सांकेतिक तस्वीर
निकेश जैन, इन्दौर, मध्य प्रदेश
चीन ने ‘बाइडू’ बना लिया क्योंकि वहाँ की सरकार ने गूगल को अनुमति नहीं दी। चीन ने ‘अलीबाबा’ बनाया, क्योंकि वहाँ की सरकार ने अमेजॉन को अनुमति नहीं दी। चीन ने ‘यूकू’ बनाया, क्योंकि वहाँ की सरकार ने यूट्यूब को इजाजत नहीं दी। चीन ने ‘वीचैट’ बना लिया, क्योंकि वहाँ की सरकार ने व्हाट्स एप को अनुमति नहीं दी।
इसलिए कृपा कर के ऐसे मामलों से जुड़ी हर चर्चा में चीन का उदाहरण देना बन्द कीजिए। यह मत कहिए कि देखो चीन ने इतना कुछ बना लिया, भारत नहीं बना पाया! आप ‘डेविड’ से यह उम्मीद नहीं कर सकते कि वह असल जीवन में सत्ता की मदद के बिना ‘गोलियथ’ (यह फिलिस्तीन का एक किताबी किरदार है। बड़ा विशालकाय होता था। लेकिन उसे डेविड नाम के व्यक्ति ने गुलेल और पत्थरों से हरा दिया।) को गुलेल और पत्थरों से हरा देगा।
वास्तविक जीवन पर गौर करें तो आज शक्तिशाली अमेरिका की सरकार तक अपने स्थानीय व्यापार-व्यवसाय को बचाने के लिए खुद अखाड़े में उतर चुकी है। इसीलए वह भारत जैसे तमाम देशों पर सख्त वीजा प्रतिबन्ध, सीमा शुल्क आदि लगा रही है। तो क्या भारत का व्यावसायिक वर्ग अपनी सरकार से इसी तरह की उम्मीद नहीं कर सकता? क्या इसमें कोई गलत बात है? यह तो बेहद जरूरी ही है न?
नहीं तो हम भारतीय फिर गूगल, व्हाट्स एप, फेसबुक, अमेजॉन, जैसी दैत्याकार कम्पनियों से मुकाबला कैसे कर सकते हैं? उन्हें प्रतिस्पर्धा कैसे दे सकते हैं? और कब तक? उन भारी-भरकम कम्पनियों की ताकत तो इतनी है कि वे जब चाहें तब दुनिया के किसी भी हिस्से में अपने प्रतिस्पर्धी को खत्म कर सकते हैं।
याद रखिए, यह कोई प्रतिभा या कौशल भर की बात नहीं है। यह बराबरी के मैदान पर खड़े होकर मुकाबला करने की भी बात है। विचार-विमर्श के दौरान इस तथ्य के बारे में हमारी स्पष्टता होनी चाहिए।
मानते हैं या नहीं?
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निकेश का मूल लेख
China built Baidu because the government didn’t allow 𝗚𝗼𝗼𝗴𝗹𝗲 there.
China built Alibaba because government didn’t allow 𝗔𝗺𝗮𝘇𝗼𝗻 there.
China built YouKu because government didn’t allow 𝗬𝗼𝘂𝗧𝘂𝗯𝗲 there.
China built WeChat because government didn’t allow 𝗪𝗵𝗮𝘁𝘀𝗔𝗽𝗽 there.
So please stop giving example of China in every discussion on why India didn’t build its own software.
You can’t expect David to win against Goliath without any support in the realm of reality!
Today, even the US government has to enter the ring and put tariff restrictions and visa restrictions to *save* their local businesses!!
So is it not fair for Indian businesses to expect similar kind of support from their government?
How else you can give *any* competition to WhatsApp or FB or Google or Amazon who are SO HUGE that they can k*ll any competition any day!!
It was never a fight of talent – it was always a fight of “level playing field”
Let’s be very clear about it folks!
Agree?
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(निकेश जैन, कॉरपोरेट प्रशिक्षण के क्षेत्र में काम करने वाली कंपनी- एड्यूरिगो टेक्नोलॉजी के सह-संस्थापक हैं। उनकी अनुमति से उनका यह लेख अपेक्षित संशोधनों और भाषायी बदलावों के साथ #अपनीडिजिटलडायरी पर लिया गया है। मूल रूप से अंग्रेजी में उन्होंने इसे लिंक्डइन पर लिखा है।)
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