मध्य प्रदेश में बस संचालकों ने दो मार्च से अनिश्चितकाल की हड़ताल घोषित की है।
श्याम सुन्दर शर्मा, भोपाल मध्य प्रदेश
आज, 25 फरवरी 2026 की सुबह एक बड़े स्थानीय अखबार में हास्यास्पद-सा समाचार पढ़ा। इसमें बताया गया कि मध्यप्रदेश के सार्वजनिक परिवहन क्षेत्र की यातायात व्यवस्था से जुड़े बस-संचालक दो मार्च यानि ठीक होली के त्योहार के दिन से अनिश्चितकालीन हड़ताल करेंगे। क्यों? क्योंकि उन्हें सरकार की प्रस्तावित नई परिवहन नीति पर ऐतिराज है। हालाँकि, परिवहन विभाग की ओर से अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। जानकार बताते हैं कि विभाग के अधिकारी बस-संचालकों से बातचीत कर हड़ताल टलवाने का प्रयास कर रहे हैं।
यहाँ शुरू में ही बता दें कि मध्य प्रदेश सरकार ने दो जनवरी 2005 को राज्य सड़क परिवहन निगम को बंद करने का फैसला किया था। इसके बाद 30 जून 2010 से सार्वजनिक यातायात सेवा उपलब्ध कराने का एकाधिकार निजी बस-संचालकों को दिया गया। इस व्यवस्था के तहत प्रदेश में करीब 28,000 बसें चल रही हैं। इनमें रोज डेढ़ लाख से अधिक यात्री सफर करते हैं। हर बस के साथ चालक सहित तीन कर्मचारी रहते हैं। यानि कुल 85,000 करीब। इन सबको होली के त्योहार के ऐन मौके पर निजी बस-संचालक परेशानी में डालना चाहते है।
इसीलिए यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि आखिर इस नई परिवहन नीति में ऐसा क्या है, जो निजी बस-संचालकों ने इस तरह का कदम उठाने का विचार किया? इसका सीधा सा जवाब यह है कि प्रदेश की मौजूदा सरकार राज्य सड़क परिवहन निगम को पुनर्जीवित करने की तैयारी कर रही है। इसके तहत आगामी अप्रैल महीने से निगम की बसों की सुलभ, सुगम, और बिना लाभ-हानि वाली सस्ती सेवा यात्रियों को मिल सकती है।
निजी बस-संचालकों की परेशानी सीधे तौर पर इसी बात से जुड़ी है। उनका आरोप भी है कि उनकी बसों के अनुज्ञा पत्र (परमिट) के नवीनीकरण, आदि में भेदभाव किया जा रहा है। परिवहन विभाग उनके लिए आवंटित मार्गों को सीमित कर रहा है। नगर परिवहन की बसों को प्राथमिकता दे रहा है।
यहाँ मेरा सवाल है कि आखिर इसमें गलत क्या है? देश के करीब-करीब हर राज्य में राज्य सड़क परिवहन निगम की बसें आम जनता को सस्ती परिवहन सेवा मुहैया करा रही हैं। मध्य प्रदेश में अगर सरकार फिर से यह सेवा शुरू करना चाहती है, तो यह आम जनता के लिए अच्छा ही कहा जाएगा न? इसमें निजी बस-संचालकों को आपत्ति क्यों है? उनकी बसें तो फिर भी चलती ही रहने वाली हैं।
मेरा ख्याल है कि उनकी आपत्ति का कारण सिर्फ इतना है कि निगम की बसें सड़कों पर उतरने के बाद निजी-बस संचालकों का एकाधिकार खत्म हो जाएगा। उनके मोटे-मुनाफे को चोट पहुँचेगी। इसीलिए वे सीनाजोरी पर उतर आए हैं। सरकार को उन्हें इसकी गुंजाइश कतई नहीं देनी चाहिए।
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(नाेट : एक बार करोड़ों के घाटे में पटक कर बन्द किए गए और अब करोड़ों रुपए लगाकर फिर शुरू किए जा रहे मध्य प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के कर्मचारी नेता रहे हैं श्याम सुन्दर शर्मा। उन्होंने #अपनीडिजिटलडायरी को व्हाट्सएप सन्देश के माध्यम से यह लेख भेजा है। वे लगातार जनसामान्य से जुड़े मुद्दों पर अपने विचार व्यक्त करते रहते हैं।)
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