अदालत का फैसला हो चुका है। सरकारों की चाल-ढाल भी देख ली गई है। कमियों, खामियों, अनदेखियों और मनमानियों का यह पिटारा अनंत है। हो…
View More बाहर कोई और आया, यह बताने कि बच्चे के अब्बा अस्पताल में हैं…Category: चुनिन्दा पन्ने
यह हमारी सरकारों की अंतहीन आपराधिक अनदेखी है
भोपाल ग्रुप फॉर इन्फॉर्मेशन एंड एक्शन के सतीनाथ षड़ंगी। भोपाल के फोटोग्राफरों को उनकी पीठ पर पड़े डंडों का नजारा याद है। पीड़ितों की आवाज…
View More यह हमारी सरकारों की अंतहीन आपराधिक अनदेखी हैसिर्फ तीन शख्सियतों ने गैस पीड़ितों के प्रति मानवीय संवेदनशीलता दिखाई
भोपाल गैस पीड़ित महिला उद्योग संगठन के संयोजक हैं अब्दुल जब्बार (उनका नवंबर 2019 में देहांत हो चुका है)। देश-दुनिया में एक जाना माना नाम।…
View More सिर्फ तीन शख्सियतों ने गैस पीड़ितों के प्रति मानवीय संवेदनशीलता दिखाईसरकार स्वर्णिम मध्यप्रदेश का नारा दे रही है, मुझे हंसी आती है
गैस पीड़ित निराश्रित पेंशनभोगी संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष बालकृष्ण नामदेव की कहानी भी दिलचस्प है। जिंदगी किस मोड़ से लाकर कहां छोड़ जाए कौन जानता…
View More सरकार स्वर्णिम मध्यप्रदेश का नारा दे रही है, मुझे हंसी आती हैफ़र्क पड़ना चाहिए जनाब, जानवरों को भी फ़र्क पड़ता है!
छोटा सा वीडियो है। सिर्फ 35 सेकेंड का। लेकिन यह पूरी एक कहानी कहता है। ज़िन्दगी को देखने का नज़रिया पेश करता है। यूँ कि…
View More फ़र्क पड़ना चाहिए जनाब, जानवरों को भी फ़र्क पड़ता है!सरकार घबराई हुई थी, साफतौर पर उसकी साठगांठ यूनियन कार्बाइड से थी!
जनवरी 1985। नए साल के तीसरे दिन करीब दस हजार लोगों ने मुख्यमंत्री निवास को घेरा। टीला जमालपुरा से लंबा मार्च करके ये लोग आए…
View More सरकार घबराई हुई थी, साफतौर पर उसकी साठगांठ यूनियन कार्बाइड से थी!‘भारतीय गुरुकुल व्यवस्था हम भूल गए, दुनिया के कई देशों ने अपना ली’
“पूर्व में स्थापित भारतीय मानकों के अनुसार भारत में आज भी कोई विश्वविद्यालय नहीं है। और अभी तक भारत में इस तरफ कोई सार्थक प्रयास…
View More ‘भारतीय गुरुकुल व्यवस्था हम भूल गए, दुनिया के कई देशों ने अपना ली’इस मुद्दे को यहीं क्यों थम जाना चाहिए?
भाषण के दौरान कई बार अर्जुन की पीड़ा और दर्द भी सामने आया। उन्होंने कहा, मैं मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री बने रहना चाहता था। मेरी इच्छा…
View More इस मुद्दे को यहीं क्यों थम जाना चाहिए?यह सात जून के फैसले के अस्तित्व पर सवाल है!
…नई दिल्ली में कैबिनेट ने जीओएम की सिफारिशों पर मुहर लगा दी।… मृतकों के परिजनों को 10 लाख, स्थायी विकलांगों को 5 लाख और कैंसर…
View More यह सात जून के फैसले के अस्तित्व पर सवाल है!दुनिया की संस्कृतियों में बसा है भारतीय नाटक
सभ्यताएँ मानवीय समाज चाहती हैं। फिर भले ही वो भारतीय सभ्यता हो या फिर दुनिया की कोई और। सभ्यता शब्द में ही मानवीयता निहित है।…
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