पिता जी के जब पैर छूता हूँ, तो वे कहते हैं ‘खुश रहो’। वैसे कभी नहीं पूछा कि ‘आप ‘खुश रहो’ क्यों कहते हो? ‘आयुष्मान…
View More कृतज्ञता हमें वास्तव में मानवीय बना देती हैTag: अपना पन्ना
“अगर मैं एक शब्द में श्रीनिवास रामानुजन को समाना चाहूँ तो कहूँगा, ‘भारतीयता’।”
यह बड़ी अजीब सी बात है कि साहित्यिक होते हुए भी मैं किसी कवि या लेखक की जीवनगाथा पढ़कर उतना द्रवित कभी न हो सका,…
View More “अगर मैं एक शब्द में श्रीनिवास रामानुजन को समाना चाहूँ तो कहूँगा, ‘भारतीयता’।”सुनिए…आप उनको “सुन-भर” लेंगे, तो वे “जी-भर जी” लेंगे
“सर क्या आप मेरी मदद कर सकते हैं?” ऐसा सुनने के बाद मेरे लिए “हाँ” कहना बड़ा ही कठिन होता। फिर भी बहुत आत्मविश्वास से…
View More सुनिए…आप उनको “सुन-भर” लेंगे, तो वे “जी-भर जी” लेंगेप्रकृति मतान्धता का भार ही भारी मन से उठा रही है
आजकल यदि किसी प्रकार कोई परंपरा में निष्ठावान् व्यक्ति हम जैसे ज्ञानलवदुर्विदग्ध के सम्मुखी हो जाए तो क्या मज़ाल कि हम उस व्यक्ति को सुनेंगे।…
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एक ख़ूबसूरत कविता। एक उतनी ही सुकून भरी आवाज़। इन दो कलाकारों में लिखने वाले एक हैं, आशीष मोहन ठाकुर। ये मध्य प्रदेश पुलिस में…
View More परोपकार : फिर भी छपी नहीं किसी अख़बार में अब तक ये ख़बरें…!ख़ुदकुशी के ज्यादातर मामलों में लोग मरना नहीं चाहते… वे बस चाहते हैं कि उनका दर्द मर जाए
अभी 10 सितम्बर को ‘वर्ल्ड सुसाइड प्रिवेंशन डे’ था। यानी ‘विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस’। ऐसे मौकों पर अक्सर चर्चा आत्महत्या के बारे में ही होती…
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बड़ा सरल है ‘चोर’ कहना। कहें भी क्यों न, आखिर ‘चोर’ कहने से कुछ-कुछ अपना सा लगता है। किसी को अपने जैसा पाते हैं तो…
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महाराष्ट्र के पंढरपुर में भगवान विट्ठल के नाम से विष्णुजी का अवतार विराजित है। उनके दर्शनों के लिए पूरे महाराष्ट्र से पैदल यात्रा करते हुए…
View More आषाढ़ी एकादशी : हमेशा बने रहने वाले भक्ति-भाव से भरा भजन, विट्ठल-हरि के लिएजैन धर्म, जिसने भारतीय सनातन का विशिष्ट अंग होकर सार्थकता बनाए रखी
एक सुदर्शन युवा अपना समस्त वैभव, सुख, सुविधाएँ त्याग कर निकल पड़ता है। एक ऐसी खोज में जो सदियों से महान लोग करते आ रहे…
View More जैन धर्म, जिसने भारतीय सनातन का विशिष्ट अंग होकर सार्थकता बनाए रखीनि:शब्द सदा ओ गंगा तुम, गंगा बहती हो क्यूँ!
भूपेन हजारिका के एक गाने की पंक्तियाँ याद आ रही हैं… “निःशब्द सदा ओ गंगा तुम, गंगा बहती हो क्यूँ ” . नारी और नदी,…
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