फिनलैंड। दुनिया का सबसे ख़ुशहाल मुल्क। छोटा सा देश है। आबादी दिल्ली के मुक़ाबले आधे से भी कम। महज़ 55-56 लाख के आस-पास। इसके बावजूद…
View More फिनलैंड ने फिर बताया कि वह दुनिया में सबसे ज़्यादा ख़ुश कैसे रहता हैTag: रोचक-सोचक
‘लोकल’ बहुत सारी चीज़ें सिखाती है, ज़िन्दगी के फ़लसफ़े बताती है
छूटने से ऐन पहले लोकल को किसी तरह दौड़ते-भागते पकड़ लेना, टूटती साँस की डोर को थाम लेने जैसा आभास कराता है। ये लक्ष्य तय…
View More ‘लोकल’ बहुत सारी चीज़ें सिखाती है, ज़िन्दगी के फ़लसफ़े बताती हैगुरु की सीख : नीयत भले जल्द बदल जाए, पर वक़्त के साथ नियति भी बदल ही जाती है
उस रोज़ संगीत दिवस था। तारीख इसी 21 जून की। एक घटना ऐसी हुई कि मुझे महाभारत का एकलव्य-द्रोण-अर्जुन प्रसंग फिर याद आ गया। ऐसी…
View More गुरु की सीख : नीयत भले जल्द बदल जाए, पर वक़्त के साथ नियति भी बदल ही जाती हैएक ने मयूरपंख को परमात्मा का स्मृति-चिह्न बना पूजा और दूजे ने…!
पतित मानस द्वारा समानता की माँग अपनी अनार्यता छिपाने का स्वाँग ही होता है। एक समान अनुभूति होने पर भी इंसान उसका भोग अपने संस्कारों…
View More एक ने मयूरपंख को परमात्मा का स्मृति-चिह्न बना पूजा और दूजे ने…!पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों का अपना संगीत होता है, समय निकालकर सुनिएगा ज़रूर!
संगीत इस सृष्टि की प्राचीनतम भाषा है। जानकार बताते हैं और सनातन ग्रन्थों में भी ऐसा उल्लेख है कि सृष्टि के विकास-क्रम में सबसे पहले…
View More पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों का अपना संगीत होता है, समय निकालकर सुनिएगा ज़रूर!चार लाइनों में सुनिएगा…. पुरुष और स्त्री मन के सोचने के भिन्न तरीकों के बीच बहता जीवन!
पुरुष और स्त्री के सोचने के तरीक़े में फ़र्क होता है। सभी जानते हैं। लेकिन इस अन्तर की गहराई की थाह कुछेक लोग ही ले…
View More चार लाइनों में सुनिएगा…. पुरुष और स्त्री मन के सोचने के भिन्न तरीकों के बीच बहता जीवन!ये हिमाचल का परवाणु है, यहाँ ‘पॉज़िटिविटी’ का परमाणु है!
वैसे तो पूरा हिमाचल प्रदेश ही ख़ूबसूरती की दुशाला (शॉल जैसा वस्त्र) ओढ़े हुए है। लेकिन यहाँ एक जगह है परवाणु। वह अपनी अलग पहचान…
View More ये हिमाचल का परवाणु है, यहाँ ‘पॉज़िटिविटी’ का परमाणु है!‘कर्म आपके पास लौटकर आते हैं’, …रवीन्द्र जाडेजा ने लिखा और देखा भी!
भारतीय क्रिकेट की इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल)-2023 से जुड़ी एक और ख़ास बात। ऐसी, जो हर किसी के काम की है। वाक़ि’आ 20 मई, शनिवार…
View More ‘कर्म आपके पास लौटकर आते हैं’, …रवीन्द्र जाडेजा ने लिखा और देखा भी!आख़िर क्यों बाज़ार में खड़ी कोई कम्पनी कभी भी, ‘परिवार’ नहीं हो सकती?
इस, 15 मई को ‘परिवारों का अंतर्राष्ट्रीय दिवस’ (इंटरनेशनल डे ऑफ फैमिलीज़) मनाया गया। वैसे, इसके अलावा भी एक ‘परिवार दिवस’ यानि ‘फैमिली डे’ मनाया…
View More आख़िर क्यों बाज़ार में खड़ी कोई कम्पनी कभी भी, ‘परिवार’ नहीं हो सकती?आज के ‘रैपर्स’ और उनके चाहने वालों को शास्त्रीय संगीत का ये ‘रैप’ ज़रूर सुनना चाहिए
मौज़ूदा दौर के संगीत की दुनिया में एक लोकप्रिय शैली हुआ करती है ‘रैप’। यानी जिसमें निश्चित लय पर कुछ बोल रखे जाते हैं। ये…
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