Dropadi

चीरहरण के कुअवसर पर द्रौपदी का कोप : पूरी और सच्ची कविता यहाँ सुनिए

सोशल मीडिया और मीडिया किस तरह किसी की सामग्री के साथ व्यवहार करता है, यह लोकप्रिय कविता इसका ताज़ा उदाहरण है। चीरहरण के कुअवसर पर…

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Mayavi Amba-23

‘मायावी अंबा और शैतान’ : सुना है कि तू मौत से भी नहीं डरती डायन?

रोजी मैडबुल चुपचाप बैठा हुआ बोतल से घूँट-घूँट पानी पीते हुए उसके माथे के कोने से बह रहे खून को देख रहा था। वह उस…

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Pronounciation

‘संस्कृत की संस्कृति’ : मिलते-जुलते शब्दों का अर्थ महज उच्चारण भेद से कैसे बदलता है!

उच्चारण के महत्त्व को दर्शाता उदाहरण हमने पिछली कड़ी में देखा था कि एक अच्छे पाठक, वक्ता को उसी तरह शब्दों का उच्चारण करना चाहिए…

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Mayavi Amba-22

‘मायावी अंबा और शैतान’ : अच्छा हो, अगर ये मरी न हो!

चूँकि हालात उसकी बर्दाश्त से बाहर थे, उसका दिमाग तरह-तरह के ख्यालों में डूबने-उतराने लगा था। फर्श गीला था। ठंडा और बर्फीला भी। कुछ पलों…

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mantra-uccharan

‘संस्कृत की संस्कृति’ : ‘अच्छा पाठक’ और ‘अधम पाठक’ किसे कहा गया है और क्यों?

पूर्व में हमने देखा कि वर्ण उत्पत्ति की समस्त प्रक्रिया में बुद्धि क्रमश: विकसित होती हुई वाणी के रूप में परिणत होती है। इससे वक्ता…

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Mayavi Amba-21

‘मायावी अंबा और शैतान’ : वह घंटों से टखने तक बर्फीले पानी में खड़ी थी, निर्वस्त्र!

भीड़ हक्का-बक्का होकर उस युवा ‘डायन’ को देख रही थी। वे चाहते थे कि वह रोए। दया की भीख माँगे। जान बख्श देने के लिए…

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Premchand

प्रेमचंद जी के फटे जूते देख परसाईं जी ने लिखा- तुम परदे का महत्त्व नहीं जानते, और हम…

प्रेमचंद का एक चित्र मेरे सामने है। पत्नी के साथ फ़ोटो खिंचा रहे हैं। सिर पर किसी मोटे कपड़े की टोपी, कुर्ता और धोती पहने…

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प्रकृति के प्रति हम कैसे-कितने उत्तरदायी हों, ‘एपल’ कम्पनी के इस वीडियो से सीखें

प्रकृति के प्रति हम कैसे और कितने उत्तरदायी हों? कैसे समझें कि सम्पोषी (सस्टेनेबल) विकास के नाम पर हम जो प्रयास कर रहे हैं, वे…

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Gandhi-Shastri-Jayanti

लोकतंत्र में जैसे ‘नेता’ चाहिए, उसकी मिसालें सिर्फ़ गाँधी-शास्त्री तक क्यों ठहरी है?

लोकतंत्र में जिस तरह के ‘नेता’ होने की परिकल्पना की गई, वे हिन्दुस्तान तो क्या दुनियाभर में दुर्लभ हैं। हर कहीं कुछ अँगुलियों पर गिनने…

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Mayavi Amba-20

‘मायावी अंबा और शैतान’ : उसे अब यातना दी जाएगी और हमें उसकी तकलीफ महसूस होगी

# केंचुली छोड़ना # तथ्य : इंसान जैसी जिंदगी इंसानों को ही नसीब है। तथ्य : ये तय था कि वह ऐसे रास्ते पर बढ़ने…

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