गुरु पूर्णिमा पर स्वरांजलि की ‘पियाली’

भारत की समृद्ध गुरु-शिष्य परम्परा अगर कहीं अब भी अपने श्रेष्ठ स्वरूप (कुछ अगर-मगर छोड़ दें, तो बहुतायत) में है तो वह या तो आध्यात्म…

View More गुरु पूर्णिमा पर स्वरांजलि की ‘पियाली’

मैं उन्हीं लाखों लाशों की तरफ़ से आप से माफ़ी माँगता हूँ

बीते दो-तीन दिनों राज्यसभा के सदस्य प्रोफेसर मनोज झा का सदन में दिया यह भाषण ख़बरिया ( Media) और सामाजिक माध्यमों (Social Media) पर चल…

View More मैं उन्हीं लाखों लाशों की तरफ़ से आप से माफ़ी माँगता हूँ

हम भोजन को भगवान मानते हैं और रोज उनका तिरस्कार करते हैं!

उसका घर कॉलोनी के नुक्कड़ पर है। सामने तीन तरफ़ जाने वाले रास्ते तिकोने से जुड़ते हैं। वहीं एक तरफ़ उस रिहाइश (कॉलोनी) का दरवाज़ा है।…

View More हम भोजन को भगवान मानते हैं और रोज उनका तिरस्कार करते हैं!

क्या हम पर्यावरण जैसे विषय पर इतने गैर-ज़िम्मेदार हैं?

जूही चावला अपने समय की लोकप्रिय अभिनेत्री हैं। उन्होंने अभी हाल ही में दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की थी। समाजसेवी, स्तम्भकार वीरेश…

View More क्या हम पर्यावरण जैसे विषय पर इतने गैर-ज़िम्मेदार हैं?

चरित्र जब पवित्र है, तो क्यूँ है ये दशा तेरी?

साल 2016 में एक फिल्म आई थी, ‘पिंक’। समाज में महिलाओं की व्यथा, उनकी पीड़ा, उनके संघर्ष को दिखाती एक कहानी। इसी फिल्म में एक…

View More चरित्र जब पवित्र है, तो क्यूँ है ये दशा तेरी?

‘आयुष्मान् भव’ या ‘आयुष् मा भव’ यानि ‘चिरायु हों’ अथवा ‘चिरायु न हों’?

ये पहला वीडियो मध्य प्रदेश के भोपाल शहर के ‘आम शख़्स’ योगेश बलवानी का है। और दूसरा शहर के बड़े ‘ख़ास अस्पताल’ चिरायु के प्रबन्धक…

View More ‘आयुष्मान् भव’ या ‘आयुष् मा भव’ यानि ‘चिरायु हों’ अथवा ‘चिरायु न हों’?

हिन्दी, हिंग्लिश, तमिलिश

देश के जाने-माने चित्रकार, कहानीकार, संपादक, आकाशवाणी अधिकारी और टेलीफिल्म निर्माता प्रभु जोशी जी ने इसी चार मई को हमेशा के लिए आँखें बन्द कर…

View More हिन्दी, हिंग्लिश, तमिलिश

एक कहानी ; उम्मीद के दीए की…

  वक़्त मुश्किल है। एक अदृश्य दुश्मन (कोरोना) है, जिसने मानवता के ख़िलाफ़ जंग छेड़ रखी है। हमारे घरों में घुसकर हमारे अपनों को वह…

View More एक कहानी ; उम्मीद के दीए की…

मेट्रोनामाः इस क्रूरतम समय में एक सुन्दरतम घटना

रोज़ाना की तुलना में आज मेट्रो सूनी है। इतना सूनापन डराता है। हालाँकि आज दिल्ली में कर्फ्यू है। लेकिन ज़िन्दगी तो चल ही रही है। कुछ…

View More मेट्रोनामाः इस क्रूरतम समय में एक सुन्दरतम घटना

भेदभावविनाशकं खलु दिव्यभाषा संस्कृतम्

धर्म, जाति, भाषा के नाम पर एक-दूसरे के ख़िलाफ़ खड़े होने की सूचना-सामग्री अथाह है। समाचार माध्यमों और कथित सामाजिक माध्यमों (Social Media) पर ऐसा…

View More भेदभावविनाशकं खलु दिव्यभाषा संस्कृतम्