अहम मौक़ों अपने ज़मीर की सुनिए, तारीख़ में नायक बनेंगे!

टीम डायरी

अहम मौक़ों पर अक़्सर हम ख़ुद को दोराहे पर खड़ा पाते हैं। क्या करें, क्या न करें? क्या करना चाहिए, क्या नहीं करना चाहिए? ऐसे तमाम सवाल हमारे ज़ेहन में होते हैं। लेकिन उन सवालों के सही-सही ज़वाब हमें ज़ेहन से नहीं मिलते। बल्कि ज़मीर से, अन्तरात्मा से मिलते हैं। हालाँकि इसके बावज़ूद बहुत से लोग अपने दिमाग़ के सुझाए रास्ते पर चलते हैं। इससे उन्हें ख़ुद के स्तर पर कुछ फ़ायदे ज़रूर हो जाते होंगे। लेकिन लम्बे दौर में एक आलातरीन इंसान के तौर पर  उनके रुतबे, उनकी इज़्ज़त को यक़ीनी तौर पर चोट पहुँचती है। इससे ठीक उलट जो अपनी अन्तरात्मा की सुनकर उसके दिखाए रास्ते पर चलते हैं, तारीख़ के किसी न किसी कोने में उनकी इज़्ज़त-अफ़ज़ाई भी पुख़्ता हो जाती है। वे अपने वक़्त के नायक हो जाते हैं। 

अपनी डिजिटल डायरी (#ApniDigitalDiary) के पॉडकास्ट ‘डायरीवाणी’  (#DiaryWani) में इसी से जुड़ी दो मिसालों की कहानी बताई गई है। सुनिएगा। 

सोशल मीडिया पर शेयर करें
Neelesh Dwivedi

Recent Posts

जनगणना हो रही है, जनसंख्या बढ़ रही है और आंध्र में आबादी बढ़ाने वालों को ‘इनाम’!

देश में जनगणना होने वाली है। मतलब जनसंख्या कितनी है और उसका स्वरूप कैसा है,… Read More

15 hours ago

एक यात्रा, दो मुस्लिम ड्राइवर और दोनों की सोच….सूरत-ए-हाल गौरतलब!

अभी एक तारीख को किसी जरूरी काम से भोपाल से पन्ना जाना हुआ। वहाँ ट्रेन… Read More

3 days ago

सेवा-तीर्थ में ‘भारतीय भाषाओं’ की सेवा नहीं हुई, आगे शायद ही हो!! वीडियो से समझिए!

भारत के प्रधानमंत्री कार्यालय के नए परिसर का उद्घाटन 13 फरवरी 2026 को हुआ। इसे… Read More

6 days ago

भ्रष्ट-आचार अब एक शिष्ट-विचार, इसे खत्म करना मुश्किल, दो उदाहरणों से समझिए कैसे?

‘भ्रष्ट’ का अर्थ है- जब कोई अपने धर्म (कर्तव्य-पथ) से दूर हट जाए और ‘आचार’… Read More

7 days ago

ईस्ट इण्डिया कम्पनी फिर ‘दफन’, और ‘गुलाम-सोच’ लिखती है- “सूरज डूब गया”!

ऐसी सूचना है कि अंग्रेजों की ईस्ट इण्डिया कम्पनी फिर दिवालिया हो गई और उसका… Read More

1 week ago