संस्कार एक ऐसा शब्द है, जो हम अपने बचपन से ही और अभी भी रोज कहीं न कहीं सुनते ही रहते हैं। संस्कार का हमारे…
View More संस्कार हमारे जीवन में कैसे अच्छी या बुरी भूमिका निभाते हैं?Tag: अपना पन्ना
हो सके तो अपनी दिनचर्या में ज्यादा से ज्यादा हिन्दी का प्रयोग करें, ताकि….
हमारे द्वारा प्रयोग में लाने वाली भाषा न सिर्फ संचार का जरिया है बल्कि वह हमारी पहचान भी है। हमारा जन्म भारत जैसे महान देश…
View More हो सके तो अपनी दिनचर्या में ज्यादा से ज्यादा हिन्दी का प्रयोग करें, ताकि….हमारे लिए होली के रंग अब हमेशा फीके रहेंगे ‘बाबा’, आपसे विदा लेना सम्भव नहीं है…!!
बाबा आपका जाना हम सबका अनाथ हो जाना है। पीपी सर के नाम से मशहूर पुष्पेंद्र पाल सिंह जी को हम स्टूडेंट्स प्यार से ऐसे…
View More हमारे लिए होली के रंग अब हमेशा फीके रहेंगे ‘बाबा’, आपसे विदा लेना सम्भव नहीं है…!!दुर्रानी व सामवेद का उर्दू अनुवाद: वेद किसी की धरोहर नहीं, वे मानव के लिए ईश्वरीय वाणी हैं
झारखंड के रहने वाले एक मशहूर फिल्मकार हैं इक़बाल दुर्रानी। उन्होंने कुछ समय पहले ‘सामवेद’ का उर्दू में अनुवाद किया था। लेकिन इतना वक़्त बीत…
View More दुर्रानी व सामवेद का उर्दू अनुवाद: वेद किसी की धरोहर नहीं, वे मानव के लिए ईश्वरीय वाणी हैंखुद को पहचानिए, ताकि आप खुद ही खुद से महरूम न रह जाएँ
हमारा जीवन दिन-ब-दिन और ज़्यादा तनवभरा होता जा रहा है। इसके पीछे बहुत से कारण हैं। जैसे हमारा भोजन, दिनचर्या और सबसे महत्त्वपूर्ण हमारा वातावरण।…
View More खुद को पहचानिए, ताकि आप खुद ही खुद से महरूम न रह जाएँसड़कों पर इतना शोर, इतनी बदहवासी? आखिर क्यों?
कभी सड़क के किनारे खड़े होकर दो मिनट के लिए अपने फोन की ऑडियो रिकार्डिंग ऑन कर दीजिए। फिर घर पहुँचकर, हाथ-मुँह धोकर, कुछ खा-पीकर…
View More सड़कों पर इतना शोर, इतनी बदहवासी? आखिर क्यों?होरी खेलै नन्द को लाल, मैं वारी-वारी…
आज रंग-पंचमी है। होली के उत्सव का चरम। इस मौके पर एक खूबसूरत कवित्त की कुछ लाइनें देखिए… होरी खेलै नन्द को लाल, मैं वारी-वारी। …
View More होरी खेलै नन्द को लाल, मैं वारी-वारी…देखो न, कैसे मैंने होली मनाई….
सुबह उठा तो सबसे पहले जिस चीज में दिमाग भिड़ाना पड़ा ,वह था आँखों में चुपरा गया काजल। रात में होली जलाकर आने के बाद…
View More देखो न, कैसे मैंने होली मनाई….अनाज की बरबादी : मैं अपने सवाल का जवाब तलाशते-तलाशते रुआसी हो उठती हूँ
जब मैं देखती हूँ लोगों को कचरे में रोज़ खाना फेंकते हुए, तो सोच में पड़ जाती हूँ। क्या भोजन की कीमत सिर्फ कुछ रुपए…
View More अनाज की बरबादी : मैं अपने सवाल का जवाब तलाशते-तलाशते रुआसी हो उठती हूँधन्य है यह त्योहार, जिसमें सब रंग बदलते हैं… जय होली, जियो होली
लखनऊ का चारबाग रेलवे स्टेशन। रोज से लगभग दोगुनी भीड़। हर एक पैर जल्दी-जल्दी अपने गन्तव्य की ओर बढ़ रहा था। टिकट के लिए लगी…
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