जानवरों के भी हुक़ूक हैं, उनका ख़्याल रखिए

ज़ीनत ज़ैदी, शाहदरा, दिल्ली

आज ज़्यादातर लोग नौकरी या किसी और सिलसिले में अपने घर और अपनों से दूर दूसरे शहरों में रहते हैं। इसी कारण अकेलेपन से पीछा छुड़ाने के लिए घरों में पालतू जानवर भी रखते हैं। लेकिन क्या ये बेज़ुबान जानवर सिर्फ हमारा अकेलापन दूर करने के लिए बने हैं? या उनके कुछ हुक़ूक भी हैं हमारे ऊपर?

दुनिया की कोई भी मख़्लूक़ (सृष्टि की रचना) बेवज़ह नहीं होती, बल्कि हर एक का एक अलग मक़सद होता है। उसकी एहमियत होती है। जैसे- छोटी सी मधुमक्खी, जो शहद देती। एक कीड़ा, जो रेशम उगलता है। ऐसे ही खेत जोतने वाला बैल हो या हिफ़ाज़त करने वाला कुत्ता। अंडे देने वाली मुर्गी हो या दूध देने वाली गाय, भैंस। तमाम जानवर किसी न किसी तरह इंसानों की मदद करते आए हैं। लेकिन फिर भी लोग इन जानवरों को नाचीज़ ही मानते हैं। और अपने काम का या अपने साथ हुई ज़्यादती का बदला बेज़ुबान जानवरों पर निकाल देते हैं।

पर ज़रा सोचिए, ये जानवर हमसे चाहते क्या हैं? सिर्फ़ थोड़ा सा वक़्त और प्यार ही न? अगर हम अपने धर्मो की मुकद्दस किताबो पर नज़र डालें तो उनमें भी साफ़ लिखा मिलेगा कि जानवर के साथ बुरे तरीक़े से पेश आना ठीक वैसा ही है, जैसे किसी इंसान के साथ बुरा सुलूक करना। इसीलिए एक संज़ीदा ख़्याल ये है कि अगर कोई जानवर पाले और उसकी परवरिश ठीक से न कर पाए, तो बेहतर है कि उस बेज़ुबान को आज़ाद कर दिया जाए।

ये ख़्याल इस वक़्त इसलिए आया क्योंकि अभी सोशल मीडिया पर ऐसे तमाम मसले सामने आ रहे हैं, जिनमें लोग जानवरों को बुरी तरह पीड़ित कर रहे हैं। मसलन- अभी हाल ही में एक ख़बर ज़ोर-शोर से आई कि नोएडा में एक आदमी अपने पालतू कुत्ते के साथ बेरहमी से पेश आया। तो मन में सवाल उठा कि क्या इस बर्ताव को इंसानी कहा जा सकता है? बिल्कुल नहीं। बल्कि सच्चाई तो ये है कि इंसान का मुखौटा पहने इस किस्म के लोग समाज में ग़ैरइंसानी सुलूक कर माहौल ख़राब कर रहे हैं। पूरी इंसानी क़ौम को बदनाम कर रहे हैं।

जबकि हमें समझना होगा कि ये जानवर भी हमारी ज़िन्दगियों का अहम हिस्सा हैं। इनके बगैर इंसानी ज़िन्दगी के बारे में सोचा भी नहीं जा सकता। चाहे हम इनकी ज़रूरत महसूस करें या करें। पर सच्चाई तो यही है। इसीलिए हमें इनका ख़्याल रखना ही चाहिए। ज़्यादा नहीं तो कम से अपनी भलाई के लिए ही सही।  

जय हिन्द। 
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(ज़ीनत #अपनीडिजिटलडायरी के सजग पाठक और नियमित लेखकों में से हैं। दिल्ली के आरपीवीवी, सूरजमलविहार स्कूल में 11वीं कक्षा में पढ़ती हैं। लेकिन इतनी कम उम्र में भी अपने लेखों के जरिए गम्भीर मसले उठाती हैं। वे अपने आर्टिकल सीधे #अपनीडिजिटलडायरी के ‘अपनी डायरी लिखिए’ सेक्शन या वॉट्स एप के जरिए भेजती हैं।)
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