सांकेतिक तस्वीर
टीम डायरी
लिंक्डइन के जरिए नौकरी का जाल बिछाकर, रोजगार की तलाश कर रहे लोगों को काम का झाँसा देकर चीन उनसे दुनिया के पाँच बड़े देशों की जासूसी करा रहा है। ये देश हैं- अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैण्ड। इन पाँचों देशों ने मिलकर हाल ही में ‘फाइव आइज’ गठबंधन बनाया है। उसकी गतिविधियों पर अब चीन इन्हीं के देशों के नागरिकों का इस्तेमाल कर के नजर रख रहा है। ‘फाइव आइज’ गठबंधन के देशों की खुफिया एजेंसियों ने संयुक्त रूप से खुद यह चेतावनी जारी की है।
चेतावनियों के अनुसार, चीनी सैन्य खुफिया सेवा के प्रतिनिधियों ने लिंक्डइन पर फर्जी नामों से अपने अकाउंट बनाए हुए हैं। जैसे- ‘रॉबिन झांग’, जो पहले चर्चा में आ चुका है। यह खुद को मानव संसाधन सलाहकार (एचआर कंसल्टेंट) बताता है। इस हैसियत से वह नौकरी के इच्छुक लोगों से आवेदन माँगता है। इस प्रक्रिया के जरिए खास तौर पर उन लोगों का चयन किया जाता है जो पूर्व या वर्तमान सरकारी अफसर हों। सैन्य कर्मी, वैज्ञानिक, आदि रहे हों या अब भी हों। रक्षा क्षेत्रों से जुड़े नीति विश्लेषकों का भी चयन होता है।
साक्षात्कार आदि की प्रक्रिया के बाद चयनित लोगों को आकर्षक भुगतान का लालच दिया जाता है। शुरुआत में इनसे इनके विषय-विशेषज्ञता से जुड़े मामलों में कुछ सामान्य स्तर का लेखन कराया जाता है। फिर जब दो-तरफा भरोसा थोड़ा मजबूत हो जाता है तो और पैसों का लालच देकर गंभीर गोपनीय जानकारियों से जुड़े लेख विश्लेषण, आदि ठोस तथ्यों, तस्वीरों, वीडियो, वगैरा के साथ माँगे जाते हैं। ब्रिटेन की एजेंसी एमआई-5 के अनुसार, ‘फाइव आइज’ देशों के हजारों लोगों का अब तक ऐसा इस्तेमाल हो चुका है।
अलबत्ता, चीन के स्तर पर इस तरह की हरकत न तो कोई नई बात है और न ही आश्चर्यजनक। वैसे, उसकी ओर से इन रिपोर्ताज का खंडन किया गया है। लेकिन उसका खंडन भरोसे का नहीं माना जा सकता क्योंकि वह पहले भी विभिन्न माध्यमों से दुनिया के कई देशों की जासूसी कराता रहा है। लिहाजा, भारत के लोगों को भी खासकर, सतर्क रहने की जरूरत है क्योंकि लिंक्डइन, आदि के जरिए यही हथकण्डा चीन यहाँ भी आजमा सकता है। भारत भी तो आखिर चीन के लिए चुनौतीपूर्ण प्रतिद्वंद्वी ही है न?
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