#अपनीडिजिटलडायरी के पाँच वर्ष : सोच अडिग, प्रयास निरंतर, पहुँच 80,000 के करीब!

नीलेश द्विवेदी, भाेपाल मध्य प्रदेश

आज पाँच वर्ष हो गए। आज ही, ऋषि पंचमी के दिन #अपनीडिजिटलडायरी की शक्ल में एक ‘ऋषि प्रयास’ शुरू किया गया था। हाँ, ‘ऋषि प्रयास’ ही, जिसमें अपने कल्याण की भावना सबसे अंत में होती है। सबसे पहले होता है, जनकल्याण, जगतकल्याण का भाव। और इन प्रयासों में निष्ठा ऐसी कि सप्त ऋषियों की तरह युगों-युगों से, युगों-युगों तक अपनी जगह अटल रहते हुए सबका साथ लेकर, सबके साथ चलते हुए, आगे बढ़ते रहना है। हम भी मिलकर #अपनीडिजिटलडायरी के माध्यम से यही कर रहे हैं।   

इसीलिए हमने इस बार के शीर्षक में ही लिखा, ‘सोच अडिग, प्रयास निरंतर’। और इस अडिग सोच तथा निरंतर प्रयास का प्रतिफल देखिए। जो #डायरी पिछले साल तक महज 20,000 लोगों का दरवाजे तक भी बमुश्किल पहुँच पाती थी, वह अब 80,000 लोगों के आस-पास तक पहुँच रही है। वह भी लगभग 28 दिन के समयचक्र में ही। नीचे दिए पहले ग्राफिक में गूगल की ओर से इस सम्बन्ध में बताए गए आँकड़े हैं। देख सकते हैं। और ध्यान दीजिए कि #डायरी पर हम आज भी कम संसाधनों के कारण दिन में मात्र एक ही लेख, कहानी, कविता, आदि डाल पाते हैं। लेकिन ऐसे एक-एक प्रयास भी 800 से अधिक लोग आकर पढ़ रहे हैं।     

पिछले साल डायरी की पहुँच महज 20-25 हजार लोगों तक होती थी। अब यह चार गुणा ज्यादा है।

हमारे साथ लगातार जुड़े रहने वालों की संख्या भी पिछले साल की तुलना में दोगुनी (अब 200 से अधिक, दूसरा ग्राफिक देख सकते हैं) हो चुकी है। इतना ही नहीं, एक विशेष उल्लेखनीय बात यह भी है कि अब हमारे पाठक #अपनीडिजिटलडायरी को पढ़ने के लिए अन्य लोगों को भी प्रेरित कर रहे हैं। उन्हें इसके बारे में सुझा रहे हैं। इसे गूगल एनालिटिक्स की शब्दावली में रेफरल कहा जाता है, जिसका आँकड़ा अभी एकाध महीने पहले से ही जुडृना शुरू हुआ है। यहाँ फिर गौर कीजिए कि हम पहुँच बढ़ाने के लिए आज भी किसी तरह के विज्ञापन या प्रचार-प्रसार, आदि पर एक पैसा भी खर्च नहीं कर रहे हैं। मतलब, ये जो तमाम आँकड़े हैं, वे सब स्वप्रेरणा से सीधे, अथवा सोशल मीडिया के माध्यम से हमसे जुड़ने वाले लोगों से सम्बन्धित हैं। 

पिछले साल डायरी पर आने वाले लोगों के तादाद 100 के करीब भी बमुश्किल थी। अब यह भी लगातार दोगुनी है।

यद्यपि, इसके बावजूद हँसने वाले या मजाक बनाने वाले लाेग हँस सकते हैं, मजाक बना सकते हैं कि ये इतने छोटे-मोटे आँकड़े, भी कोई बखान करने की चीज हैं क्या? तो हम कहेंगे कि हाँ, बिल्कुल हैं। जब व्यावसायिकता के इस दौर में कोई एक भी पैसा कमाए बिना, या एक भी पैसा प्रचार-प्रसार पर लगाए बिना, जनसरोकार से जुड़े प्रयास इतने वर्षों से निरंतर करता आ रहा हो, तो उसके लिए ये छोटे-मोटे आँकड़े भी मायने रखते हैं। क्योंकि, इससे उसे प्रोत्साहन मिलता है। उसे लगता कि उसके प्रयास यूँ ही व्यर्थ नहीं जा रहे हैंं। करोड़ों-अरबों की भीड़ में चन्द लोग तो हैं, जो इस तरह के प्रयासों को सराह रहे हैं, उनका साथ भी दे रहे हैं।    

सो, इन्हीं चन्द चुनिन्दा लोगों के प्रोत्साहन के दम पर हम लगे हुए हैं और आगे भी अपनी क्षमताओं, अपनी हैसियत के आखिरी बिन्दु पर पहुँच जाने तक लगे रहेंगे। इस बीच, अगर इन प्रयासों को तेज गति देने के लिए यदि कभी कोई समान सोच वाला निवेशक मिला तो बेहतर, अन्यथा ऐसे ही। 

सभी को हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई।

—– 

पिछले सालों का हमारा ब्यौरा 

4- #अपनीडिजिटलडायरी के 4 साल : प्रयास 3 लोगों से शुरू, पहुँच 24,000 लोगों तक!
3 – #अपनीडिजिटलडायरी के तीन साल, तीन ताल जैसे… कभी भरे, कहीं खाली!
2 –  ऋषि पंचमी और #अपनीडिजिटलडायरी का दूसरा वर्ष : लम्बा है सफ़र इसमें कहीं…
1 – अपनी डिजिटल डायरी का एक वर्ष..

सोशल मीडिया पर शेयर करें
Neelesh Dwivedi

Share
Published by
Neelesh Dwivedi

Recent Posts

पर्यावरण दिवस, ईंधन बचाने की बातें और निजी कारों का ऐसा तमाम-जाम, दिलचस्प है न?

मैं बेंगलुरू में जहाँ रहता हूँ, वहाँ अपने घर के सामने रोज इस तरह का… Read More

3 hours ago

लिंक्डइन के जरिए नौकरी का जाल, चीन से पाँच देशों की जासूसी, भारतीय भी सावधान रहें!

लिंक्डइन के जरिए नौकरी का जाल बिछाकर, रोजगार की तलाश कर रहे लोगों को काम… Read More

1 day ago

‘शिक्षक’ ने अपने कौड़ी के ज्ञान से ‘पत्रकार’ को दो कौड़ी का साबित कर दिया, देखिए वीडियो!

देश की एक जानी-मानी ‘पत्रकार’ ने ऑनलाइन पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए कह दिया कि… Read More

2 days ago

क्या हम भारतीयों को सार्वजनिक नियम-कायदे मानने की तमीज नहीं? अभी बहस तो यही है!

अभी एक-दो दिन से मीडिया-सोशल मीडिया में यह बहस चल रही है कि हम भारतीयों… Read More

3 days ago

अपने हिस्से का योगदान दीजिए, वरना लू के थपेड़ों से रोज 3,400 लोग मरने लग जाएँगे!

एक नया अध्ययन हुआ है। इसमें भारत और उसके आस-पास के देशों में लगातार बढ़ती… Read More

4 days ago

इस लड़की ने दो लाख की नौकरी छोड़कर 60 हजार रुपए महीने में खुशी खरीदी है!

खुशी पाने के लिए लोग क्या-क्या नहीं करते। ज्यादातर लोग अमूमन बड़ी से बड़ी नौकरी… Read More

5 days ago