“यह तो कोरा झूठ है। धोखा है ये! अब मैं समझी – वे तुम्हारे आदमी थे, जो झूठ बोलकर हमारे गाँव में आए। और किसलिए?…
View More ‘मायावी अम्बा और शैतान’ : तुम्हारे लोग मारे जाते हैं, तो उसके जिम्मेदार तुम होगेTag: सरोकार
सावधान…ये जो कान में अपन इयरफोन ठूँस लेते हैं न, यह हमें बहरा बना रहे हैं!
इस मार्च महीने की तीन तारीख़ को दुनियाभर में
View More सावधान…ये जो कान में अपन इयरफोन ठूँस लेते हैं न, यह हमें बहरा बना रहे हैं!‘संस्कृत की संस्कृति’ : सुनना बड़ा महत्त्वपूर्ण है, सुनेंगे नहीं तो बोलेंगे कैसे?
सुनना बड़ा महत्त्वपूर्ण कार्य है। सुनेंगे नहीं तो बोलेंगे कैसे? इस लिहाज से कभी सोचा है क्या कि ‘मूक-बधिर’ शब्द युग्म शब्द क्यों है? दरअस्ल,…
View More ‘संस्कृत की संस्कृति’ : सुनना बड़ा महत्त्वपूर्ण है, सुनेंगे नहीं तो बोलेंगे कैसे?‘मायावी अम्बा और शैतान’: ऐसा दूध-मक्खन रोज खाने मिले तो डॉक्टर की जरूरत नहीं
तारा उदास थी। पिछले सात दिनों से उसकी गाय ‘कोरल’ खट्टा सा दूध ही दे रही थी। अक्सर वह फट जाता था। गाँव के बड़े-बुजुर्ग…
View More ‘मायावी अम्बा और शैतान’: ऐसा दूध-मक्खन रोज खाने मिले तो डॉक्टर की जरूरत नहीं‘मायावी अम्बा और शैतान’ : इत्तिफाक पर कमजोर सोच वाले लोग भरोसा करते हैं
“आपके सुझाव में आरोप है, जो बेबुनियाद भी है।” इस बात पर वजन देने के लिए उसने अपनी बंदूक खींच ली। “लेकिन सोचिए कि आप…
View More ‘मायावी अम्बा और शैतान’ : इत्तिफाक पर कमजोर सोच वाले लोग भरोसा करते हैं‘मायावी अम्बा और शैतान’ : जो गैरजिम्मेदार, वह कमजोर कड़ी
पिछले कुछ सालों में उसने अपने दिमाग का कारोबारी कौशल सिर्फ इसी में लगाया था कि कैसे वह अधिक से अधिक कारोबारियों को इस क्षेत्र…
View More ‘मायावी अम्बा और शैतान’ : जो गैरजिम्मेदार, वह कमजोर कड़ी‘मायावी अम्बा और शैतान’ : वह वापस लौटेगी, डायनें बदला जरूर लेती हैं
जितना उसे याद था, रोजी मैडबुल किसी की हत्या की योजना बना रहा था। किसी को मारने में उसे बड़ा मजा आता था। हत्या के…
View More ‘मायावी अम्बा और शैतान’ : वह वापस लौटेगी, डायनें बदला जरूर लेती हैंबेटी के नाम छठवीं पाती : तुम्हारी मुस्कान हर दर्द भुला देती है
प्रिय मुनिया, मेरी गिलहरी, तुम आज पूरे दो साल की हो गई हो। तुम्हें पिछला पत्र तुम्हारे पहले जन्मदिन पर एक साल पहले 27 जनवरी…
View More बेटी के नाम छठवीं पाती : तुम्हारी मुस्कान हर दर्द भुला देती है‘मायावी अम्बा और शैतान’ : वह अचरज में थी कि क्या उसकी मौत ऐसे होनी लिखी है?
अब वह पूरी तरह से उस भैंस की गोद में थी। उसके गाढ़े खून, हडिडयों और अंतड़ियों के पिंजर में जिंदा दफन थी। वह अच्छी…
View More ‘मायावी अम्बा और शैतान’ : वह अचरज में थी कि क्या उसकी मौत ऐसे होनी लिखी है?ये कैसा हिन्दी अनुवाद, जहाँ हिन्दी ही ढूँढनी पड़ जाए?
ये दिल्ली के मशहूर ‘मैक्स’ अस्पताल में लगे सूचना पटल हैं। इन पर लिखी सूचनाओं पर ग़ौर कीजिए। कहने के लिए तो सूचनाएँ हिन्दी और…
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