एक क़िस्सा दिखाता हूँ। हाँ, दिखाता ही हूँ। देखिए। मध्य प्रदेश के शहर भोपाल में ‘भारत-भवन’ का अंतरंग सभागार। खचाखच भरा हुआ। यहाँ तीन-चार सौ…
View More काँपते हाथों में बाँसुरी हिलती रहे और सुर थमे रहें, तो समझिए वे हाथ ‘हरि जी’ के हैंAuthor: Neelesh Dwivedi
शिवाजी ‘महाराज’ : …जब एक हाथी के कारण रिश्तों में कभी न पटने वाली दरार आ गई
शूर मराठा सरदार रिश्तों में बँधकर एक हो जाते। फिर भी आँखों पर पट्टी बाँधकर अँधेरे को बुलावा भेजते। और सभी उस अँधेरे में गिरते-पड़ते…
View More शिवाजी ‘महाराज’ : …जब एक हाथी के कारण रिश्तों में कभी न पटने वाली दरार आ गईशिवाजी ‘महाराज’ : मराठाओं को ख्याल भी नहीं था कि उनकी बगावत से सल्तनतें ढह जाएँगी
अमावस की काली रात गहरा रही थी। यातनाओं से छुटकारा दिलानेवाला भी तो कोई हो। किसको टेरें? सुनकर दौड़ आने वाले श्रीहरि भी तो अब…
View More शिवाजी ‘महाराज’ : मराठाओं को ख्याल भी नहीं था कि उनकी बगावत से सल्तनतें ढह जाएँगी60 की उम्र में 100 साल जीने का लक्ष्य बनाया, 96 तक पहुँच भी गईं, मगर कैसे?
अमेरिका के न्यू यॉर्क की क्वीन्स काउन्टी (कस्बा) में पैदा हुईं एक तैराक हैं। उम्र 96 साल। नाम है, जूडी यंग। और वे इस उम्र…
View More 60 की उम्र में 100 साल जीने का लक्ष्य बनाया, 96 तक पहुँच भी गईं, मगर कैसे?शिवाजी ‘महाराज’ : महज पखवाड़े भर की लड़ाई और मराठों का सूरमा राजा, पठाणों का मातहत हुआ
महाराष्ट्र के यादव राजाओं की राजधानी थी देवगिरि (आज का दौलताबाद, औरंगाबाद)। मराठों का गरुड़ध्वज देवगिरी पर शान से फहरा रहा था। यादव राजा अपने…
View More शिवाजी ‘महाराज’ : महज पखवाड़े भर की लड़ाई और मराठों का सूरमा राजा, पठाणों का मातहत हुआअंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस : आज समय की जरूरत है कि शिक्षा मातृभाषा में दी जाए
अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस। दुनिया को यह अनूठा दिन बांग्लादेश की देन है। जबकि भाषाई विविधता बांग्लादेश के बजाय भारत और अफ्रीकी देशों में कहीं ज्यादा…
View More अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस : आज समय की जरूरत है कि शिक्षा मातृभाषा में दी जाए…तो समझिए कि हम भी मर चुके हैं, हम सब माँस के पुतलेभर हैं!
मध्यप्रदेश के उज्जैन में मुख्यमंत्री की मौजूदगी में एक महिला पत्रकार की साड़ी खींच ली जाती है। नोचा जाता है। ‘मुख्यमंत्री साहब’ सॉरी कहकर आगे…
View More …तो समझिए कि हम भी मर चुके हैं, हम सब माँस के पुतलेभर हैं!शिवाजी ‘महाराज’ : आक्रान्ताओं से पहले….. दुग्धधवल चाँदनी में नहाती थी महाराष्ट्र की राज्यश्री!
महाराष्ट्र की भूमि देवी-देवताओं की भूमि है। अपने हाथों में नानाविध शस्त्रास्त्र धारण कर आसुरी शक्तियों का विध्वंस करने वाले देवी-देवता मराठों के घरों में,…
View More शिवाजी ‘महाराज’ : आक्रान्ताओं से पहले….. दुग्धधवल चाँदनी में नहाती थी महाराष्ट्र की राज्यश्री!शिवाजी ‘महाराज’ : किहाँ किहाँ का प्रथम मधुर स्वर….
बात अप्रैल-2005 की है। जीवन में पहली बार ‘जाणता राजा’ महानाटक के माध्यम से छत्रपति शिवाजी के जीवन-चरित्र को सामने से देखने का मौक़ा मिला…
View More शिवाजी ‘महाराज’ : किहाँ किहाँ का प्रथम मधुर स्वर….शिव हैं, तो समझिए संकट नहीं ही है
शिव हैं, तो सत्य है। शिव हैं, तो साहित्य है। शिव हैं, तो गीत है। शिव हैं, तो संगीत है। शिव हैं, साधना है। शिव…
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