प्रतीकात्मक तस्वीर
टीम डायरी
ये लीजिए, देश जाने-माने संस्कृत विद्वान नित्यानंद मिश्र जी का एक और वीडियो। इसमें उन्होंने उस अखबार की समझ और सोच को उजागर किया है, जो खुद को ‘देश का सबसे बड़ा हिन्दी समाचार पत्र’ बताता है। अखबार जो दावा करता है कि वह विश्वसनीयता के मापदण्डों पर खरा उतरता है। वही अखबार भाषा और संस्कृति के नाम पर ‘झूठ’ परोसने से हिचकता नहीं। कैसे? इसके लिए नित्यानंद जी का वीडियो देखिए, नीचे दिया गया है।
वीडियो के अंत में नित्यानंद जी कहते हैं, “सच्ची बात बेधड़क का ढोल पीटने वाले अखबार ने बेधड़क नौ झूठे नाम छापे और उन्हें देवी-देवताओं से जुड़ा बताया। लेकिन अब (झूठ पकड़ा जाने के बाद) उसे चाहिए वह बेधड़क एक शुद्धि पत्र भी छापे।” हालाँकि इस अखबार से ऐसे किसी शुद्धि पत्र की उम्मीद नहीं की जा सकती, न ही सोचा जा सकता है कि वह सार्वजनिक रूप से अपनी गलती मानेगा या माफी माँगेगा। फिर भी यदि वह (अनापेक्षित रूप से) ऐसा करता है, तो विश्वसनीयता के उसके दावे को एकाध प्रतिशत बल जरूर मिल सकता है।
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