अभी कुछ दिन पहले की बात है। दिल्ली के बड़े अस्पताल में किसी मित्र के साथ जाना हुआ। वहाँ डॉक्टर के इंतिज़ार में एक माँ…
View More हमारा समाज ‘मदर केयर’ की बात करता है, ‘मदर की कदर’ नहीं करता…, करनी चाहिएCategory: चुनिन्दा पन्ने
‘मायावी अम्बा और शैतान’ : हाय हैंडसम, सुना है तू मुझे ढूँढ रहा था!
डेविल स्पिट ऐसी जगह थी, जहाँ तमाम अनैतिक धंधे होते थे। नशेबाजी, वैश्यावृत्ति, जुआखोरी, सट्टेबाजी, सब। ऐसा शायद ही कोई गैरकानूनी काम हो, जो वहाँ…
View More ‘मायावी अम्बा और शैतान’ : हाय हैंडसम, सुना है तू मुझे ढूँढ रहा था!‘प्लवक’ हमें साँसें देते हैं, उनकी साँसों को ख़तरे में डालकर हमने अपने गले में फ़न्दा डाला!
कक्षा 12वीं की अंग्रेजी की किताब का एक चैप्टर है, ‘द एंड ऑफ द अर्थ’। यह हमें बताता है कि किस प्रकार मनुष्य की गतिविधियाँ…
View More ‘प्लवक’ हमें साँसें देते हैं, उनकी साँसों को ख़तरे में डालकर हमने अपने गले में फ़न्दा डाला!‘मायावी अम्बा और शैतान’ : “मुझे डायन कहना बंद करो”, अंबा फट पड़ना चाहती थी
अंबा नहीं जानती थी कि वह इस पर कैसे प्रतिक्रिया दे। कोई उसके बारे में बड़ी आसानी से इतनी अधिक जानकारी कैसे रख सकता है?…
View More ‘मायावी अम्बा और शैतान’ : “मुझे डायन कहना बंद करो”, अंबा फट पड़ना चाहती थीक्या उदारवाद के स्वयंभू ठेकेदार अब खुद अपने ही जाल में फँस रहे हैं?
आईवी लीग यूनिवर्सिंटीज (अमेरिका के आठ निजी विश्वविद्यालयों का समूह) से शुरू हुए यहूदी विरोध और फलिस्तीन समर्थकों के प्रदर्शन ने अब अमेरिका के शिक्षा…
View More क्या उदारवाद के स्वयंभू ठेकेदार अब खुद अपने ही जाल में फँस रहे हैं?मायावी अम्बा और शैतान : केवल डायन नहीं, तुम तो लड़ाकू डायन हो
हालाँकि अंबा को वह कुछ विचित्र सी सुंदर लगी। उसकी आँखों में गहरी और उग्र नारंगी डोरियाँ तैरती थीं। मानो, आग की बारीक सी लपटें…
View More मायावी अम्बा और शैतान : केवल डायन नहीं, तुम तो लड़ाकू डायन होविश्व पृथ्वी दिवस : प्लास्टिकयुक्त होकर प्लास्टिकमुक्त कैसे होगा हमारा प्लेनेट?
“सर प्लास्टिकमुक्त अभियान का क्या मतलब है? क्या कल से हम कोई प्लास्टिक की चीजें इस्तेमाल नहीं करेंगे?”, कक्षा में एक बच्चे ने अपने शिक्षक…
View More विश्व पृथ्वी दिवस : प्लास्टिकयुक्त होकर प्लास्टिकमुक्त कैसे होगा हमारा प्लेनेट?ध्यान से देखिए वीडियो, ऐसे ही न जाने कितने लोग पर्दे के पीछे से हमारी मदद कर जाते हैं
जीवन में सफलता के दम्भ में चूर लोग अक्सर दावा किया करते हैं कि उन्होंने “जो भी मक़ाम हासिल किया अपने दम पर किया”, “ज़िन्दगी…
View More ध्यान से देखिए वीडियो, ऐसे ही न जाने कितने लोग पर्दे के पीछे से हमारी मदद कर जाते हैंहम कैसे इतने अधर्मी और असंवेदनशील बना दिए गए?
घर के सामने रहने वाली पांडे ताईजी ने रोज की तरह सुबह उठकर घर के कोने पर आकर एक डलिया रख दी। कुछ देर बाद…
View More हम कैसे इतने अधर्मी और असंवेदनशील बना दिए गए?मायावी अम्बा और शैतान : भाई को वह मौत से बचा लाई, पर निराशावादी जीवन से….
अंबा के दु:स्वप्नों का सिलसिला तभी से शुरू हो गया था, जब वह पैदल चल रही थी। उस वक्त उसने खुद को न जाने कैसे-कैसे…
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