हिन्दु पंचांग के अनुसार आज राधाष्टमी है। यानि वह दिन, जब मधुरा के बरसाना कस्बे में, मुखिया वृषभान राय के घर ‘राधा जी’ ने जन्म…
View More राधाष्टमी : ‘या कन्या के आगैं कोटिक बेटन को अब मानैं’Category: चुनिन्दा पन्ने
लिज़ा स्थालकर : खेल दिवस पर भारत का मान बढ़ाने वाली इस बेटी का ज़िक्र
आज राष्ट्रीय खेल दिवस मनाया गया। हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचन्द का जन्मदिन। भारत का मान बढ़ाने वाले खेल-खिलाड़ियों को उनके हिस्से का सम्मान देने का…
View More लिज़ा स्थालकर : खेल दिवस पर भारत का मान बढ़ाने वाली इस बेटी का ज़िक्रजापान : शिंज़ो आबे ने प्रधानमंत्री पद छोड़ने की घोषणा की
जापान के प्रधानमंत्री शिंज़ो आबे ने पद छोड़ने की घोषणा की है। उन्होंने शुक्रवार को मीडिया से बातचीत के दौरान कहा, “अगर मैं लोगों के…
View More जापान : शिंज़ो आबे ने प्रधानमंत्री पद छोड़ने की घोषणा कीवह हमारी स्मृतियों में राेज ही जीवन्त हो जाया करती थी, जैसे आज फिर हो आई है!
आज यकायक माई की याद आ गई। इसीलिए उसकी स्मृति को डायरी में दर्ज कर रही हूँ। यही कोई 38 साल पहले की बात है। तब…
View More वह हमारी स्मृतियों में राेज ही जीवन्त हो जाया करती थी, जैसे आज फिर हो आई है!पंडित जसराज यहीं हैं, और अब तो हर कहीं हैं!
ख़बर आई है कि पंडित जसराज नहीं रहे। पर क्या ऐसा हो सकता है भला? ये सवाल ग़ैरवाज़िब नहीं, बल्कि सोचने लायक है। क्योंकि जो…
View More पंडित जसराज यहीं हैं, और अब तो हर कहीं हैं!फिर स्कूल खुलवाने की कोशिशों के बीच क्या ये ख़बर बच्चों के लिहाज़ से चिन्ता बढ़ाने वाली नहीं है?
कुछ दिनों पहले एक ख़बर पढ़ी थी। विशेष तौर पर मध्य प्रदेश के सन्दर्भ में थी। हालाँकि कमोबेश वैसी स्थिति दूसरे राज्यों में भी हो सकती…
View More फिर स्कूल खुलवाने की कोशिशों के बीच क्या ये ख़बर बच्चों के लिहाज़ से चिन्ता बढ़ाने वाली नहीं है?संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में सफलताओं की नई कहानियों के बीच एक पुरानी कहानी ‘साढ़े तीन फीट’ की भी!
अभी चार अगस्त (मंगलवार) को ही संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी)-2019 की परीक्षा का अन्तिम नतीज़ा आया है। इसमें हरियाणा के प्रदीप सिंह ने पहला स्थान…
View More संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में सफलताओं की नई कहानियों के बीच एक पुरानी कहानी ‘साढ़े तीन फीट’ की भी!मई माह, कभी बारात की सामूहिक मेहमाननवाज़ी का महीना भी होता था, याद है?
वैश्विक महामारी ‘कोरोना’ के इस दौर में देशव्यापी तालाबन्दी है। इसलिए शादी-ब्याह भी नहीं हो रहे हैं। वरना अप्रैल, मई, जून के महीनों में तो…
View More मई माह, कभी बारात की सामूहिक मेहमाननवाज़ी का महीना भी होता था, याद है?बेटा! मेरे नाम की चिट्ठी भेज दे, अब भगवान मुझे बुला ले
ये एक माँ के बोल हैं। सुनकर मन खिन्न रहा दिनभर। समझ नहीं आया कि क्या करूँ, किससे कहूँ। कैसे मदद करूँ। उस माँ की,…
View More बेटा! मेरे नाम की चिट्ठी भेज दे, अब भगवान मुझे बुला लेलगता है, जैसे हम समाज में हैं पर ‘समाज’ कहीं नहीं है!
किस्सा 1967-68 का है। जाने-माने व्यंग्यकार प्रेम जनमेजय के संस्मरण के रूप में यह किस्सा ‘दैनिक भास्कर’ अख़बार के फीचर पेज ‘साहित्य रंग’ में प्रकाशित…
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