अर्जुनसिंह ने राजीव गांधी को क्लीन चिट देकर राजनीतिक वफादारी का सबूत पेश कर दिया!

विजय मनोहर तिवारी की पुस्तक, ‘भोपाल गैस त्रासदी: आधी रात का सच’ से, 2/6/2022

कानूनी विशेषज्ञ कहते हैं कि वर्तमान फैसले के खिलाफ सरकार की ओर से रिवीजन और अपील सत्र न्यायाधीश सुभाष काकड़े की अदालत में पेश हो चुकी है। सत्र न्यायाधीश इस मामले में बौरासी द्वारा तय किए गए आरोपों को ध्यान में रखते हुए मामले को सजा और जुर्माने की रकम बढ़ाने के लिए सीजेएम कोर्ट को रिमांड कर सकते हैं। इसके बाद सीजेएम कोर्ट जुर्माने और सजा पर दिए गए पुराने फैसले को बदलकर नया फैसला सुना सकती है।…

तीन अगस्त 2010, मंगलवार गैस कांड को लेकर सीबीआई ने क्यूरेटिव पिटीशन अब दायर की है।… पिटीशन में 1996 के सुप्रीम कोर्ट के उस विवादित फैसले पर पुनर्विचार की मांग की गई है, जिसमें यूका और इसके अधिकारियों के खिलाफ धाराएं हल्की कर दी गई थीं।

अटार्नी जनरल जीई वाहनवती द्वारा मंजूर की गई 71 पेज की इस बहुप्रतीक्षित क्यूरेटिव पिटीशन में कहा गया कि न्याय देने में भारी चूक हुई हैं। 13 सितंबर 1996 को तत्कालीन चीफ जस्टिस अहमदी के नेतृत्व वाली बेंच ने आईपीसी की धारा 304 पार्ट-2 के तहत लगे नरसंहार के आरोप को धारा 304 ए यानी लापरवाही से मौत में बदल दिया था। इसके तहत अधिकतम दो साल की सजा हो सकती है, जबकि पहले वाली धारा के तहत 10 साल तक की सजा हो सकती है।…

सात अगस्त 2010…देश की सबसे बड़ी अदालत ने गैस त्रासदी मामले में न्याय की धीमी प्रक्रिया पर असंतोष जताया है।…. शीर्ष कोर्ट ने कहा, ‘यह मामला निपटाने में निचली अदालत को 25 वर्ष लगे। इसके बाद इस मामले में हाईकोर्ट में अपील होगी, जहां 15 वर्ष और लगेंगे। इसके बाद यह सुप्रीम कोर्ट में आएगा तथा 10 वर्ष और लग जाएंगे। इतने समय में तो तमाम पीड़ित मर जाएंगे।’ जस्टिस मार्कडेय काटजू और जस्टिस टीएस ठाकुर की बेंच ने ये टिप्पणियां 24 वर्ष पुराने एक दीवानी मामले में विशेष अनुमति याचिका को नामंजूर करते हुए कीं।

…..जांच एजेंसी ने शीर्ष कोर्ट से आग्रह किया है कि वह त्रासदी के मामले में अपने 14 वर्ष पुराने फैसले पर पुनर्विचार करे। मुजरिमों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या की धारा के तहत आरोप पुनः लगाए जाएं ताकि उन्हें 10 वर्ष तक की जेल हो सके। …बेंच ने चार्ल्स डिकंस के उपन्यास का हवाला भी दिया। इसमें दो परिवारों के बीच मुकदमा एक सदी से भी अधिक समय तक चलता है। बेंच ने कहा, ‘हमारा देश भी वैसा ही होता जा रहा है। यहाँ मामलों को खींचा जाता है।’ ….

12 अगस्त 2010, गुरुवार। भोपाल गैस त्रासदी पर लगभग 26 साल बाद संसद के दोनों सदनों में बहस हुई। तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुनसिंह ने भी चुप्पी तोड़ी। पूरे दिन आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता रहा। बहस से अगर कोई गायब था तो वह है लाखों पीड़ितों का दर्द। जनता के नुमाइंदों को इस बात की फिक्र नहीं है कि पीड़ितों को आज भी प्रदूषित पानी मिल रहा है। वे इलाज के लिए भटक रहे हैं या फिर जहरीले कचरे का निपटान अभी भी भोपाल के लिए एक बड़ी चुनौती है। विपक्ष शुरू से अंत तक सत्ता पक्ष को कोसता नजर आया, तो अर्जुनसिंह ने राज्यसभा में राजीव गांधी को क्लीन चिट देकर अंतत: अपनी राजनीतिक वफादारी का सबूत पेश कर दिया….

मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह ने बुधवार को राज्यसभा में त्रासदी पर चर्चा के दौरान सांकेतिक रूप से यह माना। उन्होंने कहा, ‘मुझे मुख्य सचिव ने बताया कि गृह मंत्रालय से लगातार फोन आ रहा है कि एंडरसन को जमानत दे दी जाए। मैंने उनसे कहा कि वे अगर ऐसा चाहते हैं तो कर दीजिए, लेकिन गिरफ्तारी रिकार्ड पर होनी चाहिए।’

अर्जुन ने वादे के मुताबिक लंबे समय बाद मौन तोड़ा। वफादारी निभाते हुए उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी को क्लीन चिट देने की कोशिश की और सारा दोष तब के गृहमंत्री पीवी नरसिंहराव पर मढ़ दिया। उन्होंने कहा, जब मैंने एंडरसन की गिरफ्तारी की जानकारी राजीव गांधी को दी तो उन्होंने तनिक भी सहानुभूति नहीं दिखाई। उन्होंने इतना भर कहा कि इस संबंध में अगली बैठक में बात करेंगे। व्हील चेयर पर दो सहायकों के साथ राज्यसभा पहुंचे वरिष्ठ कांग्रेसी नेता के ऊपर सत्ता पक्ष और विपक्ष सभी की निगाहें थीं। उनके बयान के समय सदन में चुप्पी छा गई। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, एंडरसन को पूरी तरह मैंने अपनी जिम्मेदारी पर गिरफ्तार किया था। इस फैसले की जानकारी भी मैंने किसी को नहीं दो थी। मुझे आज भी एंडरसन को गिरफ्तार करने के फैसले पर गर्व है।…

अर्जुन ने मौजूदा नेतृत्व की एंडरसन के प्रत्यर्पण की कोशिशों का समर्थन करते हुए पीड़ितों को यूनियन कार्बाइड से मुआवजा देने का मसला अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के सामने उठाने की मांग भी इशारों में कर डाली। उन्होंने कहा, मैंने तो सुना है कि ओबामा ने कहा है कि कोई उनसे इस बारे में बात तो करे। मैंने अखबारों में पढ़ा है कि वे नवंबर में भारत आ रहे हैं।

अर्जुन ने कहा कि उन्होंने हादसे के चार दिन बाद एंडरसन के भोपाल पहुंचने पर उसकी गिरफ्तारी आदेश दे दिए थे। हिरासत में आने के बाद वह यही सवाल करता रहा, मुख्यमंत्री मुझे लेने नहीं आए। सिंह ने कहा, आप उस व्यक्ति के अहंकार की कल्पना कर सकते हैं। लगता है अर्जुनसिंह की याददाश्त भी मौके के मुताबिक तत्कालीन डीजीपी मुखर्जी की तरह धुंधला रही है। आज एंडरसन के अहंकार पर यह टिप्पणी करने वाले अर्जुनसिंह भूल गए हैं कि इसी अहंकारी शख्स के बारे में अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिसंबर 1984 में वे बहुत इज्जत से कह रहे थे कि मेरी मंशा एंडरसन को तंग करने की नहीं थी। यह उन्होंने तब कहा था, जब उसे सरकारी विमान से सुरक्षित दिल्ली भेज दिया गया था। कलेक्टर-एसपी को उसकी सेवा में लगाकर सरकारी विमान मुहैया कराने वाला कोई अमेरिकी शख्स नहीं था, यहीं माननीय अर्जुनसिंह ही थे।
(जारी….)
——
(नोट : विजय मनोहर तिवारी जी, मध्य प्रदेश के सूचना आयुक्त, वरिष्ठ लेखक और पत्रकार हैं। उन्हें हाल ही में मध्य प्रदेश सरकार ने 2020 का शरद जोशी सम्मान भी दिया है। उनकी पूर्व-अनुमति और पुस्तक के प्रकाशक ‘बेंतेन बुक्स’ के सान्निध्य अग्रवाल की सहमति से #अपनीडिजिटलडायरी पर यह विशेष श्रृंखला चलाई जा रही है। इसके पीछे डायरी की अभिरुचि सिर्फ अपने सामाजिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक सरोकार तक सीमित है। इस श्रृंखला में पुस्तक की सामग्री अक्षरश: नहीं, बल्कि संपादित अंश के रूप में प्रकाशित की जा रही है। इसका कॉपीराइट पूरी तरह लेखक विजय मनोहर जी और बेंतेन बुक्स के पास सुरक्षित है। उनकी पूर्व अनुमति के बिना सामग्री का किसी भी रूप में इस्तेमाल कानूनी कार्यवाही का कारण बन सकता है।)
——
श्रृंखला की पिछली कड़ियाँ  
39. यह सात जून के फैसले के अस्तित्व पर सवाल है! 
38. विलंब से हुआ न्याय अन्याय है तात् 
37. यूनियन कार्बाइड इंडिया उर्फ एवर रेडी इंडिया! 
36. कचरे का क्या….. अब तक पड़ा हुआ है 
35. जल्दी करो भई, मंत्रियों को वर्ल्ड कप फुटबॉल देखने जाना है! 
34. अब हर चूक दुरुस्त करेंगे…पर हुजूर अब तक हाथ पर हाथ धरे क्यों बैठे थे? 
33. और ये हैं जिनकी वजह से केस कमजोर होता गया… 
32. उन्होंने आकाओं के इशारों पर काम में जुटना अपनी बेहतरी के लिए ‘विधिसम्मत’ समझा
31. जानिए…एंडरसरन की रिहाई में तब के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री की क्या भूमिका थी?
30. पढ़िए…एंडरसरन की रिहाई के लिए कौन, किसके दबाव में था?
29. यह अमेरिका में कुछ खास लोगों के लिए भी बड़ी खबर थी
28. सरकारें हादसे की बदबूदार बिछात पर गंदी गोटियां ही चलती नज़र आ रही हैं!
27. केंद्र ने सीबीआई को अपने अधिकारी अमेरिका या हांगकांग भेजने की अनुमति नहीं दी
26.एंडरसन सात दिसंबर को क्या भोपाल के लोगों की मदद के लिए आया था?
25.भोपाल गैस त्रासदी के समय बड़े पदों पर रहे कुछ अफसरों के साक्षात्कार… 
24. वह तरबूज चबाते हुए कह रहे थे- सात दिसंबर और भोपाल को भूल जाइए
23. गैस हादसा भोपाल के इतिहास में अकेली त्रासदी नहीं है
22. ये जनता के धन पर पलने वाले घृणित परजीवी..
21. कुंवर साहब उस रोज बंगले से निकले, 10 जनपथ गए और फिर चुप हो रहे!
20. आप क्या सोचते हैं? क्या नाइंसाफियां सिर्फ हादसे के वक्त ही हुई?
19. सिफारिशें मानने में क्या है, मान लेते हैं…
18. उन्होंने सीबीआई के साथ गैस पीड़तों को भी बकरा बनाया
17. इन्हें ज़िन्दा रहने की ज़रूरत क्या है?
16. पहले हम जैसे थे, आज भी वैसे ही हैं… गुलाम, ढुलमुल और लापरवाह! 
15. किसी को उम्मीद नहीं थी कि अदालत का फैसला पुराना रायता ऐसा फैला देगा
14. अर्जुन सिंह ने कहा था- उनकी मंशा एंडरसन को तंग करने की नहीं थी
13. एंडरसन की रिहाई ही नहीं, गिरफ्तारी भी ‘बड़ा घोटाला’ थी
12. जो शक्तिशाली हैं, संभवतः उनका यही चरित्र है…दोहरा!
11. भोपाल गैस त्रासदी घृणित विश्वासघात की कहानी है
10. वे निशाने पर आने लगे, वे दामन बचाने लगे!
9. एंडरसन को सरकारी विमान से दिल्ली ले जाने का आदेश अर्जुन सिंह के निवास से मिला था
8.प्लांट की सुरक्षा के लिए सब लापरवाह, बस, एंडरसन के लिए दिखाई परवाह
7.केंद्र के साफ निर्देश थे कि वॉरेन एंडरसन को भारत लाने की कोशिश न की जाए!
6. कानून मंत्री भूल गए…इंसाफ दफन करने के इंतजाम उन्हीं की पार्टी ने किए थे!
5. एंडरसन को जब फैसले की जानकारी मिली होगी तो उसकी प्रतिक्रिया कैसी रही होगी?
4. हादसे के जिम्मेदारों को ऐसी सजा मिलनी चाहिए थी, जो मिसाल बनती, लेकिन…
3. फैसला आते ही आरोपियों को जमानत और पिछले दरवाज़े से रिहाई
2. फैसला, जिसमें देर भी गजब की और अंधेर भी जबर्दस्त!
1. गैस त्रासदी…जिसने लोकतंत्र के तीनों स्तंभों को सरे बाजार नंगा किया! 

सोशल मीडिया पर शेयर करें
Neelesh Dwivedi

Share
Published by
Neelesh Dwivedi

Recent Posts

जनगणना हो रही है, जनसंख्या बढ़ रही है और आंध्र में आबादी बढ़ाने वालों को ‘इनाम’!

देश में जनगणना होने वाली है। मतलब जनसंख्या कितनी है और उसका स्वरूप कैसा है,… Read More

18 hours ago

एक यात्रा, दो मुस्लिम ड्राइवर और दोनों की सोच….सूरत-ए-हाल गौरतलब!

अभी एक तारीख को किसी जरूरी काम से भोपाल से पन्ना जाना हुआ। वहाँ ट्रेन… Read More

3 days ago

सेवा-तीर्थ में ‘भारतीय भाषाओं’ की सेवा नहीं हुई, आगे शायद ही हो!! वीडियो से समझिए!

भारत के प्रधानमंत्री कार्यालय के नए परिसर का उद्घाटन 13 फरवरी 2026 को हुआ। इसे… Read More

6 days ago

भ्रष्ट-आचार अब एक शिष्ट-विचार, इसे खत्म करना मुश्किल, दो उदाहरणों से समझिए कैसे?

‘भ्रष्ट’ का अर्थ है- जब कोई अपने धर्म (कर्तव्य-पथ) से दूर हट जाए और ‘आचार’… Read More

7 days ago

ईस्ट इण्डिया कम्पनी फिर ‘दफन’, और ‘गुलाम-सोच’ लिखती है- “सूरज डूब गया”!

ऐसी सूचना है कि अंग्रेजों की ईस्ट इण्डिया कम्पनी फिर दिवालिया हो गई और उसका… Read More

1 week ago