ये कैसे प्रबन्धक हैं, जो पैसे और पैसेवालों के लिए भगवान को भी कष्ट देने से नहीं चूकते?

टीम डायरी

सनातन संस्कृति में भगवान के विग्रहों को चैतन्य अर्थात् जीवन्त माना गया है। इसलिए कि हम उन्हें अपनी तरह समझें, अपना मानें और उनके साथ अपननत्त्व भाव से नाता रखें। इसीलिए सभी सनातनियों के घरों में भगवान के श्रीविग्रह को समय-समय पर सुलाने-जगाने और उन्हें भोग, आदि अर्पित करने की परम्परा है। भगवान के विभिन्न मन्दिरों में तो इस परम्परा का पूरे मनोयोग से, सख्त नियम-मर्यादाओं के साथ पालन किया जाता है। यद्यपि इन दिनों देश के कई मन्दिरों में सरकारों के प्रश्रय वाले नए-नवेले ‘प्रबन्धक’ इस परम्परा को छिन्न-भिन्न करने पर तुले हैं। यही नहीं, पैसे और पैसेवालों के लिए वे भगवान को कष्ट देने से भी परहेज नहीं कर रहे। 

इस बात का पहला उदाहरण वृन्दावन के बाँकेबिहारी मन्दिर का है। धाम से जुड़े एक मामले की सर्वोच्च अदालत में सोमवार, 15 दिसम्बर को सुनवाई हुई। इस दौरान अदालत ने मन्दिर के रोजमर्रा के काम देखने के लिए नियुक्त की गई समिति और उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया। यह उच्चाधिकार प्राप्त समिति शीर्ष अदालत ने ही बनाई थी। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश अशोक कुमार इसके मुखिया हैं। मगर इस समिति के कामकाज के तरीके पर ही अब सवाल उठ रहे हैं। सोमवार की सुनवाई के दौरान खुद शीर्ष अदालत ने सवाल उठाए और कहा, ‘भगवान के विश्राम में भी बाधा डाली जा रही है। दोपहर के 12 बजे के बाद जब भगवान के विश्राम का समय होता है, आप तब भी विशेष पूजा, आदि रखवा रहे हैं। वह भी उन लोगों के लिए जो पैसे वाले हैं। मोटी दक्षिणा, चढ़ावा दे सकते हैं, उनके लिए? ऐसी विशेष पूजा के लिए धनी-मानी लोगों को आमंत्रित किया जा रहा है?” इतना ही नहीं, नई समिति ने भीड़-प्रबन्धन के नाम पर बाँकेबिहारी मन्दिर में वर्षों से चल रही ‘देहरी पूजन’ की परम्परा को भी अनिश्चित काल के लिए निलम्बित किया है। इस पर भी चिन्ता जताई गई है।

इसके बाद इसी तरह का मिलता-जुलता मामला ओडिशा के पुरी जगन्नाथ मन्दिर से भी सामने आया है। यह पुरी-जगन्नाथ मन्दिर के अधिकारक्षेत्र वाली जमीन बेचे जाने से सम्बन्धित है। ओडिशा उच्च न्यायालय ने इससे जुड़ी याचिका खारिज करते हुए कहा है, “धाम में विराजे प्रभु जगन्नाथ को किशोर माना गया है। अर्थात वे नाबालिग हैं, और नाबालिग से जुड़ी सम्पत्ति पूर्व कानूनी अनुमति के बिना नहीं बेची जा सकती।” इस तरह फिलहाल तो वह सम्पत्ति बिकने से बच गई। लेकिन कब तक? यह एक बड़ा सवाल है। 

आन्ध्र प्रदेश के तिरुपति बालाजी मन्दिर से जुड़ा विवाद भी याद दिलाना यहाँ प्रासंगिक है। वहाँ मन्दिर के प्रबन्धकों ने ‘शॉल घोटाला’ के तहत भगवान के खजाने में 54.95 करोड़ रुपए की चपत लगा दी। इससे पूर्व इन्हीं प्रबन्धकों पर आरोप लगा था कि उन्होंने मन्दिर के प्रसाद के रूप में बनाए जाने वाले लड्‌डुओं के लिए दूषित घी की आपूर्ति होने दी। उस घी में सुअर की चर्बी, गौवंश की चर्बी और मछली का तेल, आदि मिला हुआ था।  इसी तरह उज्जैन, मध्य प्रदेश के महाकाल मन्दिर के प्रबन्धकों द्वारा ‘वीआईपी पर्ची’ घोटाला किए जाने का मामला भी प्रकाश में आ चुका है, जिसमें दर्शन के लिए 200 रुपए की पर्चियाँ 3,000 रुपए तक में बेची गईं। 

ऐसे सभी मामले हिन्दू धर्मावलम्बियों के सामने गम्भीर सवाल की तरह खड़े हैं। इसका उत्तर उन्हें खुद, जितनी जल्दी हो ढूँढने होंगे, अन्यथा सनातन धर्मस्थलों की पवित्रता-भंग के लिए किन्हीं बाहरी आक्रान्ताओं की जरूरत नहीं पड़ेगी फिर। मन्दिरों के तथाकथित प्रबन्धक ही यह काम कर डालेंगे!!

सोशल मीडिया पर शेयर करें
Neelesh Dwivedi

Share
Published by
Neelesh Dwivedi

Recent Posts

पर्यावरण दिवस, ईंधन बचाने की बातें और निजी कारों का ऐसा तमाम-जाम, दिलचस्प है न?

मैं बेंगलुरू में जहाँ रहता हूँ, वहाँ अपने घर के सामने रोज इस तरह का… Read More

3 hours ago

लिंक्डइन के जरिए नौकरी का जाल, चीन से पाँच देशों की जासूसी, भारतीय भी सावधान रहें!

लिंक्डइन के जरिए नौकरी का जाल बिछाकर, रोजगार की तलाश कर रहे लोगों को काम… Read More

1 day ago

‘शिक्षक’ ने अपने कौड़ी के ज्ञान से ‘पत्रकार’ को दो कौड़ी का साबित कर दिया, देखिए वीडियो!

देश की एक जानी-मानी ‘पत्रकार’ ने ऑनलाइन पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए कह दिया कि… Read More

2 days ago

क्या हम भारतीयों को सार्वजनिक नियम-कायदे मानने की तमीज नहीं? अभी बहस तो यही है!

अभी एक-दो दिन से मीडिया-सोशल मीडिया में यह बहस चल रही है कि हम भारतीयों… Read More

3 days ago

अपने हिस्से का योगदान दीजिए, वरना लू के थपेड़ों से रोज 3,400 लोग मरने लग जाएँगे!

एक नया अध्ययन हुआ है। इसमें भारत और उसके आस-पास के देशों में लगातार बढ़ती… Read More

4 days ago

इस लड़की ने दो लाख की नौकरी छोड़कर 60 हजार रुपए महीने में खुशी खरीदी है!

खुशी पाने के लिए लोग क्या-क्या नहीं करते। ज्यादातर लोग अमूमन बड़ी से बड़ी नौकरी… Read More

5 days ago