 बरस की उम्र में खिताब जीता है, तो डी. गुकेश ने उनसे थोड़ा ही पहले 18 की उम्र में यह उपलब्धि अपने नाम की है। पर जनाब, कहानी अभी यहाँ तक भी खत्म नहीं होती। 

दिसम्बर से थोड़ा पीछे सितम्बर-2024 को याद कीजिए। तब हंगरी के बुडापेस्ट में शतरंज ओलम्पियाड हुआ था। उसमें भारत की पुरुष और महिला दोनों टीमों ने स्वर्ण पदक अपने नाम किए थे, पहली बार। उन टीमों में भविष्य के दोनों विश्व चैम्पियन भी थे। यानि- डी गुकेश पुरुषों में और दिव्या देशमुख महिलाओं में। तब कौन जानता था कि अगले एक साल से भी कम समय में ये दोनों विश्व शतरंज चैम्पियन के तौर पर दुनिया में पहचाने जाने वाले हैं? लेकिन आज यह हो चुका है। इसलिए उसी शतरंज ओलम्पियाड के स्वर्ण पदक विजेताओं में शुमार भारत के कुछ चेहरों तथा नामों को और याद कर लीजिए। पुरुषों में अर्जुन एरिगैसी, प्रज्ञानानन्द रमेशबाबू, विदित गुजराती और पेंटाला हरिकृष्ण। जबकि, महिलाओं में हरिका द्रोणवल्ली, वैशाली रमेशबाबू, वन्तिका अग्रवाल और तानिया सचदेव।

और हाँ, ओलम्पियाड के दौरान गुकेश, दिव्या, अर्जुन, तथा वन्तिका ने चार व्यक्तिगत स्वर्ण पदक भी जीते थे। यह कारनामा भी पहली बार ही हुआ था। तो अब क्या किसी को सन्देह हो सकता है कि शतरंज में भारत दुनिया का सर्वश्रेष्ठ देश है? शायद ही किसी को हो।

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Neelesh Dwivedi

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