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सोशल मीडिया पर विदेश में भारत की गलत छवि दिखाई रही है, इसका कारण यह है कि…

टीम डायरी

सोशल मीडिया पर विदेश में भारत की ‘गलत छवि’ पेश की जा रही है। ऐसा दावा एक ब्रिटिश पर्यटक ने किया है। जैक हीटन नाम है इनका। अभी भारत की यात्रा पर आए हैं। सोशल मीडिया पर अपने बनाए वीडियो आदि डालने का काम करते हैं, पेशेवर तरीके से। इसी से इनकी कमाई होती है। ऐसे लोगों को आज की भाषा में ‘डिजिटल क्रिएटर’ कहा जाता है। लिहाजा, हीटन ने अपनी भारत यात्रा के अनुभव के भी वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाले हैं। इन्हीं में से एक वीडियो में वह चेन्नई के मरीना समुद्र तट पर हैं और वहाँ की खासियतें बता रहे हैं। 

वीडियो में हीटन कह रहे हैं, “सोशल मीडिया ने मुझसे भारत के बारे में पूरी तरह झूठ बोला। मुझे बताया गया कि भारत में सार्वजनिक जगहें अक्सर गंदी होती हैं। जबकि अभी जहाँ मैं हूँ, वह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा समुद्र तट (मरीना) है। और यहाँ दूर-दूर तक गंदगी का नाम-ओ-निशान भी नहीं है। यह वाकई पूरी तरह साफ-सुथरा है। कहीं थोड़ी-बहुत गंदगी हो सकती है। लेकिन पूर्णता में इसे साफ ही कहेंगे। वह भी तब जबकि इस वक्त करीब 10,000 लोग समुद्र तट पर घूम रहे हैं। और पानी देखिए, कितना साफ है। इंग्लैण्ड के किसी समुद्र तट पर इतना साफ पानी नजर नहीं आता। क्या आप मानेंगे कि यह भारत ही है?” हीटन के वीडियो में ऐसी कुछ और बातें भी हैं। 

अलबत्ता, इससे ठीक उलट अनुभव एक अन्य विदेशी पर्यटक ने सोशल मीडिया पर साझा किया है। इनका नाम मार्को रोम्स बताया गया है। ऑस्ट्रेलिया से आए हैं और कलकत्ता की सड़कों पर हुए अनुभव का वीडियो इन्होंने सोशल मीडिया पर डाला है। इसमें आवारा किस्म के लड़के उनके पीछे लगे हैं और उनसे कहते हैं कि उन्हें “एक चुम्बन दे दें।” मार्को कहते हैं, “कितना अजीब है, मुझसे आधी उम्र के लड़के मेरे से छेड़-छाड़ कर रहे हैं।”

दरअसल, इसी तरह की वह समस्याएँ है जिनसे सोशल मीडिया को विदेश में भारत-विरोधी अभियान चलाने का अवसर मिलता है। सोशल मीडिया के विभिन्न मंचों का संचालन करने वाली कम्पनियाँ हैं तो आखिर विदेशी ही। इन्हें भारत की लगातार बढ़ती ताकत से असुरक्षा भी होती ही होगी। ऐसे में, उन्हें बहाना चाहिए होता है कि किसी तरह भारत की छवि को खराब कर सकें। और हम भारतीय खुद, उन्हें इस तरह के बहाने उपलब्ध करा देते हैं। कभी विदेशी पर्यटकों से बदसलूकी कर के तो कभी यहाँ-वहाँ गंदगी फेंककर या छोड़कर। हमें अगर वाकई अपने देश की छवि की चिंता है, तो  ऐसी बुरी आदतों को बदलना होगा। ऐसी आदतों वाले लोगों को रोकना-टोकना होगा। 

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Neelesh Dwivedi

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