प्रतीकात्मक तस्वीर
टीम डायरी
देश की एक जानी-मानी ‘पत्रकार’ ने ऑनलाइन पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए कह दिया कि उन्हें कौड़ी का भी ज्ञान नहीं है। उनकी टिप्पणी सार्वजनिक होते ही, जाहिर तौर पर, चौतरफा तीखी प्रतिक्रियाएँ आने लगीं क्योंकि शिक्षक को भारत ही नहीं, दुनियाभर में सम्मान के साथ देखा जाता है। वही तो हैं, जो हर व्यक्ति कुछ न कुछ बनाते हैं। कोई डॉक्टर बने, इंजीनियर, वैज्ञानिक, नेता, मंत्री, अफसर, कलाकार, साहित्यकार, गीतकार, संगीतकार, चित्रकार, या पत्रकार ही, हर एक को बनाने वाले शिक्षक ही होते हैं।
लेकिन अधिकांश लोग ‘कुछ’ बनते ही पिछला ‘सब कुछ’ भूल जाते हैं शायद। शिक्षक को भूल जाना तो मानो आम बात है। उन्हें कुछ समझते ही नहीं। शिक्षकों पर टिप्पणी करने वाली ‘पत्रकार’ भी उन्हीं ‘अधिकांश लोगों’ में शुमार हैं निश्चित रूप से। तभी उन्होंने ऐसी वाहियात टिप्पणी की। अलबत्ता, शिक्षकों ने भी उन्हें आईना दिखाने में कसर न छोड़ी। सबसे दिलचस्प तरीके से तो संस्कृत के विद्वान नित्यानंद मिश्र जी ने उन ‘पत्रकार’ को उनकी हैसियत बताई। नित्यानंद जी का वीडियो नीचे है। देखिए, सब समझ जाएँगे।
हालाँकि, इस मामले को देख-सुनकर एक सवाल जरूर बनता है कि आखिर कोई व्यक्ति थोड़ी सा नाम, रुतबा पाकर अपनी हैसियत इतनी कैसे गिरा लेता है? और क्यूँ?
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