टीम डायरी
इंस्टाग्राम, जैसे सोशल मीडिया मंचों पर प्रसारित ज्ञान और प्रचलित ज्ञानी किस स्तर के ‘अधकचरे’ हैं, इसका ताजा उदाहरण इस वीडियो में है, जो नीचे दिया गया है। संस्कृत के विद्वान नित्यानंद मिश्र जी का यह वीडियो है। इसमें वह एक ऐसे ही सोशल मीडिया के ‘ज्ञानी’ बंधु के ज्ञान की परतें खोल रहे हैं। देखिए।
विषय यह है कि हमारी सनातन संस्कृति के अनुसार, हमारे द्वारा अपने आराध्य के नाम से पहले ‘नम:’ या ‘नमो’ का इस्तेमाल करना सही है या फिर बाद में। और इस ‘नम:’ या ‘नमो’ का सही अर्थ क्या है? क्या इसका अर्थ ‘न मेरा’ जैसा कुछ होता है? वैसे, जो लोग जानते हैं, उन्हें तो पता ही है कि इसका अर्थ नमन् या प्रणाम होता है। मगर जो लोग नहीं जानते, उनके लिए यह वीडियो ‘रोचक-सोचक’, ‘सरोकार’ वाला हो सकता है।
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