संयोग और चमत्कार में आख़िर अन्तर क्या है?

अनिरुद्ध, दिल्ली से ; 1/9/2020

आज अनन्त चतुर्दशी मनाई गई। भगवान विष्णु के अनन्त स्वरूप की इस दिन विशेष पूजा की जाती है। इसलिए उन्हीं से जुड़े अपने अनुभव के एक प्रसंग को आज मैं ‘डायरी’ में दर्ज़ करना चाहूँगा। कुछ रोज पहले मेरे एक परिचित ने मुझे व्हाट्स ऐप पर एक वीडियो भेजा। तिरुपति के मन्दिर में भगवान वेंकटेश्वर की आरती का वीडियो था। उसे देखकर मेरे सामने कई साल पहले की यादें ताज़ा हो गईं, जब मैं तिरुपति गया था। भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन के लिए। इस समय जो वीडियो मेरे सामने था, वह महज 1:02 मिनट का था। लेकिन उसे देखने के बाद बहुत देर तक उस मन्दिर के तमाम दृश्य मेरी आँखों के सामने घूमते रहे। एक बार तो ऐसा लगा जैसे मुझे मन्दिर की खुशबू भी महसूस हो रही है। कर्पूर, जलते हुए घी के दीपक और फूलों की मिली-जुली खुशबू। 

पता नहीं, यह संयोग था या सच में कोई चमत्कार। अभी मैं अपनी इस मनोदशा में ही था कि मेरे मोबाइल फोन की घंटी बजी। फोन मेरे अख़बार के मुख्यालय से था। दूसरी तरफ़ से मुझे निर्देश दिया गया, “आपको तत्काल तिरुपति जाना है। वहाँ से ज़मीनी रपट तैयार करनी है। पता लगाना है कि कोरोना महामारी के संक्रमण से  सुरक्षा के लिए वहाँ किस तरह के प्रबन्ध किए गए हैं।” यह सुनकर मेरे आश्चर्य की सीमा नहीं रही क्योंकि मैं भगवान वेंकटेश की आरती का वीडियो देखते हुए सोच ही रहा था कि काश! मुझे फिर उनके दर्शन का सौभाग्य मिल जाए। और कामना करते ही वह अवसर मेरे सामने उपस्थित था। मैंने यह बात और वीडियो देखने के दौरान हुआ अनुभव, अपने उन परिचित से तुरन्त ही साझा किया, जिन्होंने वह मुझे भेजा था। वे भी यह सब सुनकर भाव-विभोर हो गए। वे कहने लगे, “आप जब भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन करें तो देखिए कि क्या वही सुगन्ध सचमुच वहाँ रहती है, जो आपने आरती का वीडियो देखते समय महसूस की थी? अगर वैसा ही अनुभव हो तो मुझे भी ज़रूर बताइए।” मैंने उनकी बात पर अपनी सहमति दी और यात्रा की तैयारी करने लगा। 

दिल्ली से विशेष अनुमति लेकर मैं तिरुपति पहुँचा। दिनभर वहाँ मैंने ज़मीनी हालात और इन्तज़ामों का जायज़ा लिया। उसकी रपट तैयार की। तभी पता चला कि गर्भगृह में प्रवेश वर्जित है। फिर शाम को काम ख़त्म करने के बाद मेरी भेंट मन्दिर के प्रशासकीय अधिकारी से हुई। वे बड़े सह्दय थे। खुद होकर उन्होंने पूछा, “क्या आपने मंगला में दर्शन नहीं किए?’ मैंने उनसे कहा, “नहीं। मेरा आना तो यहाँ पहले भी हो चुका है, लेकिन भगवान ने कभी मंगला आरती के दर्शन नहीं दिए।” इतना सुनते ही प्रशासकीय अधिकारी ने अगली सुबह की मंगला आरती की पर्ची काटकर मेरे हाथ में थमा दी। उन्होंने कहा, “सुबह आप मंगलादर्शन कर के ही यहाँ से रवाना होइए।” यह सुनते ही मेरी खुशी का तो ठिकाना ही नहीं रहा है। मेरी बरसाें की आस पूरी हो रही थी। अगली सुबह भगवान की मंगला आरती का मैं पहली बार साक्षी बना। अद्भुत दर्शन। ऐसा कि उस अनुभव को शब्दों में बाँधा नहीं जा सकता। और सच में। पूरा वातावरण उस समय उसी खुशबू से नहाया हुआ था, जो मुझे व्हाट्स ऐप पर मिले वीडियो को देखते हुए आ रही थी। सम्भव है, कोई तार्किक बुद्धि इस पर भरोसा न करे लेकिन मेरे लिए यह सच था।

इस पोस्ट के साथ मैं वह वीडियो भी साझा कर रहा हॅूँ, जिसे देखने के बाद मैं ऐसे ‘चमत्कारिक’ घटनाक्रम से गुजर सका। अलबत्ता मेरा यह अनुभव किन्हीं और लोगों के लिए ‘संयोग’ मात्र हो सकता है। क्योंकि ‘चमत्कार’ और ‘संयोग’ की प्रकृति तो कमोबेश एक सी ही होती है। दोनों औचक और अनापेक्षित होते हैं। बस फर्क इतना होता है कि एक जैसे अनापेक्षित और औचक घटनाक्रम के अगर कई लोग साक्षी बनें तो वह ‘चमत्कार’ कहला जाता है। जबकि यही सब अगर निजी तौर पर किसी के साथ गुजरे तो उसे ‘संयोग’ की संज्ञा दे दी जाती है।

——-

(अनिरुद्ध पेशे से पत्रकार हैं। वे देश के एक बड़े अख़बार के दिल्ली दफ़्तर में पदस्थ हैं। उन्होंने अपना यह अनुभव और वीडियो अपने मित्र के जरिए #अपनीडिजिटलडायरी को भेजा है।)

 

सोशल मीडिया पर शेयर करें
Apni Digital Diary

Share
Published by
Apni Digital Diary

Recent Posts

इस बच्चे ने बता दिया कि जिन्हें पढ़ना-लिखना है, अव्वल आना है, वे तिलचट्‌टों से दूर क्यों हैं?

देशभर के चिकित्सा महाविद्यालयों में प्रवेश के लिए हुई री-नीट (राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा- दोबारा आयोजित)… Read More

3 hours ago

56 साल के ‘युवा’ सत्ता के लिए आग भड़का रहे और 28 साल के देश को नई ऊँचाई दे रहे!

अभी सोमवार, 20 जुलाई को संसद का मॉनसून सत्र शुरू हुआ। इससे कुछ समय पहले… Read More

1 day ago

वंदेमातरम

जय जय श्री राधे Read More

2 days ago

‘सरल भक्तमाल’- 11..: तर्क कोई कितने भी दे, वैष्णव भक्ति के मूल सम्प्रदाय तो चार ही हैं!

कलि युग में भक्ति मार्ग पाखण्ड से घिरा रहता है, इसलिए भगवान के भजन-पूजन, नाम… Read More

4 days ago

फिल्म ‘थ्री इडियट’ के फुनसुक वाँगड़ू नहीं हैं सोनम वाँगचुक, फिर भी ऐसा प्रचार क्यों?

शिक्षा प्रणाली में मूलभूत सुधार और केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की माँग… Read More

5 days ago

केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा मण्डल ने अंग्रेजी को ‘विदेशी भाषा’ कह दिया, तो हाय-तौबा क्यों?

भाषा को लेकर बेवजह की हाय-तौबा मची हुई इन दिनों। वजह वही, पीढ़ियों से भारतीय… Read More

6 days ago