फिर एक लड़की ने अपने मंगेतर को मार दिया, आखिर माँ-बाप विफल कहाँ हो रहे हैं?

टीम डायरी

फिर एक लड़की ने अपने मंगेतर का कत्ल कर दिया। वह भी प्रेमी के साथ मिलकर। पुणे, महाराष्ट्र का मामला है यह। वहाँ इसी 18 जून को केतन अग्रवाल नाम के एक युवा व्यापारी की मौत हुई थी। वह अपनी मंगेतर के साथ लोहागढ़ किले पर घूमने गया था। वहाँ ऊँचाई से खाई में गिरने के कारण उसकी मौत हो गई। पहले बताया गया कि उसका पैर फिसल जाने से वह गिरा था। लेकिन अब पता चला है कि वास्तव में उसकी मंगेतर ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर उसे धक्का दिया था। क्योंकि वह उसे रास्ते की बाधा समझती थी। उसके साथ शादी नहीं करना चाहती थी। इसलिए उसको अपनी राह से हटाना चाहती थी, और उसने हटा भी दिया। 

उस लड़की ने कितना सोच-समझकर ठण्डे दिमाग से इस वारदात को अंजाम दिया कि किसी को शुरू में संदेह भी नहीं हुआ। घटना के एक दिन बाद अपने जन्मदिन पर उसने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट भी डाली। इसमें उसने केतन के साथ अपने कथित ‘प्रेम’ का इजहार किया। साथ ही उसकी मौत का अफसोस जताया। उसने यह भी दिखाया कि वह तो शादी के लिए पूरी तरह तैयार थी, जबकि यह कोरा झूठ था। सच्चाई यह थी कि उसके मन में उसका प्रेमी ही ठहरा था। उसी के लिए, उसी की मदद से उसने केतन को रास्ते से हटा दिया। बाकी कहानी तमाम समाचार माध्यमों पर मौजूद है कि उसने कैसे, क्या-कुछ किया। पढृी जा सकती है। 

अलबत्ता यह पहला मामला नहीं है इस तरह का। बीते साल इंदौर के कारोबारी राजा रघुवंशी को उसकी दुलहन ने काफी-कुछ इस पुणे मामले की ही तरह मेघालय ले जाकर मार दिया था। उसका प्रेमी भी वारदात में उसके साथ था। मेरठ में भी सौरभ राजपूत नाम के युवक की हत्या की गई थी। उसकी पत्नी ने प्रेमी के साथ मिलकर उसे मारा था। ऐसे और भी मामले सामने आ चुके हैं। इसीलिए यह सवाल उठता है कि आखिर माता-पिता बच्चों की परवरिश के मामले में लगातार विफल क्यों हो रहे हैं और कहाँ? क्योंकि हाँ, यह बच्चों से ज्यादा माता-पिता की विफलता का मामला है। उन्हें भले अभी यह समझ में न आ रहा हो, पर सच यही है। 

ऐसे बच्चे जो चार दिन के प्रेम के लिए किसी की हत्या करने से भी हिचकिचाते, वास्तव में वे माता-पिता की परवरिश पर एक गम्भीर सवाल हैं। हमारे पारिवारिक, सामाजिक मूल्यों में गंभीर पतन का प्रमाण हैं ये। समाज विज्ञान के अध्येताओं, शोधार्थियों को इस पर अध्ययन करना चाहिए। उन्हें पता लगाना चाहिए कि गड़बड़ी कहाँ हो रही है और इसका निदान कैसे व क्या हो सकता है? 

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Neelesh Dwivedi

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