हम जितने वाचाल, बहिर्मुखी होते हैं, अन्दर से उतने एकाकी, दुखी भी

जीवन में जब होने, खोने और पाने के मायने जल्दी समझ आ जाते हैं, तो समझदार व्यक्ति ही आगे जाने या ख़ुद को ख़त्म करने…

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बुद्ध की बताई ‘सम्यक समाधि’, ‘गुरुओं’ की तरह, अर्जुन के जैसी

आतंक के शिकंजे में दबोचे जा चुके अफ़ग़ानिस्तान से आज, 24 अगस्त 2021 को गुरु ग्रन्थ साहिब की तीन प्रतियाँ भारत आई हैं। गुरु ग्रन्थ…

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अपने पिंजरे हमें ख़ुद ही तोड़ने होंगे

यूँ तो रोज ही छुट्टी है, लेकिन इन दिनों रविवार का अपना मज़ा है। लिहाज़ा उस रोज़ सोचा कि कुछ बटन टूट गए हैं, उन्हें…

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काबुलीवाला से संयुक्त राष्ट्र- हम अफ़ग़ानिस्तान के ड्रायफ्रूट्स के लिए चिन्तित हैं!

काबुलीवाला … हाँ, वही काबुलीवाला। याद ही होगा सबको। गुरुदेव रवीन्द्रनाथ की कहानी का पात्र काबुलीवाला। पाँच साल की बच्ची मिनी का अधेड़ दोस्त काबुलीवाला।…

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संस्कृति को किसी कानून की ज़रूरत कहाँ होती है?

उस वक्त शाम के 5.25 बज रहे थे। मैं जर्मनी में अपने एक ग्राहक के साथ उनके दफ़्तर में बैठा हुआ था। बातचीत जारी थी कि…

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बड़ा दिल होने से जीवन लम्बा हो जाएगा, यह निश्चित नहीं है

दिन के चौबीस घंटों में एकांत यूँ ही आता है, टुकड़ों में और हम उसमें एकसार होते हैं। फिर जीवन में लौट जाते हैं, जहाँ शोर है…

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इंसान की असली परख कैसे होती है?

एक पुरानी कहानी है। एक राजा हुआ करता था। उसका नियम था कि उसके शहर के हाट-बाजार में जो भी सामान नहीं बिकता, उसे वह खरीद…

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आज़ादी का 75वां साल : तंत्र और जन के बीच अब भी एक डंडे का फ़ासला!

और उस दिन ‘तंत्र’ की ‘जन’ से मुलाकात हो गई। पाठकों को लग सकता है कि भाई ‘तंत्र’ और ‘जन’ दोनों की मुलाकात का क्या चक्कर…

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हिन्दी के मुहावरे, बड़े ही बावरे

हिन्दी का थोडा़ आनन्द लेते हैं। हिन्दी के मुहावरों की भाषा, उनकी अहमियत, उनकी ख़ासियत समझने की कोशिश करते हैं। हालाँकि इस ख़ूबसूरती से इन मुहावरों को चन्द…

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हक़ दे इंडिया, इन ‘लड़ाकियों’ को हमारी सांत्वना नहीं चाहिए!

भारतीय महिला हॉकी टीम टोक्यो ओलम्पिक खेलों में चौथे नम्बर रही। शुक्रवार, छह अगस्त को ब्रिटेन ने नज़दीकी मुकाबले में भारत की टीम पर चार-तीन से जीत…

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