अमेरिका में बहुचर्चित एपस्टीन फाइल्स का आज खुलासा होने वाला है।
टीम डायरी
अमेरिकी सीनेट (वहाँ की संसद का उच्च सदन) को धन्यवाद दिया जाना चाहिए कि उसने दो तिहाई से अधिक बहुमत से एपस्टीन मामले के दस्तावेजों सार्वजानिक होने की राह की सारी अड़चनों को दूर कर दिया। अमेरिकी पुलिस और न्यायपालिका भी श्रेय की हकदार है, जिसने इतने हाई प्रोफाइल मामले की ठीक से पड़ताल कर आरोपी और इस गंदगी में खेलने वाले किरदारों की जलील हरकतों को गुमनामी में दफन नहीं होने दिया। ऐसे में, 19 दिसम्बर 2025 आधुनिक मानव सभ्यता के लिए एक खास तारीख साबित होने वाली है। क्योंकि इस रोज एपस्टीन मामले के दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएँगे।
यह कोई मामूली घटना नहीं क्योंकि इस काण्ड में अमेरिकी राष्ट्रपति ही नहीं, पाश्चात्य जगत, तथा दुनियाभर में सफलता और ताकत के कई प्रतिमान व व्यक्तित्त्व बेपर्दा होने जा रहे हैं। पाश्चात्य सभ्यता की नैतिकता और चारित्रिकता जार-जार होकर कागजी पुर्जों के मानिंद हवाओं में उड़ने वाली है। यह घटना जिस समय हो रही है, उस वक्त इससे विस्फोटक कोई और घटना नहीं हो सकती। चीन के बढ़ते वर्चस्व, यूक्रेन मामले में रूस, अमेरिका-यूरोप का संघर्ष और अंदरूनी कशमकश के बीच यह आधिकारिक रहस्योद्घाटन जबरदस्त भूगर्भीय ऊर्जा छोड़ने वाला है।
यह नैसर्गिक है कि इसका शस्त्रीकरण होगा। आज दौर ऐसा है कि इंसान हर शय का बतौर हथियार इस्तेमाल करना सीख चुका है। यह गहन अध्ययन का विषय होगा कि इस मामले में रेखांकित हुए लोग जैसे डोनाल्ड ट्रम्प, बिल क्लिंटन बिल गेट्स सहित यूरोपीय श्रेष्ठि वर्ग और तमाम महत्वाकांक्षी प्रकट और गुप्त ताकतें विश्व राजनीतिक परिदृश्य में अपने पत्ते कैसे खेलती हैं। उपनिवेशवादी सत्ताओं की मूलगत नैतिक संशयात्मकता पर ऐसा क्रूर उपहास इतिहास में कम ही देखने को मिलता है।
वैश्विक मीडिया इसे एक अपवाद स्वरूप टुच्ची घटना में रूपांतरित करने का हर सम्भव प्रयास करेगा। आपका अपना मीडिया भी उसी रेखा को अपनी समझ से खींचेगा। जैसे कि इन खलनायकों का कवरेज स्थगित या सीमित करना, उनकी गतिविधियों की पड़ताल करना आदि। लेकिन इस सब के बावजूद ये सब के सब अपकीर्ति रूपी मृत्यु को प्राप्त होंगे, भले निर्लज्जता से उनके प्रेत यत्र-तत्र घूमते फिरें या हँसते बतियाते भी दिखें।
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