महाराज राजगढ़ के समीप पहुँचे। तभी उन्हें अपने पिता की मौत की खबर मिली। साथ ही यह खबर भी कि राजगढ़ पर जिजाऊसाहब सती होने…
View More शिवाजी महाराज : “माँसाहब, मत जाइए। आप मेरी खातिर यह निश्चय छोड़ दीजिए”Tag: सरोकार
शिवाजी महाराज : आखिर क्यों शिवाजी की सेना ने तीन दिन तक सूरत में लूट मचाई?
सूरत को बचाने की कोई सूरत नहीं निकाली इनायतखान ने। उगाही तो खैर दी हो नहीं उसने। पर सूरत की रक्षा के लिए लड़ा भी…
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महाराज ने प्रतापगढ़ पर भवानीदेवी की प्राण-प्रतिष्ठा की (जुलाई 1661)। इधर, बरसात का मौसम होने से पहले ही मुगलों ने देहरीगढ़ को घेर लिया। लेकिन…
View More शिवाजी महाराज : जब शाइस्ता खान की उँगलियाँ कटीं, पर जान बची और लाखों पाएशिवाजी महाराज : “उखाड़ दो टाल इनके और बन्द करो इन्हें किले में!”
कारतलब खान से उगाही के तौर पर महाराज ने बहुत बड़ी रकम वसूल ली। सुरक्षा के लिए नेताजी को वहीं पर छोड़ तान्हाजी, पिलाजी आदि…
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पन्हालगढ़ पर कब्जा पाने के लिए सिद्दी जौहर अब भी जूझ रहा था। उसका प्रतिरोध करने बादशाह अली आदिलशाह मिरज तक आ गया था। स्थिति…
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जौहर ने महाराज को पूरे चार महीने पन्हाला में बन्द रखा था। लेकिन अब उनके अचानक भाग निकलने से उसके दुःख का पार नहीं रहा।…
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कल-कल बहती आषाढ़ की धाराओं के साथ मावलों का खून बह रहा था। एक हो रहा था। उधर, बीच राह की कासारी नदी और नाले-पनाले…
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जासूस छिपकली के पैरों से टोह ले रहे थे। झाड़-झंखाड़ और नालों-पनालों से भरे लम्बे-चौड़े विस्तार में एक जगह पर उनकी नजर रुक गई। वहाँ…
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सिद्दी के घेरे में खड़ीं तोपें पन्हाला पर आग उगल रहीं थीं। लेकिन इससे पन्हाला को कोई क्षति नहीं पहुँची। सिद्दी ने पहचान लिया कि…
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“पन्हालगढ़ स्वराज्य में आ गया। पन्हाला जैसा प्रचंड और बलाढ्य गढ़ मिलने से स्वराज्य की ताकत बढ़ गई। पन्हाला से सटकर एक और छोटा सा…
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