भारत में अस्थायी कामगारों (खास तौर पर सामान की डिलीवरी करने वाले लड़के, वाहन चालक, आदि) की संख्या कितनी हे? 1.2 करोड़! और इतने सारे…
View More सोचिए, अगर दो-ढाई करोड़ युवा सड़कों पर बेरोजगार घूमते रहते, तो क्या होता!Category: चहेते पन्ने
मोबाइल ‘हमें हर पल देख-सुन रहा’ है, अब सरकारें और उसके मुखिया भी मानने लगे हैं!
मोबाइल फोन हर पल हमें देख-सुन रहा है। अब यह बात सरकारें और मुखिया तक मानने लगे हैं। प्रमाण के तौर पर अभी हाल ही…
View More मोबाइल ‘हमें हर पल देख-सुन रहा’ है, अब सरकारें और उसके मुखिया भी मानने लगे हैं!बेटी के नाम 12वीं पाती : जीवन की असल रंगत तुम्हीं से है मेरी बच्ची, जन्मदिन शुभ हो
प्रिय मुनिया मेरी लाडो, मैं तुम्हें यह पत्र तुम्हारे पाँचवें जन्मदिन पर लिख रहा हूँ। आज 27 जनवरी 2026 को तुमने जीवन के चार बसंत…
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अंग्रेजों ने भारत को सिर्फ ऊपरी तौर पर गुलाम बनाकर नहीं रखा था। उन्होंने हमारी मानसिकता को भी गुलाम बना लिया था। इस मानसिक गुलामी…
View More 77वाँ गणतंत्र दिवस और एक सवाल-क्या ‘हम भारत के लोग’ गुलाम मानसिकता से आजाद हैं?‘दुर्योधन’ पर भरोसा रखो, युद्ध तो होकर रहेगा! देखिए, ‘आज के दुर्योधन’ कहाँ-कौन हैं!!
महाभारत युद्ध से ठीक पहले का प्रसंग है। धर्मराज युधिष्ठिर चाहते थे कि किसी तरह युद्ध टाला जा सके तो अच्छा हो। आखिर युद्ध से…
View More ‘दुर्योधन’ पर भरोसा रखो, युद्ध तो होकर रहेगा! देखिए, ‘आज के दुर्योधन’ कहाँ-कौन हैं!!बिना इंजन वाला भारतीय जहाज ‘कौण्डिन्य’ मस्कट पहुँच गया, तो इससे क्या हासिल हुआ?
इतिहास दोबारा लिख दिया गया। आइएनएसवी कौण्डिन्य मस्कट पहुँच गया! सवाल हो सकता है कि आखिर इसमें ऐसी क्या खास बात है? तो जवाब है…
View More बिना इंजन वाला भारतीय जहाज ‘कौण्डिन्य’ मस्कट पहुँच गया, तो इससे क्या हासिल हुआ?नोबेल की लूट है, लूटत बने तो लूट…, और डोनाल्ड ट्रम्प नोबेल लूट ले गए!
कबीर दास जी कह गए थे, “राम नाम की लूट है, लूट सके तो लूट। पाछे फिर पछताएगा, प्राण जाहि जब छूट।।” लगता है अमेरिकी…
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यह मामला जितना ‘रोचक-सोचक’ है, उतना ही ‘सरोकार’ जुड़ा हुआ भी। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की परिवार अदालत में तलाक का एक मामला चल…
View More तलाक चाहिए, क्योंकि सब-इंस्पेक्टर पत्नी को पुरोहित पति के साथ खड़े होने में शर्म आती है‘हिजाब वाली प्रधानमंत्री’ और हजारों फिदायीन जिहादी, क्या भारत इनके लिए तैयार है?
सुर्खियाँ अलग-अलग जगह से बनी हैं। लेकिन भारत के भविष्य से जुड़ी हैं। सभी की पृष्ठभूमि में सवाल एक ही गूँज रहा है कि क्या…
View More ‘हिजाब वाली प्रधानमंत्री’ और हजारों फिदायीन जिहादी, क्या भारत इनके लिए तैयार है?कविता : मैं मरते ही ‘शब्द’ हो जाऊँगा, और गाँव की हर किताब के पन्नों पर मिलूँगा…!
मुझे जहान की गर्द में मत ढूँढना प्यारे।मैं जब नहीं रहूँगा, तो गाँव की उसी ‘सुनहरी-भस्म’ के साथ उड़ता मिलूँगा, जिसे तुम धूल कहते हो।…
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