सुशील शुक्ल जी की कविता
अपूर्वी वशिष्ठ, दिल्ली से
आज युवा दिवस है। स्वामी विवेकानंद की जयन्ती। और इस मौके पर दिल्ली में पाँचवी कक्षा में पढ़ने वाली बच्ची अपूर्वी ने पर्यावरण से जुड़े मसले पर समानुभूति दर्शाती एक खूबसूरत कविता पढ़ी है। बिल्कुल उसी सम्वेदना के साथ, जिस वेदना को महसूस करते हुए सुशील शुक्ल जी ने इसे लिखा होगा।
और आज जब उत्तराखंड में जोशीमठ नाम का एक प्राचीन क़स्बा पर्यावरण के साथ किए जा रहे खिलवाड़ के नतीजे में अतीत होने के मुहाने पर खड़ा है, हिमालय दरकने लगा है, तो यह वेदना कितनी बड़ी हो जाती है। सम्वेदना कितनी मौज़ूँ हो जाती है।
ऑडियो में है, सुनिएगा और महसूस कीजिएगा, इन शब्दों और भावनाओं को… छोटे-छोटे बच्चे महसूस कर सकते हैं तो हम, आप क्यों नहीं?
अभी सोमवार, 20 जुलाई को संसद का मॉनसून सत्र शुरू हुआ। इससे कुछ समय पहले… Read More
कलि युग में भक्ति मार्ग पाखण्ड से घिरा रहता है, इसलिए भगवान के भजन-पूजन, नाम… Read More
शिक्षा प्रणाली में मूलभूत सुधार और केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की माँग… Read More
भाषा को लेकर बेवजह की हाय-तौबा मची हुई इन दिनों। वजह वही, पीढ़ियों से भारतीय… Read More
जिन्दगी अपनी है, चुनाव भी अपने ही होते हैं। ऐसा अक्सर कहा जाता है। लेकिन… Read More
View Comments
Nice kabita apoorvi
👍
Very nice beta 👍