तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी का बयान इन दिनों चर्चा में है।
टीम डायरी
ये नेता लोग भी न, अक्सर ऐसे बयान दे देते हैं कि न हँसते बनता है, न ही रोते। अब तेलंगाना के मौजूदा मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को ही ले लें। उन्होंने हाल में बयान दिया है, “दिसम्बर बड़ा पवित्र और चमत्कारिक महीना है। क्योंकि इस महीने ईसा मसीह का जन्म हुआ। तेलंगाना राज्य अस्तित्त्व में आया। इसी महीने सोनिया गाँधी का जन्मदिन भी पड़ता है!” रेवंत रेड्डी के इस बयान के बाद विपक्षी दलों ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उनके मुताबिक, “यह चाटुकारिता की हद है। अपनी पार्टी की नेता को खुश करने के लिए रेवंत हद से नीचे गिर गए हैं।”
अब मुख्यमंत्री और विपक्षी नेताओं के बयानों के पीछे की मंशा तो वही जाने, लेकिन सवाल यह जरूर उठता है कि भला ऐसे बयानों का अर्थ क्या है? क्या कुर्सी पाने और उस पर टिके रहने के लिए ऐसे बयान जरूरी समझे जाते हैं या कोई और बात है? क्योंकि आम धारणा तो यही है कि कुर्सी तक जनता पहुँचाती है, वही चाहे तो उतार भी देती है। सो, अगर कुर्सी पर टिके रहने की मंशा किसी के मन में है, तो बेहतर यही है कि वह जनता को जनार्दन समझे और उसकी सेवा पर ध्यान दे। जनता-जनार्दन का साथ मिल गया तो पार्टी नेता भी संग हो ही लेंगे।
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