प्रतीकात्मक तस्वीर
टीम डायरी
देश के लिए लड़ना, उसके मान-सम्मान की रक्षा करना सिर्फ सेना में तैनात फौजियों का काम नहीं है। देश का हर नागरिक, भले वह महिला हो या पुरुष, युवा हो या वृद्ध, इस काम में अपना योगदान दे सकता है। बल्कि देना चाहिए। सही मायने में तभी हिन्दुस्तान दुनिया में गर्व के साथ सिर उठाकर खड़े होने वाले मुल्क के रूप में पहचाना जा सकता है। अब यहाँ कोई पूछ सकता है कि वह कैसे अपने हिस्से का योगदान दे?
तो उत्तर के लिए नीचे दिया गया वीडियो देखिए। यह वीडियो इटली के रोम शहर का है। वहाँ कुछ भारतीय महिलाएँ घूमने गईं। बीच में एक रेस्त्राँ में रुकीं और नाश्ता-पानी किया। तभी किसी बात पर वहाँ के बैरे (वेटर) से उनकी बहस हो गई। यहाँ तक तो चलिए कोई बात नहीं। ऐसा हो जाता है कभी-कभी। मगर तभी उस बैरे ने अपना नफरती चेहरा दिखा दिया क्योंकि वह बाँग्लादेशी मुस्लिम था और हिन्दुस्तान के प्रति उसके विचार दूषित थे यकीनन।
उस बैरे ने बहस के दौरान हिन्दुस्तान के लिए अपशब्दों का प्रयोग कर दिया। बस, फिर क्या था। जो मामला ‘थोड़े’ में निपट सकता था, उसने तूल पकड़ लिया। क्योंकि हिन्दुस्तानी महिलाओं को अपने देश का अपमान बर्दाश्त नहीं हुआ। उन्होंने उस बैरे को जमकर लताड़ लगाई। इस बीच, स्थानीय पुलिस के दो जवान भी आ गए। उनकी मौजूदगी में उन हिन्दुस्तानी महिलाओं ने ‘बदतमीज बैरे’ से जब तक कैमरे के सामने स्पष्ट रूप से माफी नहीं मँगवा ली, तब तक उन्होंने चैन नहीं लिया। उसके द्वारा माफी माँग लेने के बाद ही मामला शांत हुआ।
बस, ऐसे ही जज्बे के साथ हर भारतीय देश के सम्मान की रक्षा के लिए अपने हिस्से का योगदान दे सकता है। जब, जहाँ, जैसा मौका लगे, उसी के मुताबिक देशहितैषी अपनी भावना का परिचय दे सकता है।
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