भारत का निजी क्षेत्र दुनिया के साथ क़दम मिला रहा है। अभी तक हम अधिकांशत: पश्चिमी देशों की बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के बारे में सुनते थे…
View More काम के कारण अधिक तनाव में हैं, तो घर बैठिए… निजी कम्पनियों का यह स्पष्ट सन्देश!Category: चहेते पन्ने
बदमाश को बना दिया ‘अठन्नी छाप’ समाज-कंटकों का वास्तव में यही इलाज़ है!
समाचार दो-तीन दिन पुराना है। मगर इससे जुड़ा प्रयोग देश में ही नहीं सम्भवत: दुनियाभर में नया है। और इसके असर की बात करें, तो…
View More बदमाश को बना दिया ‘अठन्नी छाप’ समाज-कंटकों का वास्तव में यही इलाज़ है!अलग समस्या-अलबेला समाधान, उम्र के कारण किराए का घर नहीं मिला तो पीपीटी से पाया!
अलग समस्या का समाधान अलबेले तरीक़े से होता है। यह साबित किया है कि बेंगलुरू में रहने वाली एक लड़की ने। इनका नाम है नैना।…
View More अलग समस्या-अलबेला समाधान, उम्र के कारण किराए का घर नहीं मिला तो पीपीटी से पाया!ज़िन्दगी में कुछ अनुभव हमें विनम्र बना जाते हैं, बताता हूँ कैसे…पढ़िएगा!
ज़िन्दगी में कुछ अनुभव हमें विनम्र बना जाते हैं, बताता हूँ कैसे…पढ़िएगा! मैं बस से बद्रीनाथ धाम से ऋषिकेश लौट रहा था। क़रीब 10 घंटे…
View More ज़िन्दगी में कुछ अनुभव हमें विनम्र बना जाते हैं, बताता हूँ कैसे…पढ़िएगा!कनाडा की राजनीति और महाराष्ट्र का चुनाव, सबक एक- भस्मासुरों से दूरी, है बहुत जरूरी!
एक पौराणिक कथा है, भस्मासुर की। उसका असली नाम वृकासुर था। उसने बड़ी तपस्या से भगवान शंकर को प्रसन्न किया। फिर उनसे वरदान माँगा कि…
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भारत सिर्फ़ अंग्रेजी ही नहीं बोलता! किसी के भी पास सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में संवाद और संचार की एक ही भाषा होती है- अंग्रेजी।…
View More भारत सिर्फ़ अंग्रेजी ही नहीं बोलता!चन्द पैसों के अपनों का खून… क्या ये शर्म से डूब मरने की बात नहीं है?
ज़िन्दगी को बेहतर बनाने के लिए यक़ीनन पैसा ज़रूरी है, लेकिन सिर्फ़ और सिर्फ़ पैसा ही ज़रूरी नहीं है। इंसान को जीने के लिए समाज,…
View More चन्द पैसों के अपनों का खून… क्या ये शर्म से डूब मरने की बात नहीं है?सनातन वैदिक धर्म में श्रौत परम्परा अपरिहार्य क्यों है?
प्राय: आस्तिक लोग वेदों की सर्वोच्चता को स्वीकार करते हैं, लेकिन इस स्वीकृति के क्या मायने होते हैं, यह जानने-समझने का उपाय किसी के पास…
View More सनातन वैदिक धर्म में श्रौत परम्परा अपरिहार्य क्यों है?व्यासपीठ से भी कथावाचक पूरे आत्मविश्वास के साथ ग़लतियाँ कैसे कर लेते हैं? ज़वाब सुनिए…
अभी क़रीब एक महीने पहले की बात है। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक बड़े लोकप्रिय कथावाचक श्रीमद्भागवतजी की कथा करने आए हुए थे।…
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दुनिया में तो होंगे ही, अलबत्ता हिन्दुस्तान में ज़रूर से हैं…‘जानवरख़ोर’ बुलन्द हैं। ‘जानवरख़ोर’ यानि जानवरों को खाने वाले। इसकी एक मिसाल अभी अधिक पुरानी…
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